दीपकम् अध्याय 7 शूराः वयं धीराः वयम् के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का नाम ही उसका मुख्य वाक्य है — ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ = ‘हम शूर हैं, हम धीर हैं’। पूरा गीत उत्तमपुरुष बहुवचन में है — वयम् (हम), स्मः (हैं), यामः (जाते हैं), कुर्मः (करते हैं) — इसलिए यह पाठ मिलकर, सामूहिक स्वर में गाने के लिए बना है। गीत में पाँच श्लोक हैं और हर श्लोक के बाद टेक है — ‘शूरा वयम्॥’। श्लोक १ गुण गिनाता है, श्लोक २ स्वभाव, श्लोक ३ बताता है कि हृदय में क्या नहीं है, श्लोक ४ संकल्प है और श्लोक ५ ईश्वर से प्रार्थना। गीत में विसर्ग बार-बार लुप्त दिखता है — ‘शूराः’ का ‘शूरा’, ‘निखिलाः’ का ‘निखिला’, ‘गतभीतयः’ का ‘गतभीतयो’। यह छन्द और गायन के कारण होता है; व्याकरण की दृष्टि से सब प्रथमा विभक्ति बहुवचन ही हैं। अवधेयांशः दो नई बातें सिखाता है — नामपद का मूलरूप प्रातिपदिकम् कहलाता है (‘रामः’ का प्रातिपदिक ‘राम’), और तद्, एतद्, अस्मद्, युष्मद् के प्रथमा-रूप। अस्मद् और युष्मद् के रू
अभ्यास
- सप्तमः पाठः
- गीतम्
- गीतम्
- गीतम् (श्लोकः ५) तथा वयं शब्दार्थान् जानीमः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः (शेषभागः) तथा गीतस्य भावार्थः
- अवधेयांशः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्