प्र1.
वयं शब्दार्थान् जानीमः — गतभीतयः, धृतनीतयः, दृढशक्तयः, निखिलाः, यामः, समराङ्गणम्, विजयार्थिनः, सकलेश, परमोज्ज्वलम्, नः, देहि । एतेषां पदानाम् अर्थं संस्कृते हिन्द्यां आङ्ग्लभाषायां च लिखन्तु ।
उत्तर
यह तालिका का दूसरा भाग है — इसमें श्लोक ४ और ५ के शब्द हैं।
| शब्दः | अर्थः | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| गतभीतयः | भीतिरहिताः | भयरहित | Fearless |
| धृतनीतयः | नीतिम् आचरन्तः | नीतिमान् | Righteous |
| दृढशक्तयः | शक्तियुक्ताः | शक्तिमान् | Powerful |
| निखिलाः | समग्राः | सम्पूर्ण | All |
| यामः | गच्छामः | जाते / जाती हैं | (We) are going |
| समराङ्गणम् | युद्धक्षेत्रम् | युद्ध का मैदान | Battlefield |
| विजयार्थिनः | विजयम् इच्छन्तः | विजय चाहने वाले | Those who want victory |
| सकलेश | सर्वेषाम् ईश | सभी के ईश | Supreme God |
| परमोज्ज्वलम् | अत्यन्तं प्रकाशमानम् | परम उज्ज्वल | Extremely bright |
| नः | अस्मान् | हमें | Us |
| देहि | यच्छ | दीजिए | (You) Give |
तीन शब्द जो एक ही साँचे के हैं: गतभीतयः, धृतनीतयः, दृढशक्तयः — तीनों में दूसरा भाग इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द है (भीति, नीति, शक्ति), और तीनों बहुव्रीहि समास हैं, इसलिए तीनों का रूप एक जैसा चलता है — एकवचन गतभीतिः, बहुवचन गतभीतयः। एक साँचा पकड़ लिया तो तीन शब्द अपने-आप याद हो जाते हैं।
Tip: ‘नः’ और ‘देहि’ छोटे शब्द हैं पर बहुत काम के — संस्कृत की अनेक प्रार्थनाओं में ये मिलते हैं, जैसे ‘सह नाववतु’, ‘तेजस्विनावधीतमस्तु’ आदि में ‘नः’ (हमें)।