दीपकम् अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का नाम ही उसका दावा है — ‘संख्यागणना ननु सरला’ = ‘गिनती तो सचमुच सरल है’। ‘ननु’ यहाँ निश्चय का अव्यय है (= सचमुच, निःसन्देह)। पूरा पाठ यही सिद्ध करता है कि संस्कृत में गिनना कठिन नहीं — बस हर संख्या को किसी जानी-पहचानी वस्तु से बाँध दीजिए। छह पद्यों का संख्यागीत, एक से दस तक। डॉ. जनार्दनहेगडे रचित इस गीत में क्रम से — एकः सूर्यः → द्वे नयने → त्रिनयनमूर्तिः (शिवः) → चतुर्मुखः (ब्रह्मा) → पञ्च अङ्गुलयः → षण्मुखदेवः (कार्तिकेयः) → सप्त वासराः/स्वराः/लोकाः/ऋषयः → अष्ट दिग्गजाः → नव ग्रहाः → दश दिशः आते हैं। संख्या याद नहीं करनी पड़ती, चित्र याद रह जाता है। पाठ में संख्यावाचक शब्द लिङ्ग के अनुसार बदलते हैं। एक, दो, तीन, चार तक ही यह भेद दिखता है — एकः सूर्यः (पुं.), एकम् ब्रह्म (नपुं.), द्वे नयने (नपुं. द्विवचन), त्रीणि वचनानि, चत्वारि युगानि। पाँच से आगे (पञ्च, षट्, सप्त …) रूप तीनों लिङ्
अभ्यास
- पञ्चमः पाठः
- संख्यागीतम् (पद्यांशाः)
- संख्यागीतम् (शेषपद्यांशौ) तथा दश दिशाः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- वयं संख्यां गणयामः (१ – ५०)
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तरः
- कार्यकलापः
- परियोजनाकार्यम्