प्र1.
वास्तव में हमें कब समूचे भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक नाम मिला?
उत्तर
अध्याय ईमानदारी से उत्तर देता है — हम कोई निश्चित तिथि नहीं बता सकते, “चूँकि प्राचीन भारतीय ग्रंथों की तिथि निर्धारित करना कठिन है”। हम इतना अवश्य कर सकते हैं कि प्रमाणों को क्रम में रख दें — कम तिथि-निश्चित से अधिक तिथि-निश्चित की ओर।
| क्रम | स्रोत | प्रयुक्त नाम | तिथि कितनी निश्चित? |
|---|---|---|---|
| 1 | ऋग्वेद | ‘सप्त सैंधव’ | हजारों वर्ष पुराना — परंतु यह केवल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का नाम है, संपूर्ण उपमहाद्वीप का नहीं |
| 2 | महाभारत | ‘भारतवर्ष’ तथा ‘जम्बूद्वीप’ | विद्वान सामान्यत: सहमत हैं कि यह महाकाव्य सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व से लिखा जाने लगा — अत: नाम प्राचीन है, पर तिथि एक अवधि है, कोई एक वर्ष नहीं |
| 3 | अशोक का एक शिलालेख | ‘जम्बूद्वीप’ | लगभग 250 सा.सं.पू. — एक निश्चित तिथि, क्योंकि शिलालेख ज्ञात समय में उत्कीर्ण होता है। यही हमारा पहला ठोस प्रमाण है |
| 4 | विष्णु पुराण | ‘भारत’ | “कुछ शताब्दियों के बाद”, जब ‘भारत’ संपूर्ण उपमहाद्वीप का सामान्य नाम बन चुका था |
अत: संक्षिप्त उत्तर: संपूर्ण उपमहाद्वीप के पहले नाम महाभारत के भारतवर्ष और जम्बूद्वीप हैं, जो सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व से मिलते हैं; और तिथि की दृष्टि से पहला ठोस प्रमाण है अशोक का लगभग 250 सा.सं.पू. का शिलालेख, जिसमें ‘जम्बूद्वीप’ संपूर्ण भारत के लिए प्रयुक्त हुआ है — उस समय इसमें आज के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के भाग सम्मिलित थे।
ग्रंथ की तिथि शिलालेख से कठिन क्यों होती है: महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना, वाचन, विस्तार और प्रतिलिपि अनेक शताब्दियों तक चलती रही, अत: उसका कोई एक जन्म-दिवस नहीं है। शिलालेख एक ही बार पत्थर पर उत्कीर्ण होता है, ऐसे शासक के समय में जिसका काल ज्ञात है, और तब से बदला नहीं है। इसीलिए तिथि की दृष्टि से अशोक के पत्थर की एक पंक्ति किसी ग्रंथ के अनेक पृष्ठों से अधिक मूल्यवान है — यही बात इतिहास के स्रोत वाले पिछले अध्याय में भी कही गई थी।