प्र1.
क्या आप पृष्ठ 79 पर मानचित्र (चित्र 5.4) में दिए गए कुछ क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं? आपने जिन क्षेत्रों के बारे में सुना हो, उनकी सूची बनाइए।
उत्तर
चित्र 5.4 में 38 नाम हैं, और वे अफगानिस्तान से कन्याकुमारी तक फैले हैं — मानचित्र का यही मुख्य संदेश है। नीचे वे नाम स्थान के अनुसार दिए गए हैं, और वे भी चिह्नित हैं जिन्हें विद्यार्थी प्राय: पहचान लेते हैं।
| उपमहाद्वीप का भाग | चित्र 5.4 में छपे नाम | जिनके बारे में आपने अवश्य सुना होगा |
|---|---|---|
| उत्तर-पश्चिम (आज अफगानिस्तान, पाकिस्तान, पंजाब) | गांधार, द्रुह्यु, कंबोज, केकय, मद्र, वाहलिक, अंबष्ठ, सौवीर, शिवि | गांधार — गांधार मूर्तिकला से, तथा महाभारत की गांधारी से मद्र — माद्री, नकुल एवं सहदेव की माता केकय — रामायण की कैकेयी |
| उत्तरी मैदान (आज राजस्थान, उ.प्र., बिहार) | मत्स्य, शूरसेन, पंचाल, चेदि, कोसल, काशी, विदेह, मगध, अंग | कोसल (अयोध्या), काशी (वाराणसी), मगध (दक्षिण बिहार), विदेह (मिथिला — सीता वैदेही हैं), पंचाल (द्रौपदी पांचाली हैं), शूरसेन (मथुरा का क्षेत्र), अंग (कर्ण का राज्य) |
| पूर्व (आज बंगाल, असम, ओडिशा) | प्राग्ज्योतिष, पुंड्र, वंग, सुह्म, कलिंग | वंग — पुस्तक स्वयं कहती है ‘बंगाल का भाग’ प्राग्ज्योतिष — ‘कुछ-कुछ असम का भाग’ कलिंग — अशोक के युद्ध से, जिसे आप आगे पढ़ेंगे |
| पश्चिम एवं मध्य (आज गुजरात, म.प्र., छत्तीसगढ़) | आनर्त, सुराष्ट्र, अवंती, माहिष्मति, दर्शन, कारूष, दक्षिण कोसल | सुराष्ट्र — आज गुजरात का सौराष्ट्र अवंती — उज्जैन का क्षेत्र माहिष्मति — नर्मदा तट का नगर |
| दक्कन (आज महाराष्ट्र, तेलंगाना) | विदर्भ, जनस्थान, अश्मक | विदर्भ — पूर्वी महाराष्ट्र; दमयंती एवं रुक्मिणी वहीं की थीं जनस्थान — रामायण में गोदावरी तट का वन |
| सुदूर दक्षिण (आज कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु) | किष्किंधा, द्रविड़, केरल, चोल, पांड्य | केरल — पुस्तक कहती है ‘लगभग आज का केरल’ किष्किंधा — रामायण में सुग्रीव का राज्य चोल एवं पांड्य — तमिल की महान राजवंश-परंपराएँ |
अपनी अभ्यास-पुस्तिका में उत्तर कैसे लिखें। सूची की नकल मत कीजिए। तीन स्तंभ बनाइए — मानचित्र में नाम / यह नाम कहाँ सुना है? / आज भारत का कौन-सा भाग? — और केवल वही नाम भरिए जिन्हें आप सचमुच पहचानते हैं। नकल की गई लंबी सूची से ईमानदार छोटी सूची अच्छी है।
नमूना उत्तर: “मैंने आठ नाम पहचाने। रामायण से कोसल और विदेह; महाभारत से पंचाल, अंग और गांधार; अशोक के बारे में सुना है इसलिए मगध और कलिंग; और केरल, क्योंकि आज भी यही एक राज्य का नाम है। शेष नाम मेरे लिए नए थे।”
पुस्तक क्यों कहती है कि इन्हें याद रखने की आवश्यकता नहीं: शीर्षक स्पष्ट है — “आपको इन क्षेत्रों को याद रखने की आवश्यकता नहीं है, परंतु आप ध्यान दें कि इनका विस्तार उपमहाद्वीप के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में मिलता है।” यह मानचित्र रटने की सूची नहीं, प्रमाण है। नाम हिंदुकुश से समुद्र तक हर दिशा में फैले हैं, जिससे पता चलता है कि महाभारत के रचयिता इस पूरी भूमि को एक जुड़ा हुआ क्षेत्र मानते थे। मानचित्र यही तर्क प्रस्तुत करता है।
स्वयं जाँचिए: पृष्ठ 78 के पाठ में काश्मीर, कुरूक्षेत्र और कच्छ के नाम भी आए हैं — परंतु ध्यान से देखिए, ये तीनों नाम चित्र 5.4 पर छपे ही नहीं हैं। मानचित्र में चुनिंदा नाम हैं, पूरी सूची नहीं। स्रोत में जो नहीं है उसे लक्ष्य करना सच्चे इतिहासकार की आदत है।