प्र1.
चित्र 5.5 (पृष्ठ 82) में भारत के मूल संविधान के प्रथम पृष्ठ में क्या आप ‘इंडिया अर्थात भारत’ को समझ सकते हैं?
उत्तर
हाँ। दोनों शीर्षकों के ठीक नीचे, हस्तलिखित पाठ की पहली ही क्रमांकित पंक्ति देखिए।
| चित्र 5.5 में कहाँ देखें | वहाँ क्या लिखा है |
|---|---|
| पृष्ठ के ऊपर, अलंकृत किनारी के भीतर | सिंधु सभ्यता की एक मुहर का चित्र, जिस पर एक साँड़ बना है |
| पहला शीर्षक | भाग १ |
| दूसरा शीर्षक | संघ और उसका राज्य-क्षेत्र |
| पहला क्रमांकित उपबंध — अनुच्छेद 1(1) | “१. (१) भारत, अर्थात् इण्डिया, राज्यों का संघ होगा।” |
| उसी उपबंध के सामने, बाएँ हाशिये पर | छोटी-सी टिप्पणी “संघ का नाम और राज्य-क्षेत्र” |
वाक्यांश को ध्यान से पढ़िए। यह कुछ ही शब्दों में दो काम करता है —
- देश को दो आधिकारिक नाम देता है — भारत और इण्डिया — और कहता है कि दोनों का अर्थ एक ही है। कोई एक दूसरे की जगह नहीं लेता।
- इसी अध्याय के दोनों नाम-परिवारों को जोड़ता है — भारत, जो नाम भारतीयों ने स्वयं दिया (भारतवर्ष = ‘भरत के देश’ से), और इण्डिया, जो नाम सिंधु → फारसी हिंदू → यूनानी इंडोई → लैटिन India की यात्रा करके आया।
अंग्रेजी संस्करण वही बात उलटे क्रम में कहता है। पृष्ठ 81 का ध्यान रखें बॉक्स यही बताता है — संविधान सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया था, जहाँ यह वाक्यांश ‘इंडिया, दैट इज भारत’ है; और संविधान के हिंदी अनुवाद में वही ‘भारत, अर्थात इंडिया’ है।
क्या आप जानते हैं? मूल संविधान छपा नहीं था — वह हाथ से लिखा गया था, और उसके प्रत्येक पृष्ठ को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने सजाया था; चित्र 5.5 की किनारी के नीचे बाईं ओर एक कलाकार के हस्ताक्षर भी दिखते हैं। पृष्ठ 81 के हाशिये के अनुसार भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ, और इसका अध्ययन आप कक्षा 7 में करेंगे।
पहली ही पंक्ति में नाम तय करना क्यों आवश्यक था: किसी भी संविधान को सबसे पहले यह बताना पड़ता है कि वह किसका संविधान है। 1949–50 में दोनों नाम रोज़ के प्रयोग में थे — एक भारतीय भाषाओं में, दूसरा शेष विश्व की भाषाओं में — और जैसा यह अध्याय दिखाता है, दोनों का लंबा इतिहास था। किसी एक को चुनने के बजाय संविधान-निर्माताओं ने दोनों को पहली पंक्ति में लिख दिया। इसी कारण इस अध्याय का शीर्षक भी ठीक यही शब्द हैं।