दीपकम् अध्याय 6 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरणानुगुणं प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु — यथा – सः सार्ध-सप्तवादने अध्ययनं करोति । – सः कदा अध्ययनं करोति ? (क) सा सपाद-नववादने विद्यालयं गच्छति । (ख) सतीशः सार्ध-द्वादशवादने भोजनं करोति । (ग) यानं पञ्चवादने आगच्छति । (घ) गोपालः षड्वादने गोदोहनं करोति । (ङ) माता दशवादने कार्यालयं गच्छति ।
उत्तर

उदाहरण देखिए — समय वाला पद हटाकर उसकी जगह ‘कदा’ रख दिया गया है, और वाक्य के अन्त में प्रश्नचिह्न। बाक़ी वाक्य ज्यों-का-त्यों रहता है।

क्रमःवाक्यम्प्रश्नःहिन्दी
यथासः सार्ध-सप्तवादने अध्ययनं करोति ।सः कदा अध्ययनं करोति ?वह कब पढ़ाई करता है ?
(क)सा सपाद-नववादने विद्यालयं गच्छति ।सा कदा विद्यालयं गच्छति ?वह (लड़की) कब विद्यालय जाती है ?
(ख)सतीशः सार्ध-द्वादशवादने भोजनं करोति ।सतीशः कदा भोजनं करोति ?सतीश कब भोजन करता है ?
(ग)यानं पञ्चवादने आगच्छति ।यानं कदा आगच्छति ?वाहन कब आता है ?
(घ)गोपालः षड्वादने गोदोहनं करोति ।गोपालः कदा गोदोहनं करोति ?गोपाल कब गाय दुहता है ?
(ङ)माता दशवादने कार्यालयं गच्छति ।माता कदा कार्यालयं गच्छति ?माता कब कार्यालय जाती है ?

व्याकरण-विवेचनम् (संस्कृतम्): ‘कदा’ इति कालवाचकम् अव्ययम् — तस्य रूपं कदापि न परिवर्तते, न लिङ्गेन न वचनेन। यस्मिन् पदे सप्तमी विभक्तिः कालसूचिका अस्ति, तस्य एव स्थाने ‘कदा’ स्थाप्यते । कर्ता (सः, सा, सतीशः, यानं, गोपालः, माता) क्रिया च अपरिवर्तिते एव तिष्ठतः ।

यह मत भूलिए कि कर्ता वैसा ही रहेगा: ‘सा सपाद-नववादने…’ का प्रश्न ‘सः कदा…’ नहीं, ‘सा कदा…’ बनेगा — क्योंकि कर्ता स्त्रीलिङ्ग है। इसी तरह ‘यानम्’ नपुंसकलिङ्ग है, अतः क्रिया ‘आगच्छति’ ही रहेगी। प्रश्न बनाते समय केवल एक पद बदलता है — समय वाला।
Tip: यदि प्रश्न स्थान का हो तो ‘कुत्र’, व्यक्ति का हो तो ‘कः/का’, वस्तु का हो तो ‘किम्’, और समय का हो तो ‘कदा’। इस अभ्यास में हर वाक्य में समय दिया है, इसलिए हर उत्तर में कदा ही आएगा।
प्र2.
स्वस्य दिनचर्यां सरलवाक्यैः लिखन्तु — यथा – अहं प्रातः षड्वादने उत्तिष्ठामि ।
उत्तर

यह अपनी बात लिखने वाला प्रश्न है, इसलिए हर विद्यार्थी का उत्तर अलग होगा। पर ढाँचा सबका एक ही रहेगा —

अहम् + (समयः) –वादने + (कार्यम्) + करोमि / गच्छामि / पठामि …

अच्छे उत्तर में ये बातें होनी चाहिए —

  • सब वाक्य उत्तमपुरुष एकवचन में हों — करोमि, गच्छामि, खादामि, पठामि, स्वपिमि।
  • हर वाक्य में समय सप्तमी विभक्ति में हो — षड्वादने, सार्ध-सप्तवादने।
  • समय क्रम से बढ़े — सुबह से रात तक; बीच में ‘ततः, तदनन्तरम्, तत्पश्चात्’ जैसे अव्यय जोड़ें।
  • कम-से-कम दस से बारह छोटे वाक्य हों (पुस्तक में उतनी ही पंक्तियाँ छपी हैं)।

नमूना उत्तर (मम दिनचर्या) —

समयःसंस्कृतवाक्यम्हिन्दी
६:००अहं प्रातः षड्वादने उत्तिष्ठामि । (यथा)मैं सुबह छह बजे उठता/उठती हूँ।
६:१५अहं सपाद-षड्वादने दन्तधावनं मुखप्रक्षालनं च करोमि ।मैं सवा छह बजे दाँत साफ़ करता/करती हूँ और मुँह धोता/धोती हूँ।
६:३०अहं सार्ध-षड्वादने योगासनं करोमि ।मैं साढ़े छह बजे योगासन करता/करती हूँ।
७:००ततः सप्तवादने अहं स्नानं करोमि ।उसके बाद सात बजे मैं स्नान करता/करती हूँ।
७:१५अहं सपाद-सप्तवादने ईश्वरस्य प्रार्थनां करोमि ।मैं सवा सात बजे ईश्वर की प्रार्थना करता/करती हूँ।
७:३०अहं सार्ध-सप्तवादने प्रातराशं करोमि ।मैं साढ़े सात बजे नाश्ता करता/करती हूँ।
८:००तदनन्तरम् अष्टवादने अहं विद्यालयं गच्छामि ।उसके बाद आठ बजे मैं विद्यालय जाता/जाती हूँ।
१२:३०अहं सार्ध-द्वादशवादने मध्याह्नभोजनं करोमि ।मैं साढ़े बारह बजे दोपहर का भोजन करता/करती हूँ।
२:३०अहं सार्ध-द्विवादने गृहम् आगच्छामि ।मैं ढाई बजे घर लौटता/लौटती हूँ।
४:००अहं चतुर्वादने क्रीडाङ्गणे क्रीडामि ।मैं चार बजे खेल के मैदान में खेलता/खेलती हूँ।
६:००अहं षड्वादने गृहकार्यं करोमि, पाठान् च पठामि ।मैं छह बजे गृहकार्य करता/करती हूँ और पाठ पढ़ता/पढ़ती हूँ।
८:३०अहं सार्ध-अष्टवादने रात्रिभोजनं करोमि ।मैं साढ़े आठ बजे रात का भोजन करता/करती हूँ।
१०:००तत्पश्चात् दशवादने अहं शयनं करोमि ।उसके बाद दस बजे मैं सो जाता/जाती हूँ।
छात्रा हो तो क्या बदलेगा — कुछ नहीं: ‘अहम्’ और ‘करोमि’ दोनों लिङ्ग-निरपेक्ष हैं, इसलिए लड़का-लड़की दोनों के वाक्य एक जैसे रहेंगे। लिङ्ग तभी दिखेगा जब आप कर्ता का नाम या विशेषण लिखें — जैसे ‘अहं छात्रः अस्मि’ / ‘अहं छात्रा अस्मि’।
Check it yourself: लिखने के बाद हर वाक्य में तीन चीज़ें ढूँढ़िए — (१) समय का ‘–वादने’ रूप, (२) कर्म (क्या किया), (३) ‘–मि’ पर ख़त्म होने वाली क्रिया। तीनों मिल जाएँ तो वाक्य शुद्ध है।
प्र3.
वाक्येषु शिष्टाचारपदं योजयन्तु — नियमपालनं, सेवां, मैत्रीभावः, साहाय्यं, सत्कारं, दयाभावः । यथा – युवकः मातापित्रोः सेवां करोति । (क) सा दुर्बलानां ............. करोति । (ख) सर्वेषु प्राणिषु ............. भवतु । (ग) सर्वे छात्राः पाठशालायाः ............. कुर्वन्तु । (घ) वयं सर्वे अतिथीनां ............. कुर्मः । (ङ) परस्परं छात्रेषु ............. भवतु ।
उत्तर

पहले देखिए कि रिक्त स्थान के आगे कौन-सी क्रिया है — करोति/कुर्वन्तु/कुर्मः हो तो कर्म चाहिए (द्वितीया विभक्ति), और भवतु हो तो कर्ता चाहिए (प्रथमा विभक्ति)। इसी से आधा उत्तर अपने-आप निकल आता है।

क्रमःपूर्णवाक्यम्योजितं पदम्हिन्दी
यथायुवकः मातापित्रोः सेवां करोति ।सेवांयुवक माता-पिता की सेवा करता है।
(क)सा दुर्बलानां साहाय्यं करोति ।साहाय्यंवह दुर्बलों की सहायता करती है।
(ख)सर्वेषु प्राणिषु दयाभावः भवतु ।दयाभावःसब प्राणियों पर दया का भाव हो।
(ग)सर्वे छात्राः पाठशालायाः नियमपालनं कुर्वन्तु ।नियमपालनंसब छात्र विद्यालय के नियमों का पालन करें।
(घ)वयं सर्वे अतिथीनां सत्कारं कुर्मः ।सत्कारंहम सब अतिथियों का सत्कार करते हैं।
(ङ)परस्परं छात्रेषु मैत्रीभावः भवतु ।मैत्रीभावःछात्रों में आपस में मित्रता का भाव हो।

व्याकरण-विवेचनम् (संस्कृतम्): साहाय्यं, नियमपालनं, सत्कारम् — एतानि द्वितीया-विभक्तेः एकवचने सन्ति, यतः ‘कृ’-धातोः कर्मपदानि । दयाभावः, मैत्रीभावः — एते प्रथमा-विभक्तेः एकवचने, यतः ‘भवतु’ (लोट्, प्रथमपुरुष एकवचन) इत्यस्य कर्तारौ । ‘दुर्बलानाम्, अतिथीनाम्’ — षष्ठी बहुवचनम् (–आनाम्/–ईनाम्) ।

दो-दो पदों में भ्रम हो सकता है — इस तरह हटाइए: ‘सेवा’ और ‘साहाय्य’ दोनों करने के काम हैं, पर सेवा बड़ों की होती है (मातापित्रोः सेवां — यह उदाहरण में लग चुका), और साहाय्य दुर्बलों का। इसी तरह ‘सत्कार’ अतिथि के लिए ही रूढ़ है (अतिथिसत्कारः), और ‘नियमपालन’ केवल विद्यालय जैसी संस्था के साथ बैठता है।
Tip: पट्टिका में छह पद हैं और रिक्त स्थान पाँच — छठा पद ‘सेवां’ उदाहरण वाले वाक्य में पहले ही लग चुका है। इसलिए किसी पद को दोबारा मत लगाइए।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ