प्र1.
किमिच्छति नरः काश्यां भूपानां को रणे हितः । को वन्द्यः सर्वदेवानां दीयतामेकमुत्तरम् ॥ ४ ॥ — विवरणम् – मनुष्यः काश्यां किम् इच्छति ? (......) । युद्धे महाराजानां कः हितः ? (......) । कः सर्वदेवानां वन्दनीयः ? एकपदेन उत्तरं ददातु – (......) ।
उत्तर
तीन प्रश्न, पर उत्तर माँगा गया है एक ही — मृत्युञ्जयः।
काश्यां नरः इच्छति → मृत्युम्
रणे भूपानां हितः → जयः
मृत्युम् + जयः = मृत्युञ्जयः (शिवः) → सर्वदेवानां वन्द्यः
रणे भूपानां हितः → जयः
मृत्युम् + जयः = मृत्युञ्जयः (शिवः) → सर्वदेवानां वन्द्यः
| विवरणम् (प्रश्नः) | उत्तरम् | हिन्दी |
|---|---|---|
| मनुष्यः काश्यां किम् इच्छति ? | मृत्युम् | काशी में मनुष्य मृत्यु चाहता है। |
| युद्धे महाराजानां कः हितः ? | जयः | युद्ध में राजाओं का हित विजय में है। |
| कः सर्वदेवानां वन्दनीयः ? (एकपदेन) | मृत्युञ्जयः | सब देवताओं के वन्दनीय मृत्युञ्जय (शिव) हैं। |
अन्वयः तथा अर्थः: अन्वय — नरः काश्यां किम् इच्छति ? रणे भूपानां कः हितः ? सर्वदेवानां कः वन्द्यः ? एकम् उत्तरं दीयताम् ।
अर्थ — काशी में मनुष्य क्या चाहता है? युद्ध में राजाओं का हितकारी क्या है? सब देवताओं के वन्दनीय कौन हैं? — इन तीनों का एक ही उत्तर दीजिए।
भाव — पहले दो उत्तर (मृत्युम्, जयः) जोड़ते ही तीसरा उत्तर बन जाता है — मृत्युञ्जयः, अर्थात् जिसने मृत्यु को जीत लिया — भगवान् शिव। ‘दीयताम् एकम् उत्तरम्’ का यही रहस्य है। परम्परा में काशी को मोक्षदायिनी माना गया है, इसीलिए वहाँ मनुष्य मृत्यु से डरता नहीं।
अर्थ — काशी में मनुष्य क्या चाहता है? युद्ध में राजाओं का हितकारी क्या है? सब देवताओं के वन्दनीय कौन हैं? — इन तीनों का एक ही उत्तर दीजिए।
भाव — पहले दो उत्तर (मृत्युम्, जयः) जोड़ते ही तीसरा उत्तर बन जाता है — मृत्युञ्जयः, अर्थात् जिसने मृत्यु को जीत लिया — भगवान् शिव। ‘दीयताम् एकम् उत्तरम्’ का यही रहस्य है। परम्परा में काशी को मोक्षदायिनी माना गया है, इसीलिए वहाँ मनुष्य मृत्यु से डरता नहीं।
सन्धि-सङ्केत: मृत्युम् + जयः = मृत्युञ्जयः — यहाँ अनुस्वार ‘म्’ आगे आने वाले ‘ज’ के वर्ग का अनुनासिक ‘ञ्’ बन गया (परसवर्ण-सन्धि)। इसी नियम से ‘सम् + चयः = सञ्चयः’ बनता है। पुस्तक की उत्तर-पेटिका इसीलिए ‘मृत्युम् / जयः’ अलग-अलग छापती है — जोड़ना विद्यार्थी को है।