प्र1.
अधः प्रदत्तेन पदेन सह सङ्ख्यां योजयन्तु — ‘अ’ स्तम्भः : (क) पञ्च (ख) एकम् (ग) अष्ट (घ) विंशतिः (ङ) त्रयोदश । ‘ब’ स्तम्भः : २०, १३, ५, १, ८ ।
उत्तर
‘अ’ में संख्यापद हैं, ‘ब’ में अङ्क। सही जोड़ियाँ —
| क्रमः | ‘अ’ (संख्यापदम्) | → | ‘ब’ (अङ्कः) | हिन्दी |
|---|---|---|---|---|
| (क) | पञ्च | — | ५ | पाँच |
| (ख) | एकम् | — | १ | एक |
| (ग) | अष्ट | — | ८ | आठ |
| (घ) | विंशतिः | — | २० | बीस |
| (ङ) | त्रयोदश | — | १३ | तेरह |
दो पदों में भ्रम हो सकता है — उन्हें तोड़कर देखिए: त्रयोदश = त्रि + दश, यानी तीन और दस = १३ (न कि ३०)। और विंशतिः स्वयं एक दहाई का पद है = २०; इसका ‘वि’ देखकर इसे २ मत समझिए। तीस के लिए अलग पद है — त्रिंशत्।
Check it yourself: जोड़ी मिलाने के बाद ‘ब’ स्तम्भ के सब अङ्क एक-एक बार ही उपयोग हुए हैं या नहीं, यह गिन लीजिए। यहाँ पाँच पद और पाँच अङ्क हैं — कोई बचना नहीं चाहिए, कोई दोहराना नहीं चाहिए।