प्र1.
आपका सबसे प्रिय त्योहार कौन-सा है एवं यह आपके क्षेत्र में किस प्रकार मनाया जाता है? क्या आप जानते हैं कि यह भारत के किसी अन्य भाग में भी वस्तुत: किसी अन्य नाम से मनाया जाता है?
उत्तर
अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए : (1) अपने त्योहार का नाम और सच्चाई से यह कि वह आपको प्रिय क्यों है; (2) आपके अपने क्षेत्र में वह कैसे मनाया जाता है — भोजन, वस्त्र, सजावट, कितने दिन; (3) कम से कम दो अन्य क्षेत्र, जहाँ वही पर्व दूसरे नाम से मनाया जाता है।
नमूना उत्तर :
मेरा सबसे प्रिय त्योहार मकर संक्रांति है, क्योंकि वर्ष में यही एक दिन है जब पूरा मुहल्ला एक साथ छत पर होता है। महाराष्ट्र के हमारे भाग में यह 14 जनवरी को पड़ता है। रसोई में तिल भुनने की सुगंध भर जाती है और हम तिलगुल — तिल और गुड़ के लड्डू — बनाते हैं, जो हर मिलने वाले को “तिळ-गुळ घ्या, गोड-गोड बोला” कहकर दिए जाते हैं, अर्थात यह मिठास लीजिए और मीठा बोलिए। स्त्रियाँ उस दिन काली साड़ी पहनती हैं और हळदी-कुंकू में छोटे उपहार बाँटती हैं। सुबह से साँझ तक आकाश पतंगों से भरा रहता है।
यही पर्व उसी तिथि को पूरे भारत में दूसरे नामों से मनाया जाता है। तमिलनाडु में यह पोंगल है, जिसमें नए चावल को बर्तन में तब तक उबाला जाता है जब तक वह उफनकर बाहर न आ जाए। पंजाब में एक रात पहले लोहड़ी की अग्नि जलती है और अगला दिन माघी होता है। असम में यह माघ बिहू है, जिसमें सामूहिक भोज होते हैं। गुजरात में यह उत्तरायण है, जो पतंगों के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रकार मेरा प्रिय त्योहार वस्तुत: पूरे देश के साथ साझा त्योहार निकला।
यही पर्व उसी तिथि को पूरे भारत में दूसरे नामों से मनाया जाता है। तमिलनाडु में यह पोंगल है, जिसमें नए चावल को बर्तन में तब तक उबाला जाता है जब तक वह उफनकर बाहर न आ जाए। पंजाब में एक रात पहले लोहड़ी की अग्नि जलती है और अगला दिन माघी होता है। असम में यह माघ बिहू है, जिसमें सामूहिक भोज होते हैं। गुजरात में यह उत्तरायण है, जो पतंगों के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रकार मेरा प्रिय त्योहार वस्तुत: पूरे देश के साथ साझा त्योहार निकला।
यदि आपका त्योहार कोई और है, तब भी पृष्ठ 132 का मानचित्र विधि बता देता है — तिथि और कारण ढूँढ़िए, फिर उसी तिथि और कारण को अन्यत्र दूसरे नाम से खोजिए।
| मानचित्र (चित्र 8.5) में नाम | क्षेत्र | किसका सूचक / कैसे मनाया जाता है |
|---|---|---|
| शिशुर सेंक्रात | कश्मीर घाटी | कड़ाके की सर्दी में सूर्य का उत्तर की ओर मुड़ना |
| माघी / लोहड़ी | पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश | लोहड़ी की रात अग्नि; रबी की फसल और आती हुई कटाई |
| खिचड़ी पर्व | उत्तर प्रदेश | नदी में स्नान और खिचड़ी का दान |
| मकर संक्रांत | मध्य प्रदेश और मध्य भारत | पतंगें तथा तिल-गुड़ की मिठाइयाँ |
| उत्तरायण | गुजरात और राजस्थान | शब्द का अर्थ ही है सूर्य की उत्तर-यात्रा; प्रसिद्ध पतंग-पर्व |
| मकर संक्रांति | महाराष्ट्र | तिलगुल के लड्डू और “मीठा बोलिए” का संदेश |
| माघ बिहू | असम | कटाई के मौसम का अंत; सामूहिक भोज और अलाव |
| पौष साँग क्रान्ति | पश्चिम बंगाल | पौष मास का अंतिम दिन; नए चावल, खजूर के गुड़ और नारियल के पीठे-पुली |
| मकर संक्रांति | ओडिशा | नए चावल से बना मकर चाउला का भोग |
| पेड्डा पंडुगा | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना | ‘बड़ा त्योहार’, कई दिनों तक; मुग्गु रंगोली और सजे हुए बैल |
| मकर संक्रमण | कर्नाटक | एळ्ळु-बेळ्ळ (तिल और गुड़) बाँटते हुए — “मीठा खाइए, मीठा बोलिए” |
| पोंगल | तमिलनाडु | चार दिन; नए चावल को उफनने तक उबालना, सूर्य और गोधन के प्रति कृतज्ञता |
| मकर विलक्कु | केरल | मकर संक्रांति की संध्या को सबरीमला की तीर्थ-ऋतु के समापन पर जलने वाला दीप |
एक ही पर्व के इतने नाम क्यों: पर्व के पीछे की घटना कोई नाम नहीं है — वह सूर्य का उत्तरायण और उसके बाद आने वाली फसल है, और यह पूरे देश में उन्हीं दिनों होता है। हर क्षेत्र ने उसी घटना को अपनी भाषा में अपना नाम, अपना भोजन, अपने वस्त्र और अपने खेल दे दिए। कारण एक, उत्सव अनेक।