दीपकम् अध्याय 11 यः जानाति सः पण्डितः के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का विषय है ‘प्रहेलिका’। पाठ-प्रवेश स्वयं कहता है — संस्कृत-साहित्ये प्रहेलिकानां विशिष्टं स्थानम् अस्ति । प्रहेलिकाएँ बच्चों से लेकर बूढ़ों तक (आबालवृद्धम्) सबको मानसिक उल्लास देती हैं, बुद्धि की तार्किकशक्ति बढ़ाती हैं, चिन्तनक्षमता का विकास करती हैं और पूर्वज कवियों की बुद्धिमत्ता तथा कल्पनाशक्ति दिखाती हैं। पाँच प्रहेलिकाएँ, पाँच चतुर उत्तर। (१) भोजन के अन्त में पीने योग्य क्या? — तक्रम् ; जयन्त किसका पुत्र? — शक्रस्य ; विष्णुपद कैसा कहा गया? — दुर्लभम् (तीनों उत्तर श्लोक के चौथे चरण में ही छिपे हैं)। (२) जिसका आदि ‘न’, अन्त ‘न’, बीच में ‘य’ — नयनम् । (३) वृक्ष के आगे फल और फल के आगे फिर वृक्ष, ‘अ’ से आरम्भ और ‘स’ से अन्त — अनानसः । चौथी और पाँचवीं प्रहेलिका ‘जोड़कर बनने वाले’ उत्तर की हैं। (४) काशी में मनुष्य मृत्युम् चाहता है, राजाओं का युद्ध में हितकारी जयः है — दोनों जोड़िए तो स
अभ्यास
- एकादशः पाठः
- एकादशः पाठः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- अवधेयांशः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्