कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
इस सभ्यता के कुछ प्रमुख नगरों को मानचित्र (चित्र 6.3) में दर्शाया गया है। क्या आप (कक्षा में गतिविधि के माध्यम से) इन दर्शाए गए नगरों का अगले पृष्ठ पर दी गई तालिका में दिए गए आधुनिक राज्यों अथवा प्रदेशों के साथ मिलान कर सकते हैं?
शोर्तुगईमुसा खेलमांडारूपनगरडाबरकोटहड़प्पाकालीबंगाबनावलीभिर्रानाराखीगढ़ीफरमानाकरनपुरागँवेरीवालालखनजो-दड़ोमोहनजो-दड़ोचन्हुदड़ोबालाकोटधौलावीराखिरसारानागवाड़ाबगासरानागेश्वरलोथलसिंधु नदीझेलम नदीचिनाब नदीरावी नदीब्यास नदीसतलज नदीबनास नदीयमुना नदीगंगा नदीसरस्वती नदीहिंदुकुशसुलैमान श्रेणीहिमालयअरावली श्रेणी66°पू.66°पू.69°पू.69°पू.72°पू.72°पू.75°पू.75°पू.78°पू.78°पू.81°पू.81°पू.21°उ.24°उ.27°उ.30°उ.33°उ.36°उ.02004006008001000किलोमीटर (लगभग)मानचित्र में नामांकित प्रमुख नगरअन्य बस्ती
चित्र 6.3 (पृष्ठ 89) — सिंधु-सरस्वती सभ्यता की कुछ प्रमुख बस्तियाँ; पुस्तक के नदियों, श्रेणियों, बस्तियों तथा अक्षांश-देशांतर जाल के साथ पुनः बनाया गया। पुस्तक का शीर्षक कहता है — “पर्वत श्रृंखलाओं द्वारा बनी प्राकृतिक सीमाओं को देखिए (भूरे रंग में)”। ध्यान दीजिए कि छपे मानचित्र में केवल हिंदुकुश, सुलैमान श्रेणी तथा हिमालय भूरे हैं; अरावली श्रेणी आस-पास के मैदान जैसे पीले-हरे रंग में ही छपी है, इसलिए “भूरे रंग में” हर श्रेणी पर लागू नहीं होता।
हड़प्पाई नगर/हड़प्पा के नगरआधुनिक राज्य या प्रदेश
धौलावीरापंजाब
हड़प्पागुजरात
कालीबंगासिंध
मोहनजो-दड़ोहरियाणा
राखीगढ़ीराजस्थान
पृष्ठ 90 पर छपी मिलान की तालिका — दोनों स्तंभ मिलान के क्रम में नहीं हैं; इन्हें जोड़ना ही अभ्यास है।
उत्तर

पृष्ठ 90 की तालिका जान-बूझकर उलट-पुलट दी गई है — जैसा छपा है, उसमें एक भी जोड़ी सही नहीं है। चित्र 6.3 पर हर लाल बिंदु ढूँढ़िए और सही मिलान इस प्रकार निकलता है।

हड़प्पाई नगरआधुनिक राज्य / प्रदेशआज का देशचित्र 6.3 में कैसे ढूँढ़ें
धौलावीरागुजरातभारतमानचित्र में नीचे की ओर, कच्छ के रन में — खिरसारा, बगासरा और नागवाड़ा के पास
हड़प्पापंजाबपाकिस्तानऊपर मध्य में, रावी नदी पर, चिनाब और झेलम के नीचे
कालीबंगाराजस्थानभारतसरस्वती नदी की रेखा पर, हड़प्पा और राखीगढ़ी के बीच
मोहनजो-दड़ोसिंधपाकिस्ताननिचली सिंधु पर, लखनजो-दड़ो के नीचे और चनहुदड़ो के ऊपर
राखीगढ़ीहरियाणाभारतदाईं ओर, बनावली, भिर्राना और फरमाना के पास, पुरास्थलों के सघन समूह में
जैसा छपा है (गलत) → सही
धौलावीरा – पंजाब → धौलावीरा – गुजरात
हड़प्पा – गुजरात → हड़प्पा – पंजाब (पाकिस्तान)
कालीबंगा – सिंध → कालीबंगा – राजस्थान
मोहनजो-दड़ो – हरियाणा → मोहनजो-दड़ो – सिंध (पाकिस्तान)
राखीगढ़ी – राजस्थान → राखीगढ़ी – हरियाणा

चित्र 6.3 और क्या बताता है। केवल पाँच नाम मत देखिए :

  • भूरे रंग में प्राकृतिक सीमाएँ — पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में हिंदुकुश और सुलेमान श्रेणी, ऊपर हिमालय, बीच में अरावली श्रेणी। सभ्यता इसी चौखट के भीतर बसी है।
  • एक नहीं, दो नदी-प्रणालियाँ — सिंधु के साथ झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलज; और सरस्वती, जो कालीबंगा तथा गँवेरीवाला से होकर रन की ओर दिखाई गई है।
  • सैकड़ों छोटे गुलाबी बिंदु — साधारण बस्तियाँ। इनकी सबसे अधिक सघनता सरस्वती के किनारे है, और यही बात पृष्ठ 91 का पाठ कहता है।
  • पूरा विस्तार — सबसे उत्तर में शोर्तुगई (आज अफ़ग़ानिस्तान में), उत्तर-पूर्व में मांडा और रूपनगर, दूर पश्चिम में मकरान तट पर सुतकागें-डोर, और समुद्र के किनारे लोथल, नागेश्वर तथा बालाकोट।
कक्षा में इसे कैसे करें : दोनों स्तंभ उसी उलटे क्रम में श्यामपट पर लिखिए जैसे पुस्तक में हैं, फिर एक-एक विद्यार्थी को मानचित्र के पास भेजिए कि वह तीर खींचने से पहले नगर को ढूँढ़े। याद से मिलान करने में कुछ नहीं सीखा जाता; मानचित्र से मिलान करने में मानचित्र पढ़ना सीखा जाता है।
क्या यह उपयोगी रहा?