दीपकम् अध्याय 11 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु — यथा – विद्यालयः, छात्रः → ‘विद्यालयस्य’ ‘छात्रः’ गच्छति । (क) द्विचक्रिका, चक्रम् — ......... ......... भ्रमति । (ख) वृक्षः, फलम् — ......... ......... खादति । (ग) छात्रा, नाम — ......... ......... पृच्छति । (घ) रामः, पुस्तकम् — ......... ......... आनयति । (ङ) मन्दिरम्, शिखरम् — ......... ......... पश्यति ।
उत्तर

हर पंक्ति में पहला शब्द षष्ठी में बदलना है, दूसरा शब्द ज्यों-का-त्यों रहेगा।

क्रमःप्रदत्तौ शब्दौपूर्णं वाक्यम्हिन्दी
यथाविद्यालयः, छात्रःविद्यालयस्य छात्रः गच्छति ।विद्यालय का छात्र जाता है।
(क)द्विचक्रिका, चक्रम्द्विचक्रिकायाः चक्रं भ्रमति ।साइकिल का पहिया घूमता है।
(ख)वृक्षः, फलम्वृक्षस्य फलं खादति ।(वह) पेड़ का फल खाता है।
(ग)छात्रा, नामछात्रायाः नाम पृच्छति ।(वह) छात्रा का नाम पूछता है।
(घ)रामः, पुस्तकम्रामस्य पुस्तकम् आनयति ।(वह) राम की पुस्तक लाता है।
(ङ)मन्दिरम्, शिखरम्मन्दिरस्य शिखरं पश्यति ।(वह) मन्दिर का शिखर देखता है।
कौन-सा रूप कहाँ से आया:
  • द्विचक्रिका — आकारान्त स्त्रीलिङ्ग → द्विचक्रिकायाः
  • वृक्षः, रामः, मन्दिरम्, विद्यालयः — अकारान्त → -स्य (वृक्षस्य, रामस्य, मन्दिरस्य)
  • छात्रा — आकारान्त स्त्रीलिङ्ग → छात्रायाः (छात्रस्य नहीं! ‘छात्रः’ का षष्ठी ‘छात्रस्य’, पर ‘छात्रा’ का ‘छात्रायाः’)
सब रूप षष्ठी विभक्ति, एकवचन में हैं।
एक बारीक बात: उदाहरण-वाक्य में ‘छात्रः’ स्वयं कर्ता है (छात्र जाता है)। पर (ख), (ग), (घ), (ङ) में कर्ता वाक्य में लिखा नहीं है — वहाँ ‘सः’ (वह) अध्याहृत है और ‘फलम्, नाम, पुस्तकम्, शिखरम्’ कर्म हैं। चाहें तो कर्ता जोड़कर पूरा वाक्य भी लिख सकते हैं — ‘बालकः वृक्षस्य फलं खादति ।’ (क) में ‘चक्रम्’ ही कर्ता है, इसलिए वहाँ कुछ जोड़ने की आवश्यकता नहीं।
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