दीपकम् अध्याय 9 योग्यताविस्तरः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एतत् गीतं सर्वेऽपि मिलित्वा पठन्तु आलपन्तु च । — मार्जाल ! रे मार्जाल ! कुत्र गतोऽसि त्वम् । अत्रैवास्मि आगतोऽस्मि राजगृहादेवम् । मार्जाल ! रे मार्जाल ! किं दृष्टं तत्र ? तावद्दीर्घः मूषकपुत्रः न हि दृष्टोऽन्यत्र ।
उत्तर

यह गीत बिल्ले और किसी पूछने वाले के बीच का छोटा-सा संवाद है — दो प्रश्न, दो उत्तर। पहले सन्धि खोल लीजिए, फिर पूरा गीत अपने आप खुल जाएगा।

सन्धि-विच्छेदः —

गीते पदम्सन्धि-विच्छेदःसन्धेः स्वरूपम्
गतोऽसिगतः + असिविसर्गसन्धिः (अः + अ = ओऽ)
अत्रैवास्मिअत्र + एव + अस्मिवृद्धिसन्धिः (अ + ए = ऐ); दीर्घसन्धिः (अ + अ = आ)
आगतोऽस्मिआगतः + अस्मिविसर्गसन्धिः (अः + अ = ओऽ)
राजगृहादेवम्राजगृहात् + एवम्व्यञ्जनसन्धिः (त् + ए = दे)
तावद्दीर्घःतावत् + दीर्घःव्यञ्जनसन्धिः (त् + द् = द्द)
दृष्टोऽन्यत्रदृष्टः + अन्यत्रविसर्गसन्धिः (अः + अ = ओऽ)

अन्वयः —

रे मार्जाल ! मार्जाल ! त्वं कुत्र गतः असि ?
(अहम्) अत्र एव अस्मि, राजगृहात् एवम् आगतः अस्मि ।
रे मार्जाल ! मार्जाल ! तत्र किं दृष्टम् ?
तावत् दीर्घः मूषकपुत्रः अन्यत्र न हि दृष्टः ।

हिन्दी अर्थः —

संस्कृतम्हिन्दी अर्थः
मार्जाल ! रे मार्जाल ! कुत्र गतोऽसि त्वम् ।बिल्ले ! ओ बिल्ले ! तू कहाँ गया था ?
अत्रैवास्मि आगतोऽस्मि राजगृहादेवम् ।मैं तो यहीं हूँ — अभी-अभी राजा के महल से ही आया हूँ।
मार्जाल ! रे मार्जाल ! किं दृष्टं तत्र ?बिल्ले ! ओ बिल्ले ! वहाँ तूने क्या देखा ?
तावद्दीर्घः मूषकपुत्रः न हि दृष्टोऽन्यत्र ।इतना लम्बा चूहे का बच्चा ! वैसा तो और कहीं देखा ही नहीं।

भावः — गीत हँसी-मज़ाक का है। बिल्ला राजमहल तक हो आया, पर वहाँ का वैभव, राजा, सिंहासन — कुछ भी उसे याद नहीं रहा। याद रहा तो बस एक लम्बा-सा चूहा! भाव यह है कि हर प्राणी संसार को अपनी ही रुचि की आँख से देखता है — बिल्ले के लिए राजमहल की सबसे बड़ी बात वहाँ का चूहा ही है।

गीत को पाठ से जोड़िए — यही इसका असली काम है: चार पंक्तियों में इस पाठ के चारों स्थानवाचक अव्यय आ गए हैं — कुत्र (कहाँ), अत्र (यहाँ), तत्र (वहाँ), अन्यत्र (और कहीं)। इसीलिए पुस्तक कहती है ‘सर्वे मिलित्वा पठन्तु आलपन्तु च’ — सब मिलकर पढ़िए और गाइए; तो ये चारों अव्यय बिना रटे याद हो जाएँगे।
Did you know? यह अंग्रेज़ी की प्रसिद्ध बालकविता “Pussy cat, pussy cat, where have you been ? — I’ve been to London to visit the Queen” का संस्कृत रूपान्तर है। ‘राजगृहम्’ = राजा का घर, राजमहल; ‘मूषकपुत्रः’ = चूहे का बच्चा। पाठ के चित्र में भी बालिका बिल्ली को सहला रही है और पास ही एक चूहा बैठा है।
व्याकरण-संकेतः: ‘मार्जाल !’, ‘रे मार्जाल !’ इति सम्बोधन-प्रथमा एकवचनम् (मार्जालः → हे मार्जाल !) । ‘गतः असि’, ‘आगतः अस्मि’, ‘दृष्टः’ — एतानि क्त-प्रत्ययान्तानि (भूतकालिकानि) विशेषणानि; ‘दृष्टम्’ इति नपुंसकलिङ्गे, यतः ‘किम्’ नपुंसकलिङ्गम् । ‘हि’ इति अव्ययम् — निश्चय-अर्थे (= ही, निश्चय ही) । ‘तावत्’ अपि अव्ययम् (= इतना) ।
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