प्र1.
उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु — यथा – विद्यालयः, छात्रः → ‘विद्यालयस्य’ ‘छात्रः’ गच्छति । (क) द्विचक्रिका, चक्रम् — ......... ......... भ्रमति । (ख) वृक्षः, फलम् — ......... ......... खादति । (ग) छात्रा, नाम — ......... ......... पृच्छति । (घ) रामः, पुस्तकम् — ......... ......... आनयति । (ङ) मन्दिरम्, शिखरम् — ......... ......... पश्यति ।
उत्तर
हर पंक्ति में पहला शब्द षष्ठी में बदलना है, दूसरा शब्द ज्यों-का-त्यों रहेगा।
| क्रमः | प्रदत्तौ शब्दौ | पूर्णं वाक्यम् | हिन्दी |
|---|---|---|---|
| यथा | विद्यालयः, छात्रः | विद्यालयस्य छात्रः गच्छति । | विद्यालय का छात्र जाता है। |
| (क) | द्विचक्रिका, चक्रम् | द्विचक्रिकायाः चक्रं भ्रमति । | साइकिल का पहिया घूमता है। |
| (ख) | वृक्षः, फलम् | वृक्षस्य फलं खादति । | (वह) पेड़ का फल खाता है। |
| (ग) | छात्रा, नाम | छात्रायाः नाम पृच्छति । | (वह) छात्रा का नाम पूछता है। |
| (घ) | रामः, पुस्तकम् | रामस्य पुस्तकम् आनयति । | (वह) राम की पुस्तक लाता है। |
| (ङ) | मन्दिरम्, शिखरम् | मन्दिरस्य शिखरं पश्यति । | (वह) मन्दिर का शिखर देखता है। |
कौन-सा रूप कहाँ से आया:
- द्विचक्रिका — आकारान्त स्त्रीलिङ्ग → द्विचक्रिकायाः
- वृक्षः, रामः, मन्दिरम्, विद्यालयः — अकारान्त → -स्य (वृक्षस्य, रामस्य, मन्दिरस्य)
- छात्रा — आकारान्त स्त्रीलिङ्ग → छात्रायाः (छात्रस्य नहीं! ‘छात्रः’ का षष्ठी ‘छात्रस्य’, पर ‘छात्रा’ का ‘छात्रायाः’)
एक बारीक बात: उदाहरण-वाक्य में ‘छात्रः’ स्वयं कर्ता है (छात्र जाता है)। पर (ख), (ग), (घ), (ङ) में कर्ता वाक्य में लिखा नहीं है — वहाँ ‘सः’ (वह) अध्याहृत है और ‘फलम्, नाम, पुस्तकम्, शिखरम्’ कर्म हैं। चाहें तो कर्ता जोड़कर पूरा वाक्य भी लिख सकते हैं — ‘बालकः वृक्षस्य फलं खादति ।’ (क) में ‘चक्रम्’ ही कर्ता है, इसलिए वहाँ कुछ जोड़ने की आवश्यकता नहीं।