दीपकम् अध्याय 6 संख्या तथा ‘इदानीं कः समयः ?’

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
संख्या — १ एकम्, २ द्वे, ३ त्रीणि, ४ चत्वारि, ५ पञ्च, ६ षट्, ७ सप्त, ८ अष्ट, ९ नव, १० दश, ११ एकादश, १२ द्वादश । — एतां संख्यासारणीं पठन्तु, अर्थं च लिखन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 72 के नीले बुलबुलों में एक से बारह तक की संख्याएँ दी हैं। घड़ी पर भी यही बारह अङ्क होते हैं — इसीलिए पाठ ने बारह पर ही सूची रोक दी।

अङ्कःसंस्कृतपदम्हिन्दीवादनरूपम् (‘बजे’)
एकम्एकएकवादनम् (१:००)
द्वेदोद्विवादनम् (२:००)
त्रीणितीनत्रिवादनम् (३:००)
चत्वारिचारचतुर्वादनम् (४:००)
पञ्चपाँचपञ्चवादनम् (५:००)
षट्छहषड्वादनम् (६:००)
सप्तसातसप्तवादनम् (७:००)
अष्टआठअष्टवादनम् (८:००)
नवनौनववादनम् (९:००)
१०दशदसदशवादनम् (१०:००)
११एकादशग्यारहएकादशवादनम् (११:००)
१२द्वादशबारहद्वादशवादनम् (१२:००)
वादन-रूप बनाते समय दो जगह सन्धि होती है: षट् + वादनम् = षड्वादनम् (‘ट्’ का ‘ड्’ — जश्त्व-सन्धि) और चतुर् + वादनम् = चतुर्वादनम्। इसी तरह ‘द्वे’ का वादन-रूप ‘द्वेवादनम्’ नहीं, द्विवादनम् बनता है, और ‘त्रीणि’ का त्रिवादनम् — क्योंकि समास में संख्या का मूल रूप (द्वि, त्रि, चतुर्) लगता है, विभक्ति वाला रूप नहीं।
Tip: ११ और १२ को तोड़कर याद कीजिए — एक + दश = एकादश, द्वि + दश = द्वादश। यही साँचा आगे त्रयोदश (१३), चतुर्दश (१४) तक चलता है।
प्र2.
इदानीं कः समयः ? — चित्रेषु द्वादश घट्यः दत्ताः — पञ्च-वादनम्, षड्-वादनम्, सप्त-वादनम्, अष्ट-वादनम्; सपाद-पञ्चवादनम्, सपाद-षड्वादनम्, सपाद-सप्तवादनम्, सपाद-अष्टवादनम्; सार्ध-पञ्चवादनम्, सार्ध-षड्वादनम्, सार्ध-सप्तवादनम्, सार्ध-अष्टवादनम् । — एतेषां समयम् अङ्कैः लिखन्तु ।
उत्तर

बारहों घड़ियों को तीन पंक्तियों में रखा गया है — पूरा बजा, सवा, और साढ़े। हर पंक्ति में केवल पहला शब्द बदलता है।

पङ्क्तिःसंस्कृतम्अङ्केषुहिन्दी
प्रथमा (पूर्णः)पञ्च-वादनम्५:००पाँच बजे
षड्-वादनम्६:००छह बजे
सप्त-वादनम्७:००सात बजे
अष्ट-वादनम्८:००आठ बजे
द्वितीया (सपाद = +१५)सपाद-पञ्चवादनम्५:१५सवा पाँच
सपाद-षड्वादनम्६:१५सवा छह
सपाद-सप्तवादनम्७:१५सवा सात
सपाद-अष्टवादनम्८:१५सवा आठ
तृतीया (सार्ध = +३०)सार्ध-पञ्चवादनम्५:३०साढ़े पाँच
सार्ध-षड्वादनम्६:३०साढ़े छह
सार्ध-सप्तवादनम्७:३०साढ़े सात
सार्ध-अष्टवादनम्८:३०साढ़े आठ

संस्कृतेन उत्तरम् — ‘इदानीं कः समयः ?’ इति प्रश्नस्य उत्तरं सदा प्रथमाविभक्त्या दीयते — इदानीं सपाद-षड्वादनम् । (हिन्दी: अभी सवा छह बजे हैं।)

घड़ी में हाथ कहाँ देखें: लाल (छोटी) सुई घण्टा बताती है, नीली (बड़ी) सुई मिनट। बड़ी सुई १२ पर हो तो ‘पूरा बजा’ — पञ्चवादनम्। ३ पर हो तो सवा — सपाद। ६ पर हो तो साढ़े — सार्ध। और ९ पर हो तो पौने — पादोन, जिसके चार चित्र अगले पृष्ठ पर हैं।
Tip: ‘इदानीम्’ का पर्याय शब्दार्थ-तालिका में दिया है — सम्प्रति (अभी)। इसलिए वही प्रश्न ऐसे भी पूछा जा सकता है — ‘सम्प्रति कः समयः ?’
प्र3.
‘सपाद’, ‘सार्ध’, ‘पादोन’ — एतेषां पदानाम् अर्थं विवृण्वन्तु, उदाहरणैः च स्पष्टीकुर्वन्तु । (पाठ्य-प्रश्नः)
उत्तर

तीनों शब्द ‘वादनम्’ के आगे लगकर समय को घटा-बढ़ा देते हैं। इनका आधार एक ही है — पाद यानी चौथाई (१५ मिनट) और अर्ध यानी आधा (३० मिनट)।

पदम्पदविच्छेदःअर्थःक्रियाउदाहरणम्
सपादस + पादचौथाई सहित+ १५ निमेषाःसपाद-पञ्चवादनम् = ५:१५
सार्धस + अर्धआधा सहित+ ३० निमेषाःसार्ध-षड्वादनम् = ६:३०
पादोनपाद + ऊनचौथाई कम− १५ निमेषाःपादोन-सप्तवादनम् = ६:४५
सपाद-सप्तवादनम् = ७:०० + ०:१५ = ७:१५
सार्ध-सप्तवादनम् = ७:०० + ०:३० = ७:३०
पादोन-सप्तवादनम् = ७:०० − ०:१५ = ६:४५
सबसे बड़ी चूक यहीं होती है: ‘सपाद’ और ‘सार्ध’ में संख्या वही घण्टा रहती है जो लिखी है, पर ‘पादोन’ में समय एक घण्टा पीछे चला जाता है — क्योंकि वह ‘अगले घण्टे में से कम’ है। ‘ऊन’ शब्द को याद रखिए — ‘न्यून/कम’। उन्नीस को संस्कृत में ‘एकोनविंशतिः’ (बीस में एक कम) कहते हैं — वही ‘ऊन’ यहाँ लगा है।
Check it yourself: कोई भी ‘पादोन-X वादनम्’ मिले तो उत्तर हमेशा (X−1) : ४५ होगा। पादोन-नववादनम् = ८:४५, पादोन-एकादशवादनम् = १०:४५।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ