अन्वेषण अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
‘उत्तर में महान पर्वत’ को अब आप पहचान सकते हैं और ‘केप कुमारी’ की पहचान करने में भी कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
उत्तर

चित्र 5.2 सामने हो तो दोनों की पहचान सरल है।

तमिल कविता का वाक्यांशवह क्या हैकहाँ है
“उत्तर में महान पर्वत”हिमालयचित्र 5.2 में ऊपर अंकित हिमाच्छादित चाप — विष्णु पुराण के श्लोक के वही ‘हिमाच्छादित पर्वत’ (हिमाद्रि)
“दक्षिण में केप कुमारी”कन्याकुमारी (केप कोमोरिन)आज के तमिलनाडु में भारतीय प्रायद्वीप का सबसे दक्षिणी छोर — चित्र 5.2 में सबसे नीचे का बिंदु, श्रीलंका से ठीक उत्तर
“पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर”बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागरदोनों चित्र 5.2 में प्रायद्वीप के दोनों ओर अंकित हैं। कन्याकुमारी पर ये हिंद महासागर से मिलते हैं

पुस्तक यह क्यों पूछती है। दोनों विवरणों को साथ रखकर देखिए —

विष्णु पुराण (संस्कृत)तमिल कविता (लगभग 2000 वर्ष पूर्व)
उत्तर“हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में”“उत्तर में महान पर्वत तक”
दक्षिण“समुद्र के उत्तर में”“दक्षिण में केप कुमारी से”
पूर्व एवं पश्चिमउल्लेख नहीं“पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर”
इससे क्या सिद्ध होता है: सुदूर दक्षिण का एक तमिल कवि और संस्कृत में रचा गया एक ग्रंथ — दोनों एक ही देश का, एक ही सीमाओं के साथ वर्णन करते हैं। दोनों में से कोई किसी की नकल नहीं कर रहा। यह सच्चा प्रमाण है कि भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोलने वाले, इस भूमि के भिन्न-भिन्न भागों के लोग अपने देश के आरंभ और अंत का एक ही चित्र मन में रखते थे। अध्याय अपना निष्कर्ष इसी वाक्य से निकालता है — “प्रतीत होता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे।”
क्या आप जानते हैं? कविता में प्रशंसा एक राजा की है, जिसका नाम कुमारी से हिमालय तक जाना जाता है — अर्थात ज्ञात भूमि के एक छोर से दूसरे छोर तक। कवि इस ‘समुद्र-से-पर्वत’ शैली को सर्वोच्च प्रशंसा मानते थे, और यह तभी सार्थक है जब सुनने वालों को पहले से पूरे देश का आकार ज्ञात हो।
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