दीपकम् अध्याय 11 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु — (क) भोजनान्ते पातुं योग्यं किम् ? (ख) सर्वदेवानां वन्दनीयः कः ? (ग) जयन्तः कस्य सुतः ? (घ) लङ्कायां मिलित्वा कस्य पूर्णरूपम् अस्ति ?
उत्तर

चारों उत्तर एक-एक पद में — जैसा प्रश्न माँगता है।

प्रश्नःउत्तरम् (एकपदेन)हिन्दी
(क) भोजनान्ते पातुं योग्यं किम् ?तक्रम्भोजन के अन्त में पीने योग्य छाछ है।
(ख) सर्वदेवानां वन्दनीयः कः ?मृत्युञ्जयःसब देवताओं के वन्दनीय मृत्युञ्जय (शिव) हैं।
(ग) जयन्तः कस्य सुतः ?शक्रस्यजयन्त इन्द्र का पुत्र है।
(घ) लङ्कायां मिलित्वा कस्य पूर्णरूपम् अस्ति ?कुम्भकर्णस्यलङ्का में मिलकर ‘कुम्भकर्ण’ का पूर्ण रूप बनता है।
विभक्ति ठीक रखिए: (ग) में प्रश्न ‘कस्य सुतः?’ है — प्रश्न ही षष्ठी में है, इसलिए उत्तर भी षष्ठी एकवचन में — ‘शक्रस्य’, केवल ‘शक्रः’ नहीं। इसी प्रकार (घ) में ‘कस्य पूर्णरूपम्?’ का उत्तर कुम्भकर्णस्य (षष्ठी, एकवचन, पुंलिङ्ग) होगा। (क) का प्रश्न ‘किम्?’ है, इसलिए उत्तर प्रथमा में — ‘तक्रम्’ (नपुंसकलिङ्ग, एकवचन)।
Check it yourself: उत्तर लिखने के बाद प्रश्न और उत्तर जोड़कर पढ़िए — ‘जयन्तः शक्रस्य सुतः’ — यदि वाक्य अपने आप सही बन जाए तो विभक्ति ठीक है।
प्र2.
पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु — (क) विष्णुपदं कथं प्रोक्तम् ? (ख) कस्य आदिः अन्तः च ‘न’ अस्ति ? (ग) नरः काश्यां किम् इच्छति ? (घ) कुलालस्य गृहे अर्धं किम् अस्ति ?
उत्तर

यहाँ पूरा वाक्य चाहिए — प्रश्न के शब्दों को ही उत्तर में लौटाइए और प्रश्नवाचक पद की जगह उत्तर रख दीजिए।

प्रश्नःउत्तरम् (पूर्णवाक्येन)हिन्दी
(क) विष्णुपदं कथं प्रोक्तम् ?विष्णुपदं दुर्लभम् इति प्रोक्तम् ।विष्णुपद को दुर्लभ कहा गया है।
(ख) कस्य आदिः अन्तः च ‘न’ अस्ति ?नयनम् इति पदस्य आदिः अन्तः च ‘न’ अस्ति ।‘नयनम्’ शब्द का आदि और अन्त ‘न’ है।
(ग) नरः काश्यां किम् इच्छति ?नरः काश्यां मृत्युम् इच्छति ।मनुष्य काशी में मृत्यु चाहता है।
(घ) कुलालस्य गृहे अर्धं किम् अस्ति ?कुलालस्य गृहे ‘कुम्भः’ अस्ति ।कुम्हार के घर में (कुम्भकर्ण का आधा भाग) ‘कुम्भ’ है।
पूर्णवाक्येन उत्तर लिखने की विधि: प्रश्न में जो प्रश्नवाचक पद है (कथम्, कस्य, किम्) उसे हटाकर वहीं उत्तर-पद रख दीजिए, शेष वाक्य ज्यों-का-त्यों रहने दीजिए। जैसे — ‘नरः काश्यां किम् इच्छति ?’ → ‘नरः काश्यां मृत्युम् इच्छति ।’ इससे विभक्ति और वचन अपने आप ठीक बैठ जाते हैं।
Tip: (ख) में ‘कस्य’ का उत्तर देते समय ‘नयनम् इति पदस्य’ लिखिए — ‘इति’ लगाने से स्पष्ट हो जाता है कि हम आँख की नहीं, शब्द की बात कर रहे हैं।
प्र3.
अधोलिखितानि शब्दरूपाणि पठन्तु अवगच्छन्तु स्मरन्तु च — (षष्ठी-विभक्त्यन्तानि रूपाणि : अकारान्त-पुंलिङ्गम्, आकारान्त-स्त्रीलिङ्गम्, ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गम्, अकारान्त-नपुंसकलिङ्गम् तथा सर्वनामपदानि) ।
उत्तर

यह तालिका पृष्ठ 115 पर आरम्भ होकर पृष्ठ 116 पर पूरी होती है। पूरी तालिका नीचे एक साथ है — इसे केवल पढ़िए नहीं, ज़ोर से बोलकर याद कीजिए।

लिङ्गम्शब्दःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
अकारान्त-
पुंलिङ्गम्
छात्रःछात्रस्यछात्रयोःछात्राणाम्
विद्यालयःविद्यालयस्यविद्यालययोःविद्यालयानाम्
सुतःसुतस्यसुतयोःसुतानाम्
रामःरामस्यरामयोःरामाणाम्
आकारान्त-
स्त्रीलिङ्गम्
सीतासीतायाःसीतयोःसीतानाम्
कथाकथायाःकथयोःकथानाम्
प्रियाप्रियायाःप्रिययोःप्रियाणाम्
ईकारान्त-
स्त्रीलिङ्गम्
नदीनद्याःनद्योःनदीनाम्
देवीदेव्याःदेव्योःदेवीनाम्
अकारान्त-
नपुंसकलिङ्गम्
पुस्तकम्पुस्तकस्यपुस्तकयोःपुस्तकानाम्
उद्यानम्उद्यानस्यउद्यानयोःउद्यानानाम्
फलम्फलस्यफलयोःफलानाम्
भोजनम्भोजनस्यभोजनयोःभोजनानाम्
सर्वनामपदानिअहम् (अस्मद्)ममआवयोःअस्माकम्
त्वम् (युष्मद्)तवयुवयोःयुष्माकम्
तत् (पुंलिङ्गम्)तस्यतयोःतेषाम्
तत् (स्त्रीलिङ्गम्)तस्याःतयोःतासाम्
तत् (नपुंसकलिङ्गम्)तस्यतयोःतेषाम्
एतत् (पुंलिङ्गम्)एतस्यएतयोःएतेषाम्
एतत् (स्त्रीलिङ्गम्)एतस्याःएतयोःएतासाम्
एतत् (नपुंसकलिङ्गम्)एतस्यएतयोःएतेषाम्
तालिका में जो चार बातें छिपी हैं:
  • पुंलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग के षष्ठी-रूप बिलकुल एक जैसे हैं — स्य / योः / आनाम् (छात्रस्य ~ पुस्तकस्य)। केवल प्रथमा में भेद दिखता है।
  • बहुवचन में ‘न’ के पहले ‘ण’ कब बनता है — यदि शब्द में पहले ‘र’ या ‘ऋ’ आ चुका हो : छात्ाणाम्, रामाणाम्, प्रियाणाम् — पर सुतानाम्, कथानाम् (यहाँ ‘र’ नहीं है)।
  • आकारान्त और ईकारान्त का भेद — सीता → सीतायाः, पर नदी → नद्याः (‘ई’ ‘य्’ बन गई)।
  • सर्वनाम में ‘मम’ और ‘तव’ ही षष्ठी हैं — ये ‘मेरा’ और ‘तुम्हारा’ के अर्थ में हैं, इसलिए इनमें ‘-स्य’ नहीं लगता।
ध्यान दें: पुस्तक की मुद्रित तालिका में विद्यालययोः (द्विवचन) तथा प्रियायाः / प्रिययोः इसी रूप में छपे हैं — नियम भी यही कहता है, अतः इन्हें ऐसे ही स्मरण कीजिए।
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