दीपकम् अध्याय 10 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु — (क) चन्द्रः कदा प्रसन्नः भवति ? (ख) सायङ्काले केषां सभा भवति ? (ग) शशकाः किमर्थम् उपायं चिन्तयन्ति ? (घ) चन्द्रः केन नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति ? (ङ) “आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलावः” इति कः कथयति ?
उत्तर

‘पूर्णवाक्येन’ अर्थात् पूरा वाक्य — प्रश्न के शब्दों को ही उत्तर में लौटाइए और प्रश्नवाचक शब्द की जगह उत्तर रख दीजिए।

उत्तरम् (संस्कृतम्)हिन्दी अर्थः
(क)यदा शशकाः जीवन्ति तदा एव चन्द्रः प्रसन्नः भवति ।जब खरगोश जीवित रहते हैं, तभी चन्द्रमा प्रसन्न होता है।
(ख)सायङ्काले शशकानां सभा भवति ।सायंकाल में खरगोशों की सभा होती है।
(ग)शशकाः स्वरक्षार्थम् उपायं चिन्तयन्ति ।खरगोश अपनी रक्षा के लिए उपाय सोचते हैं।
(घ)चन्द्रः ‘शशाङ्कः’ इति नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति ।चन्द्रमा ‘शशाङ्क’ नाम से प्रसिद्ध है।
(ङ)इति शशकराजः कथयति ।यह खरगोशों का राजा कहता है।
प्रश्नवाचक शब्द ही बताता है कि उत्तर में क्या डालना है:
कदा (कब) → समय : ‘यदा … तदा …’
केषाम् (किनकी) → षष्ठी बहुवचन : ‘शशकानाम्’
किमर्थम् (किसलिए) → प्रयोजन : ‘स्वरक्षार्थम्’
केन नाम्ना (किस नाम से) → तृतीया : ‘शशाङ्कः इति नाम्ना’
कः (कौन) → प्रथमा एकवचन : ‘शशकराजः’
Tip: (ङ) में पाठ में ‘शशकः कथयति’ छपा है, पर बोलने वाला वही शशकराज है जो गजराज के पास गया था — इसलिए शशकः लिखना भी सही है और शशकराजः लिखना भी। ‘यदा’ के साथ ‘तदा’ और ‘यदि’ के साथ ‘तर्हि’ — ये जोड़े हमेशा साथ चलते हैं।
प्र2.
पाठस्य आधारेण पट्टिकातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयन्तु — [ निवसन्ति · चिन्तयन्ति · भवति · कथयति · तिष्ठति ] (क) किं चन्द्रः सरोवरे ..................... ? (ख) सर्वे शशकाः उपायं ..................... । (ग) सायंकाले शशकानां सभा ..................... । (घ) शशकाः सरोवरस्य तीरे ..................... । (ङ) सः गजराजं ..................... ।
उत्तर

पहले हर वाक्य का कर्ता देखिए — कर्ता एकवचन है या बहुवचन, उसी से क्रियापद तय हो जाएगा।

पूर्णं वाक्यम्कर्ता / वचनम्हिन्दी अर्थः
(क)किं चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति ?चन्द्रः — एकवचनम्क्या चन्द्रमा तालाब में रहता है?
(ख)सर्वे शशकाः उपायं चिन्तयन्तिशशकाः — बहुवचनम्सब खरगोश उपाय सोचते हैं।
(ग)सायंकाले शशकानां सभा भवतिसभा — एकवचनम्सायंकाल में खरगोशों की सभा होती है।
(घ)शशकाः सरोवरस्य तीरे निवसन्तिशशकाः — बहुवचनम्खरगोश तालाब के किनारे रहते हैं।
(ङ)सः गजराजं कथयतिसः — एकवचनम्वह गजराज से कहता है।
Why it happens: संस्कृत में क्रिया कर्ता के अनुसार चलती है, कर्म के अनुसार नहीं। (ग) में कर्ता ‘सभा’ है (एकवचन), ‘शशकानाम्’ नहीं — इसीलिए ‘भवन्ति’ नहीं, भवति आएगा। यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा जाल है।
Check it yourself: पट्टिका में पाँच पद और वाक्य भी पाँच — इसलिए हर पद एक ही बार प्रयुक्त होगा। बहुवचन के दो पद (निवसन्ति, चिन्तयन्ति) बहुवचन कर्ता वाले दो वाक्यों (ख, घ) में गए, और एकवचन के तीन पद (भवति, कथयति, तिष्ठति) शेष तीन में।
प्र3.
उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानां पदानां वचनं पुरुषं च लिखन्तु — [उदाहरणम् : चिन्तयति — प्रथमपुरुषः, एकवचनम्] — तिष्ठन्ति, जीवन्ति, नमति, कथयति, गच्छति ।
उत्तर

अन्तिम अक्षर देखिए — ति = प्रथमपुरुष एकवचन, अन्ति = प्रथमपुरुष बहुवचन।

पदम्पुरुषःवचनम्धातुःहिन्दी अर्थः
चिन्तयति (उदाहरणम्)प्रथमपुरुषःएकवचनम्चिन्त्सोचता है
तिष्ठन्तिप्रथमपुरुषःबहुवचनम्स्था (तिष्ठ्)ठहरते हैं
जीवन्तिप्रथमपुरुषःबहुवचनम्जीव्जीते हैं
नमतिप्रथमपुरुषःएकवचनम्नम्प्रणाम करता है
कथयतिप्रथमपुरुषःएकवचनम्कथ्कहता है
गच्छतिप्रथमपुरुषःएकवचनम्गम् (गच्छ्)जाता है
पाँचों प्रथमपुरुष के ही क्यों: संस्कृत में प्रथमपुरुष वह है जिसकी बात हो रही हो (सः / सा / तत्, ते) — हिन्दी का ‘अन्य पुरुष’। मध्यमपुरुष के रूप सि, थः, थ पर और उत्तमपुरुष के मि, वः, मः पर समाप्त होते हैं। यहाँ किसी भी पद के अन्त में वे चिह्न नहीं हैं, इसलिए सब प्रथमपुरुष के हैं।
सावधान: संस्कृत का ‘प्रथमपुरुष’ हिन्दी/अंग्रेज़ी के ‘first person’ (मैं) से उलटा है। संस्कृत में ‘मैं’ वाला रूप उत्तमपुरुष कहलाता है — जैसे पाठ का ‘चिन्तयामि’, ‘करोमि’।
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