दीपकम् अध्याय 7 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कोष्ठकात् उचितं पदं स्वीकृत्य रिक्तस्थाने लिखन्तु — यथा – तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – सा (एषा/अहम्/सा) । (क) अस्मद्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – ……… (वयम्/त्वम्/अहम्) (ख) युष्मद्, प्रथमा विभक्तिः, द्विवचनम् – ……… (त्वम्/सः/युवाम्) (ग) तद्, पुंलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, बहुवचनम् – ……… (एषः/ते/सा) (घ) एतद्, नपुंसकलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, बहुवचनम् – ……… (एतानि/वयम्/तत्) (ङ) एतद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – ……… (अहम्/एषा/एतत्) (च) तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, द्विवचनम् – ……… (ते/अहम्/एषा)
उत्तर

हर पंक्ति में तीन बातें दी हैं — शब्द, लिङ्ग, वचन। तीनों से मिलने वाला ही रूप सही है। पृष्ठ 82 की तालिकाएँ सामने रखकर मिलाइए।

क्रमःदत्तम्उत्तरम्कारणम्
यथातद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा, एकवचनम्सातद् का स्त्रीलिङ्ग एकवचन
(क)अस्मद्, प्रथमा, एकवचनम्अहम्अस्मद् = अहम्, आवाम्, वयम्
(ख)युष्मद्, प्रथमा, द्विवचनम्युवाम्युष्मद् = त्वम्, युवाम्, यूयम्
(ग)तद्, पुंलिङ्गम्, प्रथमा, बहुवचनम्तेसः – तौ – ते
(घ)एतद्, नपुंसकलिङ्गम्, प्रथमा, बहुवचनम्एतानिएतत् – एते – एतानि
(ङ)एतद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा, एकवचनम्एषाएषा – एते – एताः
(च)तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा, द्विवचनम्तेसा – ते – ताः
(ग) और (च) का उत्तर एक ही — ‘ते’ — पर अर्थ अलग: (ग) में ‘ते’ का अर्थ है वे सब (पुरुष), और (च) में ‘ते’ का अर्थ है वे दोनों (स्त्रियाँ)। संस्कृत में यह ‘रूप-साम्य’ खूब मिलता है; अर्थ वाक्य के बाकी पदों और क्रिया से तय होता है — ‘ते बालकाः गच्छन्ति’ बनाम ‘ते बालिके गच्छतः’।
विकल्प काटने का तरीका: हर पंक्ति में कोष्ठक के तीन विकल्पों में से दो जान-बूझकर ग़लत रखे गए हैं — या तो दूसरा शब्द (अस्मद् की जगह युष्मद्) या दूसरा वचन। पहले शब्द से विकल्प काटिए, फिर वचन से; एक ही बचेगा।
प्र2.
उदाहरणमनुसृत्य उचितेन पदेन रिक्तस्थानं पूरयन्तु — यथा – नायिका नृत्यति । (नृत्) । (क) बालकः ……… (लिख्) (ख) छात्रौ ……… (क्रीड्) (ग) अहम् ……… (गच्छ्) (घ) कविः ……… (रचय्) (ङ) महिलाः ……… (वद्) (च) देवाः ……… (आगच्छ्) (छ) फलानि ……… (पत्) (ज) गृहिण्यः ……… (उपविश्)
उत्तर

कोष्ठक में धातु दी है; कर्ता का वचन देखकर लट्-लकार का ठीक रूप बनाइए।

क्रमःवाक्यम्धातुःकर्तुः वचनम्हिन्दी
यथानायिका नृत्यतिनृत्एकवचनम्नायिका नाचती है।
(क)बालकः लिखतिलिख्एकवचनम्बालक लिखता है।
(ख)छात्रौ क्रीडतःक्रीड्द्विवचनम्दोनों छात्र खेलते हैं।
(ग)अहं गच्छामिगच्छ्उत्तमपुरुष एकवचनम्मैं जाता/जाती हूँ।
(घ)कविः रचयतिरचय्एकवचनम्कवि रचना करता है।
(ङ)महिलाः वदन्तिवद्बहुवचनम्महिलाएँ बोलती हैं।
(च)देवाः आगच्छन्तिआगच्छ्बहुवचनम्देवता आते हैं।
(छ)फलानि पतन्तिपत्बहुवचनम्फल गिरते हैं।
(ज)गृहिण्यः उपविशन्तिउपविश्बहुवचनम्गृहिणियाँ बैठती हैं।
क्रिया कर्ता के लिङ्ग से नहीं, वचन से बदलती है: ‘महिलाः वदन्ति’ और ‘देवाः वदन्ति’ — कर्ता स्त्रीलिङ्ग हो या पुंलिङ्ग, बहुवचन में क्रिया एक ही रहती है — वदन्ति। इसी तरह ‘फलानि पतन्ति’ में कर्ता नपुंसकलिङ्ग है, फिर भी क्रिया वही ‘पतन्ति’। हिन्दी में क्रिया लिङ्ग से बदलती है (गिरता है / गिरती है), संस्कृत में नहीं — यह बड़ा भेद है।
पहचानिए कि कर्ता बहुवचन है: (ङ) महिलाः, (च) देवाः, (ज) गृहिण्यः — तीनों के अन्त में ‘ाः / यः’ है, यानी बहुवचन; (छ) फलानि — नपुंसकलिङ्ग बहुवचन का चिह्न ‘-ानि’। और (ख) ‘छात्रौ’ का ‘औ’ द्विवचन का पक्का संकेत है।
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