राधिका ने नाम यों ही नहीं रख दिए — उसने हर शावक को ध्यान से देखा और जो गुण सबसे पहले दिखा, वही नाम बना दिया। पाठ की एक ही पंक्ति इसका प्रमाण है: ‘तन्वी आकृत्या सुन्दरी, मृद्वी स्पर्शेन अतीव कोमला । शबलः चित्रवर्णः तथा च भीमः किञ्चित् स्थूलः ।’
| नाम | शब्दस्य अर्थः | पाठे तस्य गुणः | अतः नाम किमर्थम् ? |
|---|---|---|---|
| तन्वी | कृशा, सुन्दरी (तनु = पतला, सुडौल) | आकृत्या सुन्दरी | रूप-आकृति से सुन्दर थी, इसलिए ‘तन्वी’ |
| मृद्वी | कोमला (मृदु = मुलायम) | स्पर्शेन अतीव कोमला | छूने में बहुत मुलायम थी, इसलिए ‘मृद्वी’ |
| शबलः | चित्रवर्णः, कर्बुरः (रंग-बिरंगा) | चित्रवर्णः | उसका रंग चितकबरा था, इसलिए ‘शबलः’ |
| भीमः | विशालः, स्थूलः (हट्टा-कट्टा) | किञ्चित् स्थूलः | वह कुछ मोटा-तगड़ा था, इसलिए ‘भीमः’ |
संस्कृतेन उत्तरम् — राधिका शावकानां गुणान् दृष्ट्वा तेषां नामानि अकरोत् । यस्य यः गुणः प्रधानः आसीत्, तदनुसारम् एव तस्य नाम अभवत् । (हिन्दी: राधिका ने बच्चों के गुण देखकर उनके नाम रखे। जिसमें जो गुण प्रमुख था, उसी के अनुसार उसका नाम पड़ा।)
अपने नाम पर विचार — नमूना उत्तर (जैसा कक्षा में सुनाया जा सकता है):
“मम नाम अनन्या । ‘अनन्या’ इत्यस्य अर्थः — ‘या अन्या न, अद्वितीया’ । मम पितरौ इच्छतः यत् अहं स्वकार्ये अद्वितीया भवेयम् । अतः मम नाम्नः उद्देश्यम् अस्ति — स्वकर्मणि निष्ठा ।” (हिन्दी: मेरा नाम अनन्या है। इसका अर्थ है — जो दूसरी जैसी न हो, अद्वितीय। मेरे माता-पिता चाहते हैं कि मैं अपने काम में अद्वितीय बनूँ। इसलिए मेरे नाम का उद्देश्य है — अपने कर्म में निष्ठा।)