प्र1.
इस सभ्यता के पतन के क्या कारण थे?
उत्तर
वर्तमान में दो कारणों पर सहमति है, और एक पुरानी व्याख्या छोड़ दी गई है।
| कारण | स्थिति और प्रमाण | |
|---|---|---|
| 1 | लगभग 2200 सा.सं.पू. से विश्व के बड़े भाग को प्रभावित करने वाला जलवायु परिवर्तन — वर्षा में कमी और शुष्कता | सहमति। इससे कृषि कार्य अधिक कठिन हुआ होगा और नगरों की ओर खाद्य आपूर्ति घटी होगी |
| 2 | सरस्वती नदी का मध्य बेसिन सूख गया | सहमति। वहाँ के नगर — जैसे कालीबंगा और बनावली — अचानक छोड़ दिए गए। बाद के ग्रंथ भी इस नदी के सूखने और लुप्त होने का वर्णन करते हैं (पृष्ठ 90) |
| 3 | युद्ध या आक्रमण से नगरों का विध्वंस | अस्वीकृत। “युद्ध या आक्रमण के कोई निशान नहीं मिलते।” हड़प्पावासियों ने “कभी भी कोई सेना या युद्ध के हथियार नहीं रखे” |
अध्याय सावधानी से जोड़ता है — “इसमें अन्य कारण भी रहे होंगे”। दो कारण सबसे अधिक प्रमाणित हैं, पूरी कहानी नहीं।
ध्यान दीजिए कि पतन दिखता कैसा था। यह कोई एक आकस्मिक विपत्ति नहीं थी :
- यह लगभग 1900 सा.सं.पू. में हुआ — शुष्क दौर आरंभ होने के तीन शताब्दी बाद; धीमा दबाव, अचानक प्रहार नहीं।
- “इसके नगर एक के बाद एक खाली होते गए” — भिन्न नगर भिन्न समय पर।
- लोग लुप्त नहीं हुए। जो रहे, उन्होंने “ग्रामीण जीवन-शैली को अपनाया”, और हड़प्पावासी “सैकड़ों-हजारों छोटी बस्तियों के रूप में बिखर गए”।
- “ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्ववर्ती सरकार या प्रशासन अब विद्यमान नहीं रहा” — वास्तव में जो टूटा, वह वही संगठन था जो नगरों को जोड़े रखता था।
अनुभाग का शीर्षक “अंत अथवा नई शुरुआत?” क्यों है : क्योंकि सभ्यता मरी नहीं, उसका रूप बदल गया। “यद्यपि नगर लुप्त हो गए, लेकिन हड़प्पा की संस्कृति एवं प्रौद्योगिकी अधिकांशत: बची रही और यह भारतीय सभ्यता के अगले चरण में पहुँच गई।” शिल्प, फसलें, हल, चूड़ियाँ, नमस्ते, कहानियाँ — ये सब नगरों से निकलकर गाँवों में गए और आज भी हमारे साथ हैं।
परीक्षा के लिए सुझाव : तीन भागों में उत्तर दीजिए — (i) लगभग 2200 सा.सं.पू. से जलवायु परिवर्तन, (ii) सरस्वती के मध्य बेसिन का सूखना, और (iii) युद्ध या आक्रमण नहीं, क्योंकि उसका कोई प्रमाण नहीं। फिर एक पंक्ति जोड़िए : “ये दो कारण हमें याद दिलाते हैं कि हम अपने कल्याण के लिए जलवायु और पर्यावरण पर कितने निर्भर हैं।”