कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
हड़प्पावासी ग्रामीण बस्तियों में लौट गए क्योंकि किसी नगरीय जीवन-शैली की तुलना में ग्रामीण जीवन-शैली भोजन और जल तक सहज पहुँच प्रदान करती है। तब से लेकर अब तक नगर भोजन और कभी-कभी जल आपूर्ति के लिए गाँवों पर निर्भर रहते हैं।
उत्तर

यह बॉक्स कोई पहेली नहीं, बल्कि एक ऐसी बात की व्याख्या है जो अन्यथा विचित्र लगती। यदि कोई सभ्यता टूटती है, तो लोग सुविधाजनक नगर से छोटे गाँव की ओर पीछे क्यों जाते हैं? क्योंकि जब आपूर्ति की कड़ियाँ टूटती हैं, तब जीवित रहने के लिए नगर ही अधिक कठिन स्थान है।

हड़प्पाई नगर में जीवनगाँव में जीवन
भोजनकहीं और उगता है। उसे सैकड़ों ग्रामीण स्थलों से गाड़ी और नाव द्वारा प्रतिदिन पहुँचना पड़ता हैआस-पास के खेतों में उगता है। जो काटा, वही खाया
जलकुएँ, जलाशय और नालियाँ — बनाई हुई संरचनाएँ, जिन्हें सफाई, मरम्मत और उन्हें सँभालने वाला प्राधिकारी चाहिएकोई झरना, तालाब या उथला कुआँ, जिसे कुछ ही परिवार काम में लाते हैं
वर्षा न हो तोहजारों ऐसे लोग एक साथ भूखे हो जाते हैं जो कुछ उगाते ही नहींकुछ परिवार वहाँ चले जाते हैं जहाँ अब भी जल है
किस पर टिका हैप्रशासन, व्यापार, योजना — और ये तीनों ठप हो सकते हैंपरिवार और खेत — जो ठप नहीं होते

अत: यह लौटना समझदारी थी, पराजय नहीं। लगभग 2200 सा.सं.पू. से जलवायु शुष्क होती गई और सरस्वती अपने मध्य बेसिन में सूख गई, जिससे नगरों तक पहुँचने वाला भोजन और जल घट गया। हड़प्पावासियों ने वही किया जो उचित था — उन्होंने “परिवर्तित वातावरण में ग्रामीण जीवन-शैली को अपनाया” और “हजारों नहीं तो सैकड़ों की संख्या में छोटी-छोटी बस्तियों के रूप में बिखर गए”।

बॉक्स ‘तब से लेकर अब तक’ क्यों कहता है : यह निर्भरता आज भी बनी हुई है। आपके नगर का चावल, गेहूँ, दूध और सब्जियाँ ऐसे किसान उगाते हैं जिनसे आप कभी नहीं मिलेंगे, और उसका बहुत-सा जल नगर से बहुत दूर संचित होता है। यदि एक सप्ताह ट्रक न चलें, तो गाँव से बहुत पहले नगर संकट में आ जाएगा। हड़प्पाई नगर ठीक उसी बिंदु पर टूटे जहाँ हर नगर सबसे कमजोर होता है — नगर स्वयं को भोजन नहीं दे सकता।
चर्चा का विषय : कक्षा में पूछिए कि आपके मध्याह्न भोजन का अनाज कहाँ उगा और कितनी दूर से आया। फिर पूछिए कि यदि कुछ न आए तो आपका नगर कितने दिन चल सकेगा। यही एक प्रश्न 1900 सा.सं.पू. को बहुत निकट ले आता है।
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