प्र1.
पाठे पठितानां धातुरूपाणां संग्रहणं कुर्वन्तु । तेषां पुरुषं वचनं च लिखन्तु ।
उत्तर
करने का तरीक़ा: पाठ को पंक्ति-दर-पंक्ति पढ़िए, हर वाक्य का क्रियापद छाँटिए (पुस्तक ने वे लाल रंग में छाप ही दिए हैं), फिर हर पद के आगे धातु, पुरुष और वचन लिखिए। नीचे पूरा तैयार सङ्ग्रह है — इसे अपनी परियोजना-पुस्तिका में उतार लीजिए।
| क्रियापदम् | धातुः | पुरुषः | वचनम् | हिन्दी अर्थः |
|---|---|---|---|---|
| भवति | भू | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | होता है |
| शक्नुमः | शक् | उत्तमपुरुषः | बहुवचनम् | हम सकते हैं |
| प्रतिपादयति | प्रति + पद् (णिच्) | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | प्रतिपादित करती है |
| पठामः | पठ् | उत्तमपुरुषः | बहुवचनम् | हम पढ़ते हैं |
| अस्ति | अस् | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | है |
| आगच्छति | आ + गम् | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | आता है |
| निर्गच्छन्ति | निर् + गम् | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | निकलते हैं |
| सन्ति | अस् | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | हैं |
| निवसन्ति | नि + वस् | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | रहते हैं |
| भवन्ति | भू | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | होते हैं |
| अनुभवन्ति | अनु + भू | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | अनुभव करते हैं |
| चिन्तयन्ति | चिन्त् | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | सोचते हैं |
| प्रकाशयन्ति | प्र + काश् | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | प्रकट करते हैं |
| प्राप्नुवन्ति | प्र + आप् | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | प्राप्त करते हैं |
| वदति | वद् | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | कहता है |
| चिन्तयामि | चिन्त् | उत्तमपुरुषः | एकवचनम् | मैं सोचता हूँ |
| गच्छामः | गम् | उत्तमपुरुषः | बहुवचनम् | हम जाते हैं |
| गच्छति | गम् | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | जाता है |
| कथयति | कथ् | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | कहता है |
| स्मः | अस् | उत्तमपुरुषः | बहुवचनम् | हम हैं |
| जीवन्ति | जीव् | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | जीते हैं |
| पृच्छति | प्रच्छ् | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | पूछता है |
| करोमि | कृ | उत्तमपुरुषः | एकवचनम् | मैं करता हूँ |
| तिष्ठति | स्था | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | ठहरता है |
| चलावः | चल् | उत्तमपुरुषः | द्विवचनम् | हम दोनों चलते हैं |
| पश्यति | दृश् (पश्य्) | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | देखता है |
| नमति | नम् | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | प्रणाम करता है |
| तिष्ठन्ति | स्था | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | रहते हैं |
इस परियोजना से क्या सीखना है: पूरे पाठ में प्रथमपुरुष के रूप सबसे अधिक हैं, क्योंकि कथा किसी और की कही जा रही है। उत्तमपुरुष के रूप केवल वहाँ आए हैं जहाँ पात्र स्वयं बोल रहे हैं — ‘चिन्तयामि’, ‘गच्छामः’, ‘स्मः’, ‘करोमि’, ‘चलावः’। मध्यमपुरुष (पठसि, पठथः, पठथ) का एक भी रूप इस पाठ में नहीं है — क्योंकि संवाद में किसी ने ‘तुम करते हो’ जैसा वाक्य नहीं कहा।
अपनी पुस्तिका को और अच्छा बनाइए: ऊपर की तालिका में धातुः के अनुसार क्रम लगाकर एक दूसरी सूची बनाइए — जैसे गम् के तीन रूप (आगच्छति, निर्गच्छन्ति, गच्छामः) एक साथ; अस् के तीन रूप (अस्ति, सन्ति, स्मः) एक साथ; भू के तीन (भवति, भवन्ति, अनुभवन्ति) एक साथ। इससे दिख जाएगा कि एक ही धातु से कितने रूप बनते हैं। नीचे ‘पाठे न प्रयुक्ताः किन्तु मया ज्ञाताः’ शीर्षक से मध्यमपुरुष के रूप भी जोड़ दीजिए — जैसे त्वं पठसि, यूयं गच्छथ।