प्र1.
वर्तमान में इस सभ्यता के निवासियों को ‘हड़प्पाई या हड़प्पावासी’ क्यों कहते हैं?
उत्तर
क्योंकि हड़प्पा इस सभ्यता का पहला उत्खनित नगर था — “लगभग एक शताब्दी पहले 1920–21 में”। हड़प्पा आज पाकिस्तान के पंजाब में है। पुरातत्व में किसी पूरी संस्कृति का नाम प्राय: उसी स्थान पर रखा जाता है जहाँ उसे सबसे पहले पहचाना गया — चाहे वह स्थान सबसे महत्वपूर्ण रहा हो या नहीं।
| नाम | कहाँ से आया | क्या सुझाता है — और कहाँ भ्रम पैदा करता है |
|---|---|---|
| हड़प्पा सभ्यता | हड़प्पा, पहला उत्खनित पुरास्थल (1920–21) | सुरक्षित और तटस्थ। यह भूगोल के बारे में कुछ नहीं कहता — इसीलिए पुस्तक इसे पसंद करती है |
| सिंधु सभ्यता | सिंधु नदी | मोहनजो-दड़ो और हड़प्पा के लिए सही, पर आधे पुरास्थल सिंधु पर हैं ही नहीं |
| सिंधु घाटी सभ्यता | वही नदी, साथ में ‘घाटी’ | अप्रचलित। सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली थी — पृष्ठ 91 का ‘आइए विचार करें’ देखिए |
| सिंधु-सरस्वती सभ्यता | दोनों नदी-प्रणालियाँ एक साथ | सबसे सटीक, क्योंकि सरस्वती की द्रोणी में दो महानगर (राखीगढ़ी, गँवेरीवाला) और पुरास्थलों की सर्वाधिक सघनता है |
नाम क्यों महत्वपूर्ण है : हर नाम चुपचाप एक दावा करता है। ‘सिंधु घाटी’ कहते ही आपने पाठक से कह दिया कि यह सभ्यता एक नदी की घाटी में रहती थी — और फिर पृष्ठ 89 का मानचित्र आपका खंडन कर देता है। यह आदत पूरे इतिहास में काम आती है : पूछिए कि कोई परिचित नाम क्या मान बैठा है, और उसे प्रमाणों से जाँचिए।
क्या आप जानते हैं? हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो पहले खोजे गए दो नगर हैं, और इन्हें एक ही सभ्यता के रूप में 1924 में पहचाना गया — हड़प्पा की खुदाई आरंभ होने के तीन-चार वर्ष बाद। खोज और पहचान दो अलग क्षण हैं, और पुस्तक दोनों तिथियाँ देती है।