कक्षा ६ संस्कृत अध्याय 9 अतिथिदेवो भव के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पाठ का मूल वाक्य उपनिषद् से आया है — ‘अतिथिदेवो भव’ (तैत्तिरीयोपनिषद्, शिक्षावल्ली)। अर्थ है — ‘अतिथि को देवता मानो’। पाठ-प्रवेश बताता है कि भारतीय संस्कृति में अतिथि-सेवा पञ्चमहायज्ञों में गिनी जाती है, और यहाँ केवल मनुष्य ही नहीं, अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रीति के पात्र होते हैं। कहानी बहुत सरल है। राधिका के घर की छत पर एक बिल्ली और उसके चार बच्चे आ गए हैं। राधिका उनके नाम रखती है — तन्वी, मृद्वी, शबलः, भीमः — और हर नाम उनके अपने गुण से जुड़ा है। वह बिल्ली को दूध देती है, शावकों के पास जाती है, और शावक उससे डरते नहीं। पितामही का उपदेश ही पाठ का केन्द्र है। वे कहती हैं — ‘अतिथयः कदा आगच्छन्ति इति न जानीमः, किन्तु यदा ते अत्र आगच्छन्ति तदा तेषाम् एतादृशी सेवा करणीया’ — अर्थात् अतिथि कब आएगा यह पता नहीं, पर जब आए तब उसकी ऐसी ही सेवा करनी चाहिए। पाठ का अन्त बहुत प्यारा है — राधिका दि
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| अव्ययपदम् | संस्कृत-अर्थः | हिन्दी | पाठे / अभ्यासे वाक्यम् |
|---|---|---|---|
| अत्र | अस्मिन् स्थाने | यहाँ | अत्र बालकः अस्ति । |
| तत्र | तस्मिन् स्थाने | वहाँ | क्रीडाङ्गणं तत्र अस्ति । |
| कुत्र | कस्मिन् स्थाने | कहाँ | कन्दुकः कुत्र अस्ति ? |
| सर्वत्र | सर्वेषु स्थानेषु | सब जगह | परमेश्वरः सर्वत्र अस्ति । |
| अन्यत्र | अन्यस्मिन् स्थाने | और कहीं, दूसरी जगह | नगरम् अन्यत्र अस्ति । |
| एकत्र | एकस्मिन् स्थाने | एक ही जगह | बालकाः एकत्र तिष्ठन्ति । |
| उपरि | उपरितने भागे | ऊपर | एकः वानरः वृक्षस्य उपरि तिष्ठति । |
| अधः | अधोभागे | नीचे | सः फलानि अधः क्षिपति । |
| अन्तः | अभ्यन्तरे | अन्दर | बिडालः गृहस्य अन्तः प्रविशति । |
| बहिः | बहिर्भागे | बाहर | अमितः गृहात् बहिः गच्छति । |
| पुरतः | अग्रभागे | आगे | बिडालः कन्दुकस्य पुरतः अस्ति । |
| पृष्ठतः | पृष्ठभागतः | पीछे-पीछे | मार्जारी मन्दं मन्दं पृष्ठतः आगच्छति । |
अभ्यास
- नवमः पाठः
- नवमः पाठः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तरः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्