अन्वेषण अध्याय 8 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपका सबसे प्रिय त्योहार कौन-सा है एवं यह आपके क्षेत्र में किस प्रकार मनाया जाता है? क्या आप जानते हैं कि यह भारत के किसी अन्य भाग में भी वस्तुत: किसी अन्य नाम से मनाया जाता है?
उत्तर

अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए : (1) अपने त्योहार का नाम और सच्चाई से यह कि वह आपको प्रिय क्यों है; (2) आपके अपने क्षेत्र में वह कैसे मनाया जाता है — भोजन, वस्त्र, सजावट, कितने दिन; (3) कम से कम दो अन्य क्षेत्र, जहाँ वही पर्व दूसरे नाम से मनाया जाता है।

नमूना उत्तर :

मेरा सबसे प्रिय त्योहार मकर संक्रांति है, क्योंकि वर्ष में यही एक दिन है जब पूरा मुहल्ला एक साथ छत पर होता है। महाराष्ट्र के हमारे भाग में यह 14 जनवरी को पड़ता है। रसोई में तिल भुनने की सुगंध भर जाती है और हम तिलगुल — तिल और गुड़ के लड्डू — बनाते हैं, जो हर मिलने वाले को “तिळ-गुळ घ्या, गोड-गोड बोला” कहकर दिए जाते हैं, अर्थात यह मिठास लीजिए और मीठा बोलिए। स्त्रियाँ उस दिन काली साड़ी पहनती हैं और हळदी-कुंकू में छोटे उपहार बाँटती हैं। सुबह से साँझ तक आकाश पतंगों से भरा रहता है।

यही पर्व उसी तिथि को पूरे भारत में दूसरे नामों से मनाया जाता है। तमिलनाडु में यह पोंगल है, जिसमें नए चावल को बर्तन में तब तक उबाला जाता है जब तक वह उफनकर बाहर न आ जाए। पंजाब में एक रात पहले लोहड़ी की अग्नि जलती है और अगला दिन माघी होता है। असम में यह माघ बिहू है, जिसमें सामूहिक भोज होते हैं। गुजरात में यह उत्तरायण है, जो पतंगों के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रकार मेरा प्रिय त्योहार वस्तुत: पूरे देश के साथ साझा त्योहार निकला।

यदि आपका त्योहार कोई और है, तब भी पृष्ठ 132 का मानचित्र विधि बता देता है — तिथि और कारण ढूँढ़िए, फिर उसी तिथि और कारण को अन्यत्र दूसरे नाम से खोजिए।

मानचित्र (चित्र 8.5) में नामक्षेत्रकिसका सूचक / कैसे मनाया जाता है
शिशुर सेंक्रातकश्मीर घाटीकड़ाके की सर्दी में सूर्य का उत्तर की ओर मुड़ना
माघी / लोहड़ीपंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेशलोहड़ी की रात अग्नि; रबी की फसल और आती हुई कटाई
खिचड़ी पर्वउत्तर प्रदेशनदी में स्नान और खिचड़ी का दान
मकर संक्रांतमध्य प्रदेश और मध्य भारतपतंगें तथा तिल-गुड़ की मिठाइयाँ
उत्तरायणगुजरात और राजस्थानशब्द का अर्थ ही है सूर्य की उत्तर-यात्रा; प्रसिद्ध पतंग-पर्व
मकर संक्रांतिमहाराष्ट्रतिलगुल के लड्डू और “मीठा बोलिए” का संदेश
माघ बिहूअसमकटाई के मौसम का अंत; सामूहिक भोज और अलाव
पौष साँग क्रान्तिपश्चिम बंगालपौष मास का अंतिम दिन; नए चावल, खजूर के गुड़ और नारियल के पीठे-पुली
मकर संक्रांतिओडिशानए चावल से बना मकर चाउला का भोग
पेड्डा पंडुगाआंध्र प्रदेश और तेलंगाना‘बड़ा त्योहार’, कई दिनों तक; मुग्गु रंगोली और सजे हुए बैल
मकर संक्रमणकर्नाटकएळ्ळु-बेळ्ळ (तिल और गुड़) बाँटते हुए — “मीठा खाइए, मीठा बोलिए”
पोंगलतमिलनाडुचार दिन; नए चावल को उफनने तक उबालना, सूर्य और गोधन के प्रति कृतज्ञता
मकर विलक्कुकेरलमकर संक्रांति की संध्या को सबरीमला की तीर्थ-ऋतु के समापन पर जलने वाला दीप
एक ही पर्व के इतने नाम क्यों: पर्व के पीछे की घटना कोई नाम नहीं है — वह सूर्य का उत्तरायण और उसके बाद आने वाली फसल है, और यह पूरे देश में उन्हीं दिनों होता है। हर क्षेत्र ने उसी घटना को अपनी भाषा में अपना नाम, अपना भोजन, अपने वस्त्र और अपने खेल दे दिए। कारण एक, उत्सव अनेक।
प्र2.
अक्तूबर-नवंबर माह में भारत में कई प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। उनमें से कुछ प्रमुख त्योहारों एवं देश के विभिन्न भागों में उन्हें जिन नामों से पुकारा जाता है, उनकी सूची बनाइए।
उत्तर

अक्तूबर और नवंबर भारतीय वर्ष के सबसे व्यस्त सप्ताह हैं, क्योंकि तब वर्षा ऋतु समाप्त हो चुकी होती है और मुख्य फसल घर आ जाती है। मुख्य त्योहार और उनके क्षेत्रीय नाम :

त्योहारभारत के विभिन्न भागों में नाम और रूपलगभग कब
नवरात्र और विजयादशमीपश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा में दुर्गा पूजा; उत्तर भारत में दशहरा और रामलीला; कर्नाटक में दसरा या नाड हब्ब, विशेषकर मैसूरु में; गुजरात में गरबा और डांडिया रास; तमिलनाडु में बोम्मै गोलु तथा आंध्र प्रदेश-तेलंगाना में बोम्मल कोलुवु; तेलंगाना में बतुकम्मा; दक्षिण में आयुध पूजा और सरस्वती पूजासितंबर के अंत से अक्तूबर मध्य तक
दीपावलीउत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में दिवाली; दक्षिण में दीपावली, जहाँ तमिलनाडु इसे एक दिन पहले नरक चतुर्दशी के रूप में मनाता है; उसी रात पश्चिम बंगाल में काली पूजा; सिखों के लिए बंदी छोड़ दिवस; सिक्किम, दार्जिलिंग और नेपाली-भाषी क्षेत्रों में तिहार; जैन इसे महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैंअक्तूबर मध्य से नवंबर मध्य तक
दीपावली का अगला दिनउत्तर भारत में गोवर्धन पूजा या अन्नकूट; महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा में बलि प्रतिपदा या पाडवा; गुजरात में बेस्तु वरस, अर्थात नववर्षदीपावली के अगले दिन
भाई-बहन का दिनउत्तर भारत में भाई दूज; महाराष्ट्र में भाऊबीज; गुजरात में भाई बीज; पश्चिम बंगाल में भाई फोंटा; दक्षिण में भगिनी हस्त भोजनम्दीपावली के दो दिन बाद
छठबिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा, जिसे सूर्य षष्ठी या डाला छठ भी कहते हैं — जल में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्यदीपावली के छह दिन बाद
पूर्वोत्तर के फसल-पर्वमेघालय के गारो समुदाय का वांगला, सौ ढोलों का फसल-पर्व; मणिपुर के कुकी-चिन-मिज़ो समुदायों का कुट, जो 1 नवंबर को मनाया जाता हैअक्तूबर-नवंबर
गुरु नानक जयंतीगुरुपर्व या प्रकाश पर्व — गुरु नानक का प्रकाशोत्सव, पूरे भारत में सिख समुदाय द्वारा, सबसे बड़े आयोजन पंजाब मेंनवंबर, कार्तिक पूर्णिमा को
कार्तिगै दीपमतमिलनाडु का दीप-पर्व, तिरुवण्णामलै की विशाल ज्योति के लिए प्रसिद्ध; केरल में इसे त्रिक्कार्तिका कहते हैंनवंबर के अंत या दिसंबर के आरंभ में

इस सूची से क्या दिखता है। दो ढर्रे, और दोनों इसी अध्याय के हैं :

  • एक त्योहार, अनेक नाम — जो रात दिल्ली में दिवाली है, वही कोलकाता में काली पूजा, अमृतसर में बंदी छोड़ दिवस और गंगटोक में तिहार है।
  • अनेक त्योहार, एक ऋतु — दुर्गा पूजा, दीपावली, छठ, वांगला और कुट अलग-अलग समुदायों के अलग-अलग पर्व हैं, फिर भी सब इन्हीं आठ सप्ताहों में आ जाते हैं, क्योंकि सबके पीछे वर्षा का अंत और मुख्य फसल है।
अपनी सूची कैसे जाँचें: हर त्योहार के सामने लिखिए (क) तिथि, (ख) कारण, (ग) नाम। यदि दो त्योहारों में (क) और (ख) समान हों पर (ग) अलग, तो आपने विविधता में एकता खोज ली। यदि केवल (ख) समान हो, तो आपने अनेक समुदायों की साझी ऋतु खोजी है — यह एकता का दूसरा रूप है।
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