प्र1.
आपने सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में सुना होगा और आपने इस बात पर ध्यान दिया होगा कि हमने इसका प्रयोग नहीं किया है। मानचित्र पर दृष्टि डालें (पृष्ठ 89 पर चित्र 6.3) तो हम पाएँगे कि घाटी शब्द का अब इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि अब हम जानते हैं कि यह सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली हुई थी।
उत्तर
1924 में यह नाम उचित था और आज गलत है, और मानचित्र इसका कारण एक ही दृष्टि में दिखा देता है : चित्र 6.3 के अधिकांश पुरास्थल सिंधु की घाटी में हैं ही नहीं।
| पुरास्थल कहाँ हैं | चित्र 6.3 के उदाहरण | सिंधु घाटी से दूरी |
|---|---|---|
| सिंधु घाटी में — मूल अर्थ | मोहनजो-दड़ो, लखनजो-दड़ो, चनहुदड़ो, हड़प्पा (रावी पर, जो सिंधु की सहायक है) | भीतर |
| सरस्वती (घग्गर-हाकरा) की द्रोणी | राखीगढ़ी और गँवेरीवाला (दोनों महानगर), कालीबंगा, बनावली, भिर्राना, फरमाना, करनपुरा | एक अलग नदी-प्रणाली, सैकड़ों किलोमीटर पूर्व |
| गुजरात और कच्छ का रन | धौलावीरा, लोथल, खिरसारा, बगासरा, नागवाड़ा, नागेश्वर | बहुत दक्षिण-पूर्व में, समुद्र के किनारे |
| सुदूर उत्तर | शोर्तुगई — आज अफ़ग़ानिस्तान में | हिंदुकुश के पार |
| उत्तर-पूर्व | मांडा, रूपनगर | हिमालय की तलहटी की ओर |
| पश्चिमी समुद्र तट | सुतकागें-डोर, बालाकोट | मकरान तट पर, नदी से बहुत पश्चिम |
‘घाटी’ शब्द पर दो अलग आपत्तियाँ।
- यह तथ्यत: बहुत छोटा है। अकेली सरस्वती की द्रोणी में दो सबसे बड़े नगर — राखीगढ़ी और गँवेरीवाला — तथा अनेक छोटे नगर हैं। जो नाम आधी सभ्यता को छोड़ दे, वह अच्छा नाम नहीं।
- सिंधु के लिए भी ‘घाटी’ गलत शब्द है। यहाँ सिंधु चौड़े मैदानों से होकर बहती है, किसी सँकरी पर्वतीय घाटी से नहीं। यह शब्द भूमि का ही गलत चित्र खींचता है।
पुराने नाम फिर भी क्यों चलते रहते हैं : 1924 में केवल सिंधु के आस-पास के पुरास्थल ज्ञात थे, इसलिए ‘सिंधु घाटी’ उस समय की सारी जानकारी का सही वर्णन था। फिर राखीगढ़ी, धौलावीरा, लोथल, बनावली मिले — “इस प्रकार की खोजें आज भी जारी हैं” — और नाम प्रमाणों से पीछे छूट गया। इतिहास में यह सामान्य है : नाम खोज के क्षण पर टिक जाता है, पर ज्ञान बढ़ता रहता है। ईमानदारी यही है कि नाम बदल दिया जाए — इसीलिए यह पुस्तक ‘सिंधु-सरस्वती’ या ‘हड़प्पा’ सभ्यता कहती है।
परीक्षा के लिए सुझाव : यदि प्रश्न में ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ लिखा हो तो उत्तर अवश्य दीजिए — पर एक पंक्ति जोड़ दीजिए : “इसे सिंधु-सरस्वती अथवा हड़प्पा सभ्यता कहना अधिक उचित है, क्योंकि यह सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली हुई थी।”