प्र1.
संख्या — १ एकम्, २ द्वे, ३ त्रीणि, ४ चत्वारि, ५ पञ्च, ६ षट्, ७ सप्त, ८ अष्ट, ९ नव, १० दश, ११ एकादश, १२ द्वादश । — एतां संख्यासारणीं पठन्तु, अर्थं च लिखन्तु ।
उत्तर
पृष्ठ 72 के नीले बुलबुलों में एक से बारह तक की संख्याएँ दी हैं। घड़ी पर भी यही बारह अङ्क होते हैं — इसीलिए पाठ ने बारह पर ही सूची रोक दी।
| अङ्कः | संस्कृतपदम् | हिन्दी | वादनरूपम् (‘बजे’) |
|---|---|---|---|
| १ | एकम् | एक | एकवादनम् (१:००) |
| २ | द्वे | दो | द्विवादनम् (२:००) |
| ३ | त्रीणि | तीन | त्रिवादनम् (३:००) |
| ४ | चत्वारि | चार | चतुर्वादनम् (४:००) |
| ५ | पञ्च | पाँच | पञ्चवादनम् (५:००) |
| ६ | षट् | छह | षड्वादनम् (६:००) |
| ७ | सप्त | सात | सप्तवादनम् (७:००) |
| ८ | अष्ट | आठ | अष्टवादनम् (८:००) |
| ९ | नव | नौ | नववादनम् (९:००) |
| १० | दश | दस | दशवादनम् (१०:००) |
| ११ | एकादश | ग्यारह | एकादशवादनम् (११:००) |
| १२ | द्वादश | बारह | द्वादशवादनम् (१२:००) |
वादन-रूप बनाते समय दो जगह सन्धि होती है: षट् + वादनम् = षड्वादनम् (‘ट्’ का ‘ड्’ — जश्त्व-सन्धि) और चतुर् + वादनम् = चतुर्वादनम्। इसी तरह ‘द्वे’ का वादन-रूप ‘द्वेवादनम्’ नहीं, द्विवादनम् बनता है, और ‘त्रीणि’ का त्रिवादनम् — क्योंकि समास में संख्या का मूल रूप (द्वि, त्रि, चतुर्) लगता है, विभक्ति वाला रूप नहीं।
Tip: ११ और १२ को तोड़कर याद कीजिए — एक + दश = एकादश, द्वि + दश = द्वादश। यही साँचा आगे त्रयोदश (१३), चतुर्दश (१४) तक चलता है।