प्र1.
पृष्ठ 100 और 101 पर दर्शाई गई वस्तुओं या इस अध्याय में चित्रित अन्य वस्तुओं को देखते हुए क्या आप उन गतिविधियों और जीवन के पक्षों का पता लगा सकते हैं, जो हड़प्पावासियों के लिए महत्वपूर्ण थे?
उत्तर
हर वस्तु किसी गतिविधि का सूत्र है। दोनों पृष्ठों की वस्तुएँ एक-एक करके देखिए और पूरा जीवन उभर आता है।
| वस्तु (चित्र) | यह बताती है कि क्या महत्वपूर्ण था |
|---|---|
| कांस्य दर्पण (6.14.1, धौलावीरा) | व्यक्तिगत रूप-सज्जा — और कांसे को ढालकर इतना चमकाने का कौशल कि उसमें प्रतिबिंब दिखे |
| टेराकोटा का पात्र (6.14.2, धौलावीरा) | खाना पकाना, भंडारण — और सजावट। उस पर पट्टियाँ और आकृतियाँ चित्रित हैं, अर्थात रसोई का पात्र भी सुंदर होना चाहिए था |
| भार तौलने के पत्थर (6.14.3, धौलावीरा) | व्यापार में सटीक माप। क्रमबद्ध आकारों के बाट का अर्थ है निश्चित मानक, ईमानदार लेन-देन और उसके पीछे एक प्रशासन |
| कांस्य छैनी (6.14.4, धौलावीरा) | शिल्प और निर्माण — वही औजार जिससे नगर का पत्थर तराशा गया |
| पत्थर का खेल-बोर्ड, लगभग 25 से.मी. (6.14.5) | वयस्कों का मनोरंजन — और नियम, क्योंकि बोर्ड-खेल के लिए सहमत नियम चाहिए |
| मिट्टी की सीटी, लगभग 4 से.मी. (6.14.6, करनपुरा) | बचपन। किसी ने बच्चों के लिए खिलौने बनाए |
| ‘पुरोहित राजा’ की मूर्ति (6.15.1) | महत्वपूर्ण व्यक्ति, बढ़िया वस्त्र और व्यक्ति-चित्रण — आकृतियों वाला दुशाला देखिए। पर पुस्तक चेताती है : “यह मालूम नहीं है कि यह प्रतिमा किसकी है” |
| स्वस्तिक वाली मुहर (6.15.2) | प्रतीक और विश्वास — यह चिह्न भारत में आज भी प्रचलित है |
| त्रिमुखी देवता वाली मुहर (6.15.3) | धार्मिक या प्रतीकात्मक विचार — ऊँचे स्थान पर बैठी, शक्तिशाली पशुओं से घिरी त्रिमुखी आकृति |
| ‘नर्तकी’ की कांस्य प्रतिमा, 10.8 से.मी. (6.15.4) | संगीत, नृत्य, आभूषण और आत्मविश्वास — और कांसे की ढलाई पर पूरा अधिकार |
| नमस्ते की मुद्रा में मूर्ति (6.15.5) | अभिवादन और सम्मान की मुद्राएँ, जो भारत में आज भी प्रतिदिन प्रयोग होती हैं |
| पात्र पर प्यासे कौए का चित्रण (6.15.6, लोथल) | कथा-परंपरा — ठीक वही कहानी जो आज भी बच्चों को सुनाई जाती है |
अब सूत्रों को समूहों में बाँटिए। जीवन के पाँच पक्ष उभरते हैं :
- काम और कौशल — कांसे की ढलाई, पत्थर की तराशी, मिट्टी के बर्तन, बुनाई।
- व्यापार और माप में ईमानदारी — क्रमबद्ध बाट।
- सौंदर्य और शरीर की देखभाल — दर्पण, आभूषण, चित्रित पात्र, ओमान में मिला हाथी दाँत का कंघा।
- खेल, संगीत और बचपन — खेल-बोर्ड, सीटी, नृत्य करती आकृति।
- विश्वास और कथा — स्वस्तिक, त्रिमुखी देवता की मुहर, नमस्ते, कौआ और पात्र।
इन दो पृष्ठों पर जो नहीं है, वह भी उतना ही बोलता है : यहाँ कोई तलवार नहीं, कोई कटार नहीं, कोई ढाल नहीं, कोई युद्ध-रथ नहीं, शत्रु को कुचलते राजा का कोई चित्र नहीं। लगभग हर दूसरी प्राचीन सभ्यता की कला युद्धों से भरी है। पृष्ठ 100–101 को एक साथ पढ़िए और ऐसे लोग दिखते हैं जिन्होंने अपना कौशल स्नान, माप, सजावट, खेल और उपासना पर लगाया — यही वह प्रमाण है जिसके आधार पर अध्याय कहता है कि “यह अपेक्षाकृत एक शांतिपूर्ण सभ्यता प्रतीत होती है”।