दीपकम् अध्याय 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का नाम ही पहला वाक्य है — ‘अहं प्रातः उत्तिष्ठामि’ = ‘मैं सुबह उठता/उठती हूँ’। पूरा पाठ उत्तमपुरुष एकवचन में कहा गया है — करोमि, पिबामि, नमामि, गच्छामि — इसलिए विद्यार्थी इसे ज्यों-का-त्यों अपनी दिनचर्या बताने में काम ले सकता है। समय बताने का साँचा एक ही है — ‘संख्या + वादनम्’। पञ्चवादनम् = ५:००, षड्वादनम् = ६:००, अष्टवादनम् = ८:००। और समय पर कहना हो तो सप्तमी विभक्ति — पञ्चवादने (पाँच बजे)। तीन उपसर्ग-जैसे शब्द सारा खेल पलट देते हैं — सपाद (स + पाद = सवा, +१५ मिनट), सार्ध (स + अर्ध = साढ़े, +३० मिनट) और पादोन (पाद + ऊन = पौने, −१५ मिनट)। इसीलिए पादोन-सप्तवादनम् ७:४५ नहीं, ६:४५ होता है। दिनचर्या ५:०० से ८:०० तक बारह चरणों में चलती है — उठना, भूमिवन्दन, माता-पिता को नमन, उषःपान, शौच-दन्तधावन, सूर्यनमस्कार-योगासन, स्वाध्याय, परिसर-स्वच्छता, स्नान, प्रार्थना-गीतापाठ, चरणवन्दन, प्रातराश और
अभ्यास
- षष्ठः पाठः
- अहं प्रातः उत्तिष्ठामि (चित्रपाठः)
- संख्या तथा ‘इदानीं कः समयः ?’
- पादोन-वादनम् तथा वयं शब्दार्थान् जानीमः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्