यह कहानी प्यासे कौए की है — और लोथल के पात्र का चित्रण (चित्र 6.15.6) ठीक वही क्षण दिखाता है जब कौए को उपाय सूझता है। पूरी कहानी इस प्रकार है :
उसे एक पात्र मिलता है जिसकी तली में थोड़ा-सा जल है — उसकी चोंच वहाँ तक नहीं पहुँचती।
वह न पात्र गिरा सकता है, न तोड़ सकता है।
तभी उसे उपाय सूझता है : वह एक-एक करके कंकड़ उठाकर पात्र में डालता है।
हर कंकड़ के साथ जल ऊपर उठता जाता है … और अंत में ऊपर आ जाता है।
कौआ जल पीता है और उड़ जाता है।
सीख : जहाँ बल हार जाता है, वहाँ बुद्धि जीत जाती है।
यह पात्र इतना महत्वपूर्ण प्रमाण क्यों है। हड़प्पाई कलाकार ने पात्र पर बैठा कौआ नहीं बनाया — वह केवल एक चित्र होता। चित्रण में ऊँचा सँकरा पात्र और उसमें नीचे तक उतरा जल दिखाया गया है, अर्थात चित्रकार यह मानकर चल रहा था कि शेष कहानी आप पहले से जानते हैं। जो चित्र कहानी को मान लेता है, वह इस बात का प्रमाण है कि कहानी पहले से प्रसिद्ध थी।
यह 4,000 से अधिक वर्षों तक कैसे याद रही? लेखन से नहीं — हड़प्पाई लिपि पढ़ी नहीं जा सकी, और यह कहानी बहुत बाद तक लिखी नहीं गई। यह श्रुति परंपरा से बची, और सभ्यता की विशेषताओं की सूची में ‘श्रुति परंपराओं’ का उल्लेख है ही। इसके चार कारण :
- छोटी है और उसके केंद्र में एक स्पष्ट चित्र है — पक्षी, पात्र, कंकड़, चढ़ता जल। याद रखना आसान, दोहराना आसान।
- यह बच्चों को सुनाई जाती है, और बच्चे बड़े होकर अपने बच्चों को सुनाते हैं। यह संसार की सबसे मजबूत कड़ी है।
- इसकी सीख हर युग में काम की है — धैर्य और बुद्धि बल से बड़े हैं।
- इसके लिए किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं। कोई भी दादी कहीं भी सुना सकती है। भवन के विपरीत, कहानी ढोने में कुछ खर्च नहीं होता।