दीपकम् अध्याय 7 गीतम् (श्लोकः ५) तथा वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जगदीश हे ! परमेश हे ! सकलेश हे ! भगवन् । जयमङ्गलं परमोज्ज्वलं नो देहि परमात्मन् ॥ ५ ॥ शूरा वयम् ॥ — अस्य श्लोकस्य अन्वयं अर्थं भावं च लिखन्तु ।
उत्तर

गीत का अन्तिम श्लोक प्रार्थना है — यहाँ पाँच सम्बोधन एक साथ आते हैं।

अन्वयः — हे जगदीश ! हे परमेश ! हे सकलेश ! हे भगवन् ! हे परमात्मन् ! नः परमोज्ज्वलं जयमङ्गलं देहि ।

पदम्पदच्छेदः / अर्थःहिन्दी
जगदीशजगतः ईशहे जगत् के स्वामी!
परमेशपरमः ईशहे परम ईश्वर!
सकलेशसर्वेषाम् ईशहे सबके ईश!
जयमङ्गलम्जयः च मङ्गलं चविजय और मंगल
परमोज्ज्वलम्परम + उज्ज्वलम् — अत्यन्तं प्रकाशमानम्परम उज्ज्वल
नःअस्मान् / अस्मभ्यम्हमें
देहियच्छदीजिए

हिन्दी अर्थ — हे जगत् के स्वामी! हे परमेश! हे सबके ईश! हे भगवन्! हे परमात्मन्! हमें परम उज्ज्वल विजय और मंगल प्रदान कीजिए।

भावः: चार श्लोक तक गीत अपने बल की बात करता रहा; अन्तिम श्लोक में वही गीत सिर झुका देता है। यही भारतीय परम्परा का ढंग है — पराक्रम अपना, पर विजय का वरदान ईश्वर का। और माँगा भी क्या गया? केवल ‘जय’ नहीं, ‘जयमङ्गलम्’ — ऐसी विजय जिसमें सबका मंगल हो; और वह भी ‘परमोज्ज्वल’, यानी जिसमें कोई कालिख, कोई छल न हो। पृष्ठ 80 का चित्र भी यही दिखाता है — कन्याकुमारी के समुद्र-तट पर विवेकानन्द-शिला के सामने हाथ जोड़े खड़े लोग।
व्याकरण-संकेतः: ‘जगदीश, परमेश, सकलेश, भगवन्, परमात्मन्’ — सर्वाणि सम्बोधन-प्रथमा एकवचनानि (हे …!) । ‘देहि’ इति ‘दा’ धातोः लोट्-लकारे मध्यमपुरुष-एकवचनम् (= दीजिए) । ‘नः’ इति अस्मद्-शब्दस्य संक्षिप्तरूपम् — अस्मान् (द्वितीया) अथवा अस्मभ्यम् (चतुर्थी) इत्यर्थे प्रयुज्यते । ‘जगदीश’ = जगत् + ईश (व्यञ्जनसन्धिः: त् + ई = द् ई) ।
प्र2.
वयं शब्दार्थान् जानीमः — नितराम्, दृढमानसाः, गतलालसाः, प्रियसाहसाः, नियतम्, ऊर्जस्वलाः, वर्चस्वलाः, अतिनिश्चलाः, शूराः । एतेषां पदानाम् अर्थं संस्कृते हिन्द्यां आङ्ग्लभाषायां च लिखन्तु, मातृभाषया अपि अर्थं लिखन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 80 की शब्दार्थ-तालिका ज्यों-की-त्यों नीचे दी गई है। अन्तिम खाना (मातृभाषया अर्थं लिखन्तु) आपको स्वयं भरना है — अपनी मातृभाषा में।

शब्दःअर्थःहिन्दीEnglish
नितराम्सुतराम्अत्यधिक रूप सेAbundantly
दृढमानसाःदृढचित्ताःदृढ़ मन वालेDetermined
गतलालसाःलोभरहिताःलालच रहितWithout greed
प्रियसाहसाःसाहसयुक्ताःसाहसीBrave
नियतम्निश्चितम्निश्चितCertainly / Definitely
ऊर्जस्वलाःस्फूर्तियुक्ताःफुर्तीलेEnergetic
वर्चस्वलाःतेजोयुक्ताःतेजस्वीRadiant
अतिनिश्चलाःअविचलिताःदृढ़ निर्णय वालेDetermined
शूराःवीराःपराक्रमीBrave

नमूना उत्तर (मातृभाषया अर्थः) — यदि आपकी मातृभाषा मराठी है तो — नितराम् = अत्यंत, दृढमानसाः = खंबीर मनाचे, गतलालसाः = लोभरहित, शूराः = शूर। यदि बांग्ला है तो — शूराः = बीर, नियतम् = निश्चितभाबे। अपनी भाषा का ठीक-ठीक शब्द घर के बड़ों से पूछकर लिखिए।

तालिका पढ़ने का ढंग: दूसरा खाना ‘अर्थः’ केवल हिन्दी नहीं, संस्कृत का पर्याय देता है — जैसे ‘गतलालसाः = लोभरहिताः’। इसका लाभ यह है कि आप कठिन शब्द को आसान संस्कृत शब्द से समझते हैं, और आपकी संस्कृत शब्द-सम्पदा दुगुनी हो जाती है।
Try This: ध्यान दीजिए — ‘दृढमानसाः’ और ‘अतिनिश्चलाः’, दोनों का अंग्रेज़ी अर्थ Determined है, पर संस्कृत में भेद है: दृढमानस = मन दृढ़, अतिनिश्चल = निर्णय से डिगे नहीं। संस्कृत के दो शब्दों का ठीक-ठीक भेद पकड़ना ही भाषा सीखना है।
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