यह श्लोक बताता है कि हृदय में क्या नहीं है, और फिर यह कि क्या है।
अन्वयः — (अस्माकं) हृदये धनकामना (नास्ति), सुखवासना (नास्ति), वञ्चना च न (अस्ति) । (वयम्) ऊर्जस्वलाः वर्चस्वलाः विजये च अतिनिश्चलाः (स्मः) ।
| पदम् | अर्थः (संस्कृते) | हिन्दी |
|---|---|---|
| धनकामना | धनस्य अधिका इच्छा | धन की लालसा |
| सुखवासना | सुखस्य विषये वासना | भोग-सुख की चाह |
| वञ्चना | कपटभावना | छल, ठगी |
| ऊर्जस्वलाः | स्फूर्तियुक्ताः | फुर्तीले, ऊर्जा से भरे |
| वर्चस्वलाः | तेजोयुक्ताः | तेजस्वी |
| अतिनिश्चलाः | अविचलिताः | दृढ़ निर्णय वाले, अटल |
हिन्दी अर्थ — हमारे हृदय में न धन की कामना है, न भोग-सुख की वासना, और न किसी को ठगने का भाव। हम ऊर्जा से भरे, तेजस्वी और विजय के प्रति पूरी तरह अटल हैं।