दीपकम् अध्याय 9 वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
शब्दः / अर्थः / हिन्दी / English — कूर्दमाना, नूतनाः, मिलित्वा, अहोरात्रम्, छद्याः उपरि, शावकाः, मन्दं मन्दम्, पृष्ठतः, कार्यकलापान्, दृष्ट्वा, एतादृशाः, स्थापयन्ती, किमर्थम्, आदिनम्, वारं वारम् ।
उत्तर

पुस्तक की पूरी शब्द-तालिका, साथ में यह भी कि शब्द पाठ में कहाँ आया है।

शब्दःअर्थः (संस्कृते)हिन्दीEnglish
कूर्दमानाउच्छलनं कुर्वतीकूदती हुईJumping (Female)
नूतनाःनवीनाःनयेNew
मिलित्वासम्मिल्यमिलकरTogether
अहोरात्रम्अहर्निशम्दिन-रातDay and night
छद्याः उपरिगृहस्य उपरितने भागेछत के ऊपरOn the roof
शावकाःमार्जारस्य शिशवःबिल्ली के बच्चेKitten
मन्दं मन्दम्शनैः शनैःधीरे-धीरेSlowly
पृष्ठतःपृष्ठभागतःपीछे-पीछेFrom the back
कार्यकलापान्गतिविधीन्गतिविधियों कोActivities
दृष्ट्वाअवलोक्यदेखकरHaving Seen
एतादृशाःएतैः समानाःइस तरह केLike these
स्थापयन्तीस्थापनं कुर्वतीडालती हुईPutting
किमर्थम्किं निमित्तम्क्यों / किसलिएWhy
आदिनम्सम्पूर्णं दिनम्दिन भरWhole day
वारं वारम्पुनः पुनःबार-बारAgain and again
तालिका में एक छिपा हुआ पैटर्न है: पन्द्रह में से आठ शब्द अव्यय हैं — मिलित्वा, अहोरात्रम्, उपरि, मन्दं मन्दम्, पृष्ठतः, दृष्ट्वा, किमर्थम्, आदिनम्, वारं वारम्। यही इस पाठ का व्याकरण-विषय है। दो शब्द ‘कूर्दमाना’ और ‘स्थापयन्ती’ स्त्रीलिङ्ग के कृदन्त रूप (शानच्/शतृ) हैं — दोनों राधिका के लिए ही आए हैं।
Tip — दो जोड़े याद रखिए: ‘मन्दं मन्दम्’ और ‘वारं वारम्’ में एक ही शब्द दो बार आया है। संस्कृत में इसे द्विरुक्ति कहते हैं और इससे ‘लगातार / धीरे-धीरे / बार-बार’ का भाव बनता है — जैसे ‘शनैः शनैः’, ‘पुनः पुनः’।
प्र2.
मातृभाषया अर्थं लिखन्तु (शब्दार्थ-तालिकायाः अन्तिमः स्तम्भः, पृष्ठ 100)
उत्तर

तालिका का पाँचवाँ खाना ख़ाली छोड़ा गया है — उसमें आपको अपनी मातृभाषा में अर्थ लिखना है। यह हर विद्यार्थी का अपना उत्तर होगा।

कैसे भरें: पहले संस्कृत शब्द को पाठ में उसी वाक्य में पढ़िए, फिर हिन्दी अर्थ देखिए, और तब अपनी भाषा का सबसे स्वाभाविक शब्द लिखिए — शब्दकोश वाला कठिन शब्द नहीं, घर में बोला जाने वाला शब्द।

नमूना उत्तर (मराठी तथा गुजराती भाषासु) —

शब्दःहिन्दीमराठीगुजराती
कूर्दमानाकूदती हुईउड्या मारतકૂદતી
नूतनाःनयेनवीनનવા
शावकाःबिल्ली के बच्चेमांजरीची पिल्लेબિલાડીનાં બચ્ચાં
मन्दं मन्दम्धीरे-धीरेहळू हळूધીમે ધીમે
वारं वारम्बार-बारपुन्हा पुन्हाવારંવાર
यह खाना क्यों दिया गया है ? क्योंकि संस्कृत के अधिकांश शब्द भारत की सभी भाषाओं में किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। ‘नूतन’ मराठी-गुजराती-बाङ्ला तीनों में लगभग वैसा ही है; ‘वारं वारम्’ से गुजराती का ‘વારંવાર’ बना है। अपनी भाषा में अर्थ लिखते ही संस्कृत विदेशी नहीं, अपनी लगने लगती है।
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