सभ्यता मानव समाज का एक उन्नत चरण है। पुस्तक इतने पर नहीं रुकती — वह एक स्पष्ट जाँच-सूची देती है : किसी समाज को सभ्यता कहने के लिए उसमें कम से कम सात विशेषताएँ होनी चाहिए।
| क्र. | विशेषता | पुस्तक के अनुसार इसमें क्या आता है |
|---|---|---|
| 1 | शासन और प्रशासन का कोई रूप | जटिल समाज और उसके अनेक कार्यकलापों के प्रबंधन हेतु |
| 2 | नगरीकरण | नगर योजना, नगरों का विकास और उनका प्रबंधन, जिसमें सामान्यत: जल प्रबंधन और जल निकास व्यवस्था आती है |
| 3 | विभिन्न प्रकार के शिल्प | कच्चे माल (पत्थर, धातु) का प्रबंधन और तैयार माल (आभूषण, उपकरण) का उत्पादन |
| 4 | व्यापार | आंतरिक (एक नगर या क्षेत्र के अंदर) और बाहरी (दूरस्थ क्षेत्रों या विश्व के अन्य भागों के साथ) — वस्तुओं के आदान-प्रदान के लिए |
| 5 | लेखन का कोई रूप | अभिलेखों को रखने और संवाद बनाने के लिए आवश्यक |
| 6 | सांस्कृतिक विचार | जीवन और विश्व के बारे में विचार — कला, स्थापत्य, साहित्य, श्रुति परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों के माध्यम से |
| 7 | कृषि उत्पादकता | जो गाँव ही नहीं, बल्कि नगरों को भी भोजन उपलब्ध करा सके |
ये सातों एक-दूसरे के बगल में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के ऊपर खड़ी हैं। सबसे नीचे कृषि है, क्योंकि जब तक कोई अतिरिक्त अन्न न उगाए, बाकी कुछ भी संभव नहीं :