अन्वेषण अध्याय 6 महत्वपूर्ण प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सभ्यता क्या है?
उत्तर

सभ्यता मानव समाज का एक उन्नत चरण है। पुस्तक इतने पर नहीं रुकती — वह एक स्पष्ट जाँच-सूची देती है : किसी समाज को सभ्यता कहने के लिए उसमें कम से कम सात विशेषताएँ होनी चाहिए।

क्र.विशेषतापुस्तक के अनुसार इसमें क्या आता है
1शासन और प्रशासन का कोई रूपजटिल समाज और उसके अनेक कार्यकलापों के प्रबंधन हेतु
2नगरीकरणनगर योजना, नगरों का विकास और उनका प्रबंधन, जिसमें सामान्यत: जल प्रबंधन और जल निकास व्यवस्था आती है
3विभिन्न प्रकार के शिल्पकच्चे माल (पत्थर, धातु) का प्रबंधन और तैयार माल (आभूषण, उपकरण) का उत्पादन
4व्यापारआंतरिक (एक नगर या क्षेत्र के अंदर) और बाहरी (दूरस्थ क्षेत्रों या विश्व के अन्य भागों के साथ) — वस्तुओं के आदान-प्रदान के लिए
5लेखन का कोई रूपअभिलेखों को रखने और संवाद बनाने के लिए आवश्यक
6सांस्कृतिक विचारजीवन और विश्व के बारे में विचार — कला, स्थापत्य, साहित्य, श्रुति परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों के माध्यम से
7कृषि उत्पादकताजो गाँव ही नहीं, बल्कि नगरों को भी भोजन उपलब्ध करा सके

ये सातों एक-दूसरे के बगल में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के ऊपर खड़ी हैं। सबसे नीचे कृषि है, क्योंकि जब तक कोई अतिरिक्त अन्न न उगाए, बाकी कुछ भी संभव नहीं :

शासन · लेखन · सांस्कृतिक विचार जो केवल एक स्थिर, संगठित समाज बना सकता है नगरीकरण · शिल्प · व्यापार नगर, कार्यशालाएँ और बाजार — इनके लिए ऐसे लोग चाहिए जो अपना भोजन स्वयं न उगा रहे हों कृषि उत्पादकता “जो गाँव ही नहीं, बल्कि नगरों को भी भोजन उपलब्ध करा सके” ऊपर का सब कुछ नीचे उगाए गए अन्न पर टिका है
सभ्यता की सात विशेषताएँ, उसी क्रम में सजी हुई जिसमें वे उभर सकती हैं। नीचे का खंड हटा दीजिए और पूरी आकृति गिर जाएगी।
पुस्तक इस शब्द की परिभाषा क्यों देती है : ‘सभ्यता’ शब्द बोलचाल में बहुत ढीले ढंग से प्रयोग होता है। इतिहासकार को ऐसी कसौटी चाहिए जिसे खुदाई से निकले प्रमाणों पर लगाया जा सके। इन सातों में से हर एक कुछ ऐसा छोड़ जाती है जिसे पुरातत्ववेत्ता सचमुच खोज सकता है — सड़क की योजना, नाली, मनके की कार्यशाला, विदेशी मुहर, अंकित वस्तु, मूर्ति, अनाज का गोदाम। इसीलिए हम बिना एक भी पढ़ा जा सकने वाला वाक्य पाए यह कह सकते हैं कि हड़प्पावासियों की एक सभ्यता थी।
क्या आप जानते हैं? अध्याय 4 का अंत मनुष्य के पहले समूहों के एक स्थान पर बसने, कृषि करने और भवन निर्माण, धातु विज्ञान तथा यातायात जैसी तकनीकों के विकास पर हुआ था। यह अध्याय ठीक वहीं से आगे बढ़ता है — सभ्यता उसी कहानी का अगला चरण है, कोई अलग कहानी नहीं।
प्र2.
भारतीय उपमहाद्वीप की आरंभिक सभ्यता कौन-सी थी?
उत्तर

सिंधु-सरस्वती सभ्यता — जिसे सिंधु, हड़प्पा अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है। यह विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है और इसके निवासी हड़प्पावासी कहलाते हैं।

गाँव → नगर : लगभग 3500 सा.सं.पू. से
नगर → महानगर (भारत का पहला नगरीकरण) : लगभग 2600 सा.सं.पू.
चित्र 6.2 के अनुसार नगरों का काल : लगभग 2600 से 1900 सा.सं.पू.

कहाँ। उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में, दो नदी-प्रणालियों के किनारे — सिंधु और उसकी पाँच मुख्य सहायक नदियाँ (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलज), जो पंजाब (आज भारत और पाकिस्तान में विभाजित) और सिंध (अब पाकिस्तान में) के मैदानों को सींचती थीं; और कुछ पूर्व में सरस्वती, जो तब हिमालय की तलहटी से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कुछ क्षेत्रों से होकर बहती थी।

विश्व-इतिहास में इसका स्थान। पृष्ठ 87 का चित्र 6.2 तीन सभ्यताओं को एक ही रेखा पर रखता है :

4000 सा.सं.पू. 3500 सा.सं.पू. 3100 सा.सं.पू. 2600 सा.सं.पू. 2000 सा.सं.पू. मेसोपोटामिया का आरंभ मिस्र का आरंभ गाँव नगरों में बदलते हैं महानगर — 2600 से 1900 सा.सं.पू. सिंधु-सरस्वती सभ्यता, उन्हीं तिथियों के साथ जो यह अध्याय देता है विश्व की तीन आरंभिक सभ्यताएँ, एक ही रेखा पर
मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक और सीरिया) का आरंभ लगभग 6,000 वर्ष पहले हुआ; कुछ शताब्दियों बाद प्राचीन मिस्र; और सिंधु-सरस्वती के नगर लगभग 2600 से 1900 सा.सं.पू. तक रहे। (यह रेखा समझने के लिए है, मापनी के अनुसार नहीं बनी।)
सुझाव : दोनों तिथियाँ अलग-अलग याद रखिए। 3500 सा.सं.पू. में गाँव नगरों में बदलने लगे; 2600 सा.सं.पू. में नगर महानगरों में। ‘पहला नगरीकरण’ केवल दूसरी तिथि है।
प्र3.
उसकी मुख्य उपलब्धियाँ क्या थीं?
उत्तर

पुस्तक की अपनी जाँच-सूची को प्रमाणों पर लगाइए — हर खाना भर जाता है, और प्राय: किसी ऐसी चीज़ से जिसे आज भी देखा जा सकता है।

उपलब्धिअध्याय में उसका प्रमाण
नगर-योजनानगर सुनियोजित योजना के अंतर्गत बने; चौड़ी सड़कें चारों दिशाओं की ओर उन्मुख (चित्र 6.4 कालीबंगा, चित्र 6.5 धौलावीरा); किलेबंदी; ऊपरी नगर और निचला नगर — धौलावीरा में तीन क्षेत्र
जल प्रबंधनघरों के स्नानागार सड़कों के नीचे बहने वाली नालियों से जुड़े (चित्र 6.7, लोथल); मोहनजो-दड़ो में लगभग 700 ईंट के कुएँ; धौलावीरा में कम से कम छह विशाल जलाशय, सबसे बड़ा 73 मीटर, भूमिगत नालियों से जुड़े
समान गुणवत्ता का निर्माण“बड़े और छोटे घरों के निर्माण की गुणवत्ता एक समान मिलती है” — यही बात बी.बी. लाल अध्याय के आरंभिक उद्धरण में ‘सम्यक रूप से संतुलित समुदाय’ कहकर कहते हैं
शिल्प और धातु विज्ञानकार्नेलियन मनकों में छेद करने और उन्हें सजाने की तकनीक; सख्त शंख से चूड़ियाँ; तांबे और कांस्य पर अधिकार; भार तौलने के पत्थर, कांस्य दर्पण, कांस्य छैनी (चित्र 6.14)
दूरस्थ व्यापारहड़प्पाई कार्नेलियन मनके सूसा (वर्तमान ईरान) में; हाथी दाँत का कंघा ओमान के तट पर; लोथल का 217 × 36 मीटर का बंदरगाह — भारत की प्रथम गहन समुद्री गतिविधि
लेखन प्रणालीहजारों स्टीऐटाइट की मुहरें, जिन पर लिपि के संकेत हैं — यद्यपि वह लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी
कृषि उत्पादकताजौ, गेहूँ, मोटे अनाज, कभी-कभी धान, दलहन और सब्जियाँ; यूरेशिया में कपास उगाने वाले प्रथम; बनावली से मिट्टी के हल का लघु प्रतिरूप (चित्र 6.9)
कला, खेल और दैनिक जीवन‘नर्तकी’ की कांस्य प्रतिमा (10.8 से.मी.); ‘पुरोहित राजा’; नमस्ते की मुद्रा में मूर्ति; लोथल के पात्र पर प्यासे कौए की कहानी; पत्थर का खेल-बोर्ड और मिट्टी की सीटी
शांतिकोई सेना नहीं, युद्ध के हथियार नहीं, युद्ध का कोई निशान नहीं — “अपेक्षाकृत एक शांतिपूर्ण सभ्यता”
सबसे असाधारण उपलब्धि कौन-सी है? नगरों का आकार नहीं — बड़े नगर मेसोपोटामिया और मिस्र में भी थे। असाधारण है दो बातों का मेल : पूरे नगर में फैली नालियाँ और कुएँ जो साधारण घरों की भी सेवा करते थे, और अमीर-गरीब के घरों का एक ही स्तर का निर्माण — वह भी ऐसे समाज में जिसने न कोई राजमहल छोड़ा, न राजसी समाधि, न हथियार। प्राचीन विश्व की बहुत कम सभ्यताएँ यह दिखा सकती हैं।
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