दीपकम् अध्याय 10 बुद्धिः सर्वार्थसाधिका के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

कथा का ढाँचा बहुत साफ़ है। वन में एक नित्यजलपूर्णः महान् सरोवरः है। प्यास से व्याकुल हाथियों का झुंड दूसरे वन से वहाँ आता है, दिन भर जल पीता, नहाता, खेलता है और सूर्यास्त के समय लौट जाता है। सरोवर के किनारे की कोमल भूमि में शशकों के बिल हैं — हाथियों के चलने-फिरने से बिल धँसते हैं, बहुत-से शशक क्षतविक्षताः हो जाते हैं, कुछ मर भी जाते हैं। समस्या का हल सभा से नहीं, एक बुद्धिमान् व्यक्ति से निकलता है। सायंकाल शशकों की सभा होती है, सब अपना-अपना मत रखते हैं ( स्वमतं प्रकाशयन्ति ) पर समाधान नहीं मिलता। अन्त में शशकराज कहता है — ‘अहमेव उपायं चिन्तयामि’ — उपाय मैं ही सोचूँगा। उपाय क्या है? शशकराज रात में गजराज के पास जाकर कहता है कि यह सरोवर चन्द्रमा का निवास-स्थान है, शशक उसकी प्रजा हैं, इसीलिए चन्द्रमा का नाम शशाङ्कः (शश + अङ्क = जिसके चिह्न में शश हो) है। गजराज प्रमाण माँगता है, और जल में चन्द

  1. दशमः पाठः
  2. दशमः पाठः
  3. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  4. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  5. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  6. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. योग्यताविस्तरः
  9. परियोजनाकार्यम्
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