यह प्रतिकृति क्या दर्शाती है। यह भारत के मूल हस्तलिखित संविधान के प्रथम पृष्ठ का छायाचित्र है, जो क्रीम रंग के चर्मपत्र पर है। चारों ओर सुनहरे-भूरे कमल पदकों की चौड़ी चित्रित किनार बनी है, जिनके बीच हरे रंग के केंद्र हैं। ऊपर मध्य में एक सुनहरे चौकोर फ्रेम के भीतर सिंधु घाटी की एक मुद्रा का चित्र है — बाईं ओर मुख किए खड़ा कूबड़ वाला बैल, जिसके ऊपर सिंधु लिपि के अपठित चिह्नों की एक पंक्ति है। चित्र के नीचे अंग्रेजी सुलेख में शीर्षक Part I और उसके नीचे The Union and its Territory लिखा है। इसके बाद अनुच्छेद 1 के क्रमांकित खंड उसी लिखावट में हैं; इनमें पहला खंड एक ही पंक्ति का है जिसमें देश का नाम दो बार आता है। बाएँ हाशिये पर छोटे-छोटे शीर्षक हैं — “Name and territory of the Union”, “Admission or establishment of new States”, “Formation of new States and alteration of areas, boundaries or names of existing States”।
हाँ। दोनों शीर्षकों के ठीक नीचे, हस्तलिखित पाठ की पहली ही क्रमांकित पंक्ति देखिए।
| चित्र 5.5 में कहाँ देखें | वहाँ क्या लिखा है |
|---|---|
| पृष्ठ के ऊपर, अलंकृत किनारी के भीतर | सिंधु सभ्यता की एक मुहर का चित्र, जिस पर एक साँड़ बना है |
| पहला शीर्षक | भाग १ |
| दूसरा शीर्षक | संघ और उसका राज्य-क्षेत्र |
| पहला क्रमांकित उपबंध — अनुच्छेद 1(1) | “१. (१) भारत, अर्थात् इण्डिया, राज्यों का संघ होगा।” |
| उसी उपबंध के सामने, बाएँ हाशिये पर | छोटी-सी टिप्पणी “संघ का नाम और राज्य-क्षेत्र” |
वाक्यांश को ध्यान से पढ़िए। यह कुछ ही शब्दों में दो काम करता है —
- देश को दो आधिकारिक नाम देता है — भारत और इण्डिया — और कहता है कि दोनों का अर्थ एक ही है। कोई एक दूसरे की जगह नहीं लेता।
- इसी अध्याय के दोनों नाम-परिवारों को जोड़ता है — भारत, जो नाम भारतीयों ने स्वयं दिया (भारतवर्ष = ‘भरत के देश’ से), और इण्डिया, जो नाम सिंधु → फारसी हिंदू → यूनानी इंडोई → लैटिन India की यात्रा करके आया।
अंग्रेजी संस्करण वही बात उलटे क्रम में कहता है। पृष्ठ 81 का ध्यान रखें बॉक्स यही बताता है — संविधान सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया था, जहाँ यह वाक्यांश ‘इंडिया, दैट इज भारत’ है; और संविधान के हिंदी अनुवाद में वही ‘भारत, अर्थात इंडिया’ है।