दीपकम् अध्याय 11 एकादशः पाठः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किमिच्छति नरः काश्यां भूपानां को रणे हितः । को वन्द्यः सर्वदेवानां दीयतामेकमुत्तरम् ॥ ४ ॥ — विवरणम् – मनुष्यः काश्यां किम् इच्छति ? (......) । युद्धे महाराजानां कः हितः ? (......) । कः सर्वदेवानां वन्दनीयः ? एकपदेन उत्तरं ददातु – (......) ।
उत्तर

तीन प्रश्न, पर उत्तर माँगा गया है एक हीमृत्युञ्जयः

काश्यां नरः इच्छति → मृत्युम्
रणे भूपानां हितः → जयः
मृत्युम् + जयः = मृत्युञ्जयः (शिवः) → सर्वदेवानां वन्द्यः
विवरणम् (प्रश्नः)उत्तरम्हिन्दी
मनुष्यः काश्यां किम् इच्छति ?मृत्युम्काशी में मनुष्य मृत्यु चाहता है।
युद्धे महाराजानां कः हितः ?जयःयुद्ध में राजाओं का हित विजय में है।
कः सर्वदेवानां वन्दनीयः ? (एकपदेन)मृत्युञ्जयःसब देवताओं के वन्दनीय मृत्युञ्जय (शिव) हैं।
अन्वयः तथा अर्थः: अन्वय — नरः काश्यां किम् इच्छति ? रणे भूपानां कः हितः ? सर्वदेवानां कः वन्द्यः ? एकम् उत्तरं दीयताम् ।
अर्थ — काशी में मनुष्य क्या चाहता है? युद्ध में राजाओं का हितकारी क्या है? सब देवताओं के वन्दनीय कौन हैं? — इन तीनों का एक ही उत्तर दीजिए।
भाव — पहले दो उत्तर (मृत्युम्, जयः) जोड़ते ही तीसरा उत्तर बन जाता है — मृत्युञ्जयः, अर्थात् जिसने मृत्यु को जीत लिया — भगवान् शिव। ‘दीयताम् एकम् उत्तरम्’ का यही रहस्य है। परम्परा में काशी को मोक्षदायिनी माना गया है, इसीलिए वहाँ मनुष्य मृत्यु से डरता नहीं।
सन्धि-सङ्केत: मृत्युम् + जयः = मृत्युञ्जयः — यहाँ अनुस्वार ‘म्’ आगे आने वाले ‘ज’ के वर्ग का अनुनासिक ‘ञ्’ बन गया (परसवर्ण-सन्धि)। इसी नियम से ‘सम् + चयः = सञ्चयः’ बनता है। पुस्तक की उत्तर-पेटिका इसीलिए ‘मृत्युम् / जयः’ अलग-अलग छापती है — जोड़ना विद्यार्थी को है।
प्र2.
कुलालस्य गृहे ह्यर्धं तदर्धं हस्तिनापुरे । द्वयं मिलित्वा लङ्कायां यो जानाति स पण्डितः ॥ ५ ॥ — विवरणम् – कुम्भकारस्य गृहे तस्य अर्धं किम् अस्ति ? (......) । हस्तिनापुरे तस्य अपरम् अर्धम् किम् अस्ति ? (......) । द्वयं मिलित्वा पूर्णरूपं लङ्कायां किम् अस्ति ? (......) उत्तरं यः जानाति सः पण्डितः ।
उत्तर

उत्तर है — कुम्भकर्णः। एक ही नाम के दो आधे भाग तीन अलग-अलग जगहों पर रखे गए हैं।

कुलालस्य (कुम्हार के) गृहे → कुम्भः (घड़ा)
हस्तिनापुरे → कर्णः (महाभारत का दानवीर कर्ण)
कुम्भः + कर्णः = कुम्भकर्णः → लङ्कायाम् (रावण का भाई)
विवरणम् (प्रश्नः)उत्तरम्हिन्दी
कुम्भकारस्य गृहे तस्य अर्धं किम् अस्ति ?कुम्भःकुम्हार के घर में उसका आधा भाग ‘कुम्भ’ (घड़ा) है।
हस्तिनापुरे तस्य अपरम् अर्धं किम् अस्ति ?कर्णःहस्तिनापुर में उसका दूसरा आधा भाग ‘कर्ण’ है।
द्वयं मिलित्वा पूर्णरूपं लङ्कायां किम् अस्ति ?कुम्भकर्णःदोनों मिलकर लङ्का में ‘कुम्भकर्ण’ बनता है।
अन्वयः तथा अर्थः: अन्वय — कुलालस्य गृहे हि (तस्य) अर्धम् (अस्ति), तदर्धं हस्तिनापुरे (अस्ति); द्वयं मिलित्वा लङ्कायाम् (अस्ति) — (तत्) यः जानाति सः पण्डितः ।
अर्थ — उसका एक आधा भाग कुम्हार के घर में है, दूसरा आधा हस्तिनापुर में है; दोनों मिलकर लङ्का में हैं — जो यह जान ले वही पण्डित है।
भाव — यह पद-विभाजन की प्रहेलिका है। उत्तर एक व्यक्ति का नाम है, पर उसे तीन प्रसिद्ध सन्दर्भों — कुम्हार का घर, महाभारत का हस्तिनापुर और रामायण की लङ्का — में तोड़कर बिखेर दिया गया है। बुद्धि तभी उत्तर पकड़ती है जब वह तीनों सन्दर्भों को एक साथ जोड़ना जानती हो।
सन्धि खोलिए: ‘ह्यर्धम्’ = हि + अर्धम् (यण् सन्धि — इ → य्)। ‘तदर्धम्’ = तत् + अर्धम्। ‘मिलित्वा’ में क्त्वा प्रत्यय है — ‘मिलकर’।
प्र3.
प्रहेलिकानाम् उत्तराणि — पाठे प्रदत्तायाः उत्तर-पेटिकायाः आधारेण पञ्चानां प्रहेलिकानाम् उत्तराणि क्रमेण लिखन्तु ।
उत्तर

पुस्तक ने पृष्ठ 113 पर हरी पेटिका में पाँचों उत्तर स्वयं छाप दिए हैं। उन्हें व्याख्या के साथ यहाँ रखा गया है।

प्रहेलिकापुस्तकस्य उत्तरम्पूर्णम् उत्तरम्कथम् ?
१.तक्रं / शक्रस्य / दुर्लभम्तीन पृथक् उत्तरतीनों उत्तर श्लोक के चौथे चरण में ही हैं।
२.नयनम्नयनम्-य- — आदि और अन्त में ‘न’, मध्य में ‘य’।
३.अनानसःअनानसःकारादि, कारान्त; फल के ऊपर फिर पत्तों का ‘वृक्ष’।
४.मृत्युम् / जयःमृत्युञ्जयः (शिवः)दोनों आधे उत्तर जोड़ने पर ‘एकम् उत्तरम्’ बनता है।
५.कुम्भः / कर्णःकुम्भकर्णःकुम्हार का घड़ा + हस्तिनापुर का कर्ण = लङ्का का कुम्भकर्ण।
ध्यान रखिए: पेटिका में ४ और ५ के उत्तर टुकड़ों में दिए हैं (मृत्युम् / जयः, कुम्भः / कर्णः)। परीक्षा में यदि पूछा जाए ‘सर्वदेवानां वन्द्यः कः ?’ तो उत्तर मृत्युञ्जयः लिखिए, केवल ‘मृत्युम्’ नहीं — क्योंकि श्लोक स्वयं ‘दीयताम् एकम् उत्तरम्’ कहता है।
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