कक्षा ६ संस्कृत अध्याय 7 शूराः वयं धीराः वयम् के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ का नाम ही उसका मुख्य वाक्य है — ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ = ‘हम शूर हैं, हम धीर हैं’। पूरा गीत उत्तमपुरुष बहुवचन में है — वयम् (हम), स्मः (हैं), यामः (जाते हैं), कुर्मः (करते हैं) — इसलिए यह पाठ मिलकर, सामूहिक स्वर में गाने के लिए बना है। गीत में पाँच श्लोक हैं और हर श्लोक के बाद टेक है — ‘शूरा वयम्॥’। श्लोक १ गुण गिनाता है, श्लोक २ स्वभाव, श्लोक ३ बताता है कि हृदय में क्या नहीं है, श्लोक ४ संकल्प है और श्लोक ५ ईश्वर से प्रार्थना। गीत में विसर्ग बार-बार लुप्त दिखता है — ‘शूराः’ का ‘शूरा’, ‘निखिलाः’ का ‘निखिला’, ‘गतभीतयः’ का ‘गतभीतयो’। यह छन्द और गायन के कारण होता है; व्याकरण की दृष्टि से सब प्रथमा विभक्ति बहुवचन ही हैं। अवधेयांशः दो नई बातें सिखाता है — नामपद का मूलरूप प्रातिपदिकम् कहलाता है (‘रामः’ का प्रातिपदिक ‘राम’), और तद्, एतद्, अस्मद्, युष्मद् के प्रथमा-रूप। अस्मद् और युष्मद् के रू

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शब्दःअर्थः (संस्कृते)हिन्दीगीते प्रयोगः
शूराःवीराःपराक्रमीशूरा वयं धीरा वयम्
नितराम् / सुतराम्अत्यधिकम्अत्यधिक रूप सेवीरा वयं सुतराम्
गतलालसाःलोभरहिताःलालच रहितदृढमानसा गतलालसाः
प्रियसाहसाःसाहसयुक्ताःसाहसीप्रियसाहसाः सततम्
नियतम्निश्चितम्निश्चित रूप सेशुभचिन्तका नियतम्
ऊर्जस्वलाःस्फूर्तियुक्ताःफुर्तीलेऊर्जस्वला वर्चस्वला
वर्चस्वलाःतेजोयुक्ताःतेजस्वीऊर्जस्वला वर्चस्वला
अतिनिश्चलाःअविचलिताःदृढ़ निर्णय वालेअतिनिश्चला विजये
गतभीतयःभीतिरहिताःभयरहितगतभीतयो धृतनीतयो
धृतनीतयःनीतिम् आचरन्तःनीतिमान्गतभीतयो धृतनीतयो
निखिलाःसमग्राःसम्पूर्ण, सबदृढशक्तयो निखिला
समराङ्गणम्युद्धक्षेत्रम्युद्ध का मैदानयामो वयं समराङ्गणं
विजयार्थिनःविजयम् इच्छन्तःविजय चाहने वालेविजयार्थिनो बालाः
नः / देहिअस्मान् / यच्छहमें / दीजिएनो देहि परमात्मन्
  1. सप्तमः पाठः
  2. गीतम्
  3. गीतम्
  4. गीतम् (श्लोकः ५) तथा वयं शब्दार्थान् जानीमः
  5. वयं शब्दार्थान् जानीमः (शेषभागः) तथा गीतस्य भावार्थः
  6. अवधेयांशः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  10. योग्यताविस्तरः
  11. परियोजनाकार्यम्
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