प्र1.
इस सभ्यता के कुछ प्रमुख नगरों को मानचित्र (चित्र 6.3) में दर्शाया गया है। क्या आप (कक्षा में गतिविधि के माध्यम से) इन दर्शाए गए नगरों का अगले पृष्ठ पर दी गई तालिका में दिए गए आधुनिक राज्यों अथवा प्रदेशों के साथ मिलान कर सकते हैं? (धौलावीरा / हड़प्पा / कालीबंगा / मोहनजो-दड़ो / राखीगढ़ी — पंजाब / गुजरात / सिंध / हरियाणा / राजस्थान)
उत्तर
पृष्ठ 90 की तालिका जान-बूझकर उलट-पुलट दी गई है — जैसा छपा है, उसमें एक भी जोड़ी सही नहीं है। चित्र 6.3 पर हर लाल बिंदु ढूँढ़िए और सही मिलान इस प्रकार निकलता है।
| हड़प्पाई नगर | आधुनिक राज्य / प्रदेश | आज का देश | चित्र 6.3 में कैसे ढूँढ़ें |
|---|---|---|---|
| धौलावीरा | गुजरात | भारत | मानचित्र में नीचे की ओर, कच्छ के रन में — खिरसारा, बगासरा और नागवाड़ा के पास |
| हड़प्पा | पंजाब | पाकिस्तान | ऊपर मध्य में, रावी नदी पर, चिनाब और झेलम के नीचे |
| कालीबंगा | राजस्थान | भारत | सरस्वती नदी की रेखा पर, हड़प्पा और राखीगढ़ी के बीच |
| मोहनजो-दड़ो | सिंध | पाकिस्तान | निचली सिंधु पर, लखनजो-दड़ो के नीचे और चनहुदड़ो के ऊपर |
| राखीगढ़ी | हरियाणा | भारत | दाईं ओर, बनावली, भिर्राना और फरमाना के पास, पुरास्थलों के सघन समूह में |
जैसा छपा है (गलत) → सही
धौलावीरा – पंजाब → धौलावीरा – गुजरात
हड़प्पा – गुजरात → हड़प्पा – पंजाब (पाकिस्तान)
कालीबंगा – सिंध → कालीबंगा – राजस्थान
मोहनजो-दड़ो – हरियाणा → मोहनजो-दड़ो – सिंध (पाकिस्तान)
राखीगढ़ी – राजस्थान → राखीगढ़ी – हरियाणा
धौलावीरा – पंजाब → धौलावीरा – गुजरात
हड़प्पा – गुजरात → हड़प्पा – पंजाब (पाकिस्तान)
कालीबंगा – सिंध → कालीबंगा – राजस्थान
मोहनजो-दड़ो – हरियाणा → मोहनजो-दड़ो – सिंध (पाकिस्तान)
राखीगढ़ी – राजस्थान → राखीगढ़ी – हरियाणा
चित्र 6.3 और क्या बताता है। केवल पाँच नाम मत देखिए :
- भूरे रंग में प्राकृतिक सीमाएँ — पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में हिंदुकुश और सुलेमान श्रेणी, ऊपर हिमालय, बीच में अरावली श्रेणी। सभ्यता इसी चौखट के भीतर बसी है।
- एक नहीं, दो नदी-प्रणालियाँ — सिंधु के साथ झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलज; और सरस्वती, जो कालीबंगा तथा गँवेरीवाला से होकर रन की ओर दिखाई गई है।
- सैकड़ों छोटे गुलाबी बिंदु — साधारण बस्तियाँ। इनकी सबसे अधिक सघनता सरस्वती के किनारे है, और यही बात पृष्ठ 91 का पाठ कहता है।
- पूरा विस्तार — सबसे उत्तर में शोर्तुगई (आज अफ़ग़ानिस्तान में), उत्तर-पूर्व में मांडा और रूपनगर, दूर पश्चिम में मकरान तट पर सुतकागें-डोर, और समुद्र के किनारे लोथल, नागेश्वर तथा बालाकोट।
कक्षा में इसे कैसे करें : दोनों स्तंभ उसी उलटे क्रम में श्यामपट पर लिखिए जैसे पुस्तक में हैं, फिर एक-एक विद्यार्थी को मानचित्र के पास भेजिए कि वह तीर खींचने से पहले नगर को ढूँढ़े। याद से मिलान करने में कुछ नहीं सीखा जाता; मानचित्र से मिलान करने में मानचित्र पढ़ना सीखा जाता है।