प्र1.
कोष्ठकात् उचितं पदं स्वीकृत्य रिक्तस्थाने लिखन्तु — यथा – तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – सा (एषा/अहम्/सा) । (क) अस्मद्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – ……… (वयम्/त्वम्/अहम्) (ख) युष्मद्, प्रथमा विभक्तिः, द्विवचनम् – ……… (त्वम्/सः/युवाम्) (ग) तद्, पुंलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, बहुवचनम् – ……… (एषः/ते/सा) (घ) एतद्, नपुंसकलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, बहुवचनम् – ……… (एतानि/वयम्/तत्) (ङ) एतद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – ……… (अहम्/एषा/एतत्) (च) तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, द्विवचनम् – ……… (ते/अहम्/एषा)
उत्तर
हर पंक्ति में तीन बातें दी हैं — शब्द, लिङ्ग, वचन। तीनों से मिलने वाला ही रूप सही है। पृष्ठ 82 की तालिकाएँ सामने रखकर मिलाइए।
| क्रमः | दत्तम् | उत्तरम् | कारणम् |
|---|---|---|---|
| यथा | तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा, एकवचनम् | सा | तद् का स्त्रीलिङ्ग एकवचन |
| (क) | अस्मद्, प्रथमा, एकवचनम् | अहम् | अस्मद् = अहम्, आवाम्, वयम् |
| (ख) | युष्मद्, प्रथमा, द्विवचनम् | युवाम् | युष्मद् = त्वम्, युवाम्, यूयम् |
| (ग) | तद्, पुंलिङ्गम्, प्रथमा, बहुवचनम् | ते | सः – तौ – ते |
| (घ) | एतद्, नपुंसकलिङ्गम्, प्रथमा, बहुवचनम् | एतानि | एतत् – एते – एतानि |
| (ङ) | एतद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा, एकवचनम् | एषा | एषा – एते – एताः |
| (च) | तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा, द्विवचनम् | ते | सा – ते – ताः |
(ग) और (च) का उत्तर एक ही — ‘ते’ — पर अर्थ अलग: (ग) में ‘ते’ का अर्थ है वे सब (पुरुष), और (च) में ‘ते’ का अर्थ है वे दोनों (स्त्रियाँ)। संस्कृत में यह ‘रूप-साम्य’ खूब मिलता है; अर्थ वाक्य के बाकी पदों और क्रिया से तय होता है — ‘ते बालकाः गच्छन्ति’ बनाम ‘ते बालिके गच्छतः’।
विकल्प काटने का तरीका: हर पंक्ति में कोष्ठक के तीन विकल्पों में से दो जान-बूझकर ग़लत रखे गए हैं — या तो दूसरा शब्द (अस्मद् की जगह युष्मद्) या दूसरा वचन। पहले शब्द से विकल्प काटिए, फिर वचन से; एक ही बचेगा।