अन्वेषण अध्याय 6 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जलाशयों के इस प्रकार के निर्माण के लिए आवश्यक श्रमिकों की बड़ी संख्या के बारे में सोचिए। आपके विचार से उनके कार्य को सुनियोजित करने के लिए निश्चित निर्देश किसने दिए होंगे? आपके विचार में उन्हें उनकी मजदूरी के लिए भुगतान कैसे किया गया होगा? (संकेत — उस समय आज की तरह मुद्रा का प्रचलन नहीं था)। चूँकि समय-समय पर जलाशयों की सफाई करना आवश्यक था, इसलिए क्या उनके रख-रखाव के लिए कोई स्थानीय प्राधिकारी थे? इस नगर के शासक और नगर प्रशासन के बारे में इससे हमें क्या संकेत मिलते हैं?
उत्तर

इस बॉक्स में चार प्रश्न हैं। क्रम से लीजिए — और पुस्तक का ईमानदार अंत याद रखिए : “पुरातत्ववेत्ता भी इन प्रश्नों के बारे में चर्चा करते हैं और उनके उत्तर सदैव निर्णायक नहीं होते!

1. कार्य को किसने सुनियोजित किया और निश्चित निर्देश दिए?
छह चट्टान-कटे जलाशय संयोग से नहीं बनते। किसी को तय करना था कि वे कहाँ हों, कितने गहरे हों, और भूमिगत नालियाँ उन्हें किस प्रकार जोड़ें कि जल सही दिशा में बहे। इसका अर्थ है कि नगर में थे :

  • एक योजनाकार या अभियंता, जो ढाल और स्तर समझता हो;
  • पर्यवेक्षक, जो एक साथ सैकड़ों श्रमिकों को निर्देश दे सकें;
  • एक प्राधिकारी — शासक, परिषद् या अधिकारियों का समूह — जिसके निर्देश लोग वर्षों तक मानते रहे। ऐसे जलाशय कई ऋतुओं में बनते हैं।

2. मुद्रा के बिना श्रमिकों को भुगतान कैसे हुआ होगा?
लगभग निश्चित रूप से वस्तु के रूप में। संभावित रूप :

भुगतान का रूपयह यहाँ क्यों संभव लगता है
अनाज और भोजनअध्याय कहता है कि नगर ग्रामीण उपज पर प्रतिदिन निर्भर थे और कुछ बड़े भवन गोदाम थे। जो नगर अनाज भंडारित करता है, वह अनाज में मजदूरी भी दे सकता है
अन्य वस्तुएँकपड़ा (वे कपास बुनते थे), पात्र, उपकरण, मनके, चूड़ियाँ — सब कुछ जो नगर के अपने कारीगर बनाते थे
वस्तु-विनिमय“सभी प्रकार की वस्तुओं के आदान-प्रदान” वाला व्यापार सभ्यता की सात विशेषताओं में से एक है। मजदूरी भी उसी तरह चल सकती थी
सामूहिक कर्तव्यशुष्क क्षेत्र में जल सबकी आवश्यकता है। कुछ काम मजदूरी के लिए नहीं, समुदाय के दायित्व के रूप में भी हुआ होगा

3. क्या रख-रखाव के लिए कोई स्थानीय प्राधिकारी था?
बहुत संभव है कि हाँ। सफाई ही प्रशासन का असली प्रमाण है। कोई चीज़ एक बार उत्साह में बनाई जा सकती है; पर सदियों तक हर वर्ष उसकी सफाई के लिए स्थायी व्यवस्था चाहिए, जो काम सौंपे, जाँचे और उसका खर्च उठाए। यही तर्क सड़कों के नीचे की ढकी नालियों पर भी लागू होता है — जिस नाली की सफाई न हो वह एक ऋतु में जाम हो जाती है, फिर भी ये नालियाँ सैकड़ों वर्ष चलीं।

4. शासक और नगर प्रशासन के बारे में क्या संकेत मिलते हैं?

संकेतयह क्या सुझाता है
भूमिगत नालियों से जुड़े छह विशाल जलाशयदीर्घकालिक योजना और तकनीकी कौशल; ऐसा प्राधिकारी जो दशकों आगे सोच सके
चारों दिशाओं की ओर उन्मुख सड़कें; मानक ईंटें और बाटपूरे नगर पर लागू नियम — वास्तविक प्रशासन, केवल कोई बलवान व्यक्ति नहीं
साधारण घरों तक पहुँचती नालियाँ और कुएँप्रशासन केवल अभिजात वर्ग के लिए नहीं, आम लोगों के लिए भी काम करता था
छोटे और बड़े घरों की एक जैसी गुणवत्ताऐसी सत्ता जो अपना प्रदर्शन नहीं करती — बी.बी. लाल का “सम्यक रूप से संतुलित समुदाय … शोषण नहीं, बल्कि आपसी सामंजस्य”
कोई राजमहल नहीं, कोई राजसी समाधि नहीं, कोई सेना नहीं, कोई हथियार नहींजिसने भी शासन किया, उसने मुख्यत: बल या दिखावे से शासन नहीं किया। यही हड़प्पाई इतिहास की सबसे बड़ी पहेली है
पुरातत्ववेत्ता आज भी क्यों बहस करते हैं : मिस्र में पिरामिड अपने फ़राओ का नाम बताता है; मेसोपोटामिया में मिट्टी की पट्टिका श्रमिकों का राशन गिनाती है। यहाँ जलाशय तो हैं, पर यह बताने वाला एक भी पढ़ा जा सकने वाला शब्द नहीं कि किसने उन्हें बनवाया। इसलिए ईमानदार उत्तर यह है : ये निर्माण सिद्ध करते हैं कि एक संगठित प्राधिकारी अवश्य था, पर उसका स्वरूप नहीं बताते — राजा, वृद्धों की परिषद्, व्यापारियों का संघ या पुरोहित। यही बात लिखिए और आपने वही लिखा जो एक पेशेवर पुरातत्ववेत्ता लिखता।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ