दीपकम् अध्याय 6 पादोन-वादनम् तथा वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पादोन-षड्वादनम्, पादोन-सप्तवादनम्, पादोन-अष्टवादनम्, पादोन-नववादनम् — एतेषां चतुर्णां घटीचित्राणां समयम् अङ्कैः लिखन्तु ।
उत्तर

चारों घड़ियों में बड़ी सुई ९ पर है — यही ‘पौने’ का चिह्न है।

संस्कृतम्गणनाअङ्केषुहिन्दी
पादोन-षड्वादनम्६:०० − ०:१५५:४५पौने छह
पादोन-सप्तवादनम्७:०० − ०:१५६:४५पौने सात
पादोन-अष्टवादनम्८:०० − ०:१५७:४५पौने आठ
पादोन-नववादनम्९:०० − ०:१५८:४५पौने नौ
पाठ में इसका एक ही प्रयोग है: ‘ततः पादोन-सप्तवादने (६:४५) स्नानं करोमि।’ पाठ ने कोष्ठक में ६:४५ लिखकर स्वयं जाँच का साधन दे दिया है — यदि आपका उत्तर ७:४५ आ रहा हो तो समझिए कि ‘ऊन’ का अर्थ ‘कम’ भूल गए।
Try This: कागज़ पर चार गोल घड़ियाँ बनाइए, चारों में बड़ी सुई ९ पर रखिए और छोटी सुई क्रमशः ५-६, ६-७, ७-८, ८-९ के बीच। नीचे संस्कृत नाम लिखिए — यही परियोजनाकार्य का पहला काम भी है।
प्र2.
वयं शब्दार्थान् जानीमः — दिनचर्याम्, वदामि, प्रतिदिनम्, उत्तिष्ठामि, भूमेः, वन्दनम्, मुखप्रक्षालनम्, तदनन्तरम्, दन्तधावनम्, योगासनम्, स्वाध्यायम्, स्नानम्, श्लोकान्, प्रातराशम्, विद्यालयम्, गच्छामि, इदानीम्, उषःपानम् — एतेषां शब्दानाम् अर्थान् (संस्कृतपर्यायं, हिन्दी, English) लिखन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 73 की पूरी शब्दार्थ-सारणी — पहले संस्कृत पर्याय, फिर हिन्दी, फिर अंग्रेज़ी।

शब्दःअर्थः (संस्कृतपर्यायः)हिन्दीEnglish
दिनचर्याम्दैनन्दिन-कार्यसरणीम्दैनिक कार्यDaily Routine
वदामिकथयामिबोल रहा/रही हूँI speak
प्रतिदिनम्नित्यम्हर दिनDaily
उत्तिष्ठामिजागर्मिजागता/जागती हूँI wake up/get up
भूमेःपृथिव्याःभूमि काOf the earth
वन्दनम्नमनम्अभिवादनSalutation
मुखप्रक्षालनम्मुखधावनम्मुँह धोनाFacewash
तदनन्तरम्ततः परम्उसके पश्चात्After that
दन्तधावनम्दन्तशोधनम्दाँतों का मञ्जनBrushing teeth
योगासनम्योगासनक्रियायोगासनYogasana
स्वाध्यायम्स्व-अध्ययनम्स्वयं अध्ययनSelf-study
स्नानम्शरीरशुद्धिःनहानाBath
श्लोकान्छन्दोबद्धानि पद्यानिश्लोकों कोMetred verses
प्रातराशम्कल्याहारम्अल्पाहारBreakfast
विद्यालयम्पाठशालाम्विद्यालय कोTo the school
गच्छामियामिजाता/जाती हूँI go
इदानीम्सम्प्रतिअभीNow
उषःपानम्प्रातः कवोष्ण-जलस्य पानम्सुबह गुनगुना जल पीनाDrinking warm water in morning
तालिका का आख़िरी खाना खाली क्यों छोड़ा गया है: उसका शीर्षक है ‘मातृभाषया अर्थं लिखन्तु’ — यानी अपनी मातृभाषा में अर्थ लिखिए। हिन्दीभाषी विद्यार्थी के लिए वही अर्थ काम देगा जो ऊपर ‘हिन्दी’ खाने में है; मराठी विद्यार्थी लिखेगा — दिनचर्या = दैनंदिन कार्यक्रम, स्नानम् = आंघोळ; बाङ्ला में — स्नानम् = স্নান, गच्छामि = যাই। NCERT का उद्देश्य यही है कि संस्कृत शब्द अपनी घर की भाषा से जुड़कर याद रहे।
Did you know? इनमें कई शब्द हिन्दी में ज्यों-के-त्यों चलते हैं — दिनचर्या, वन्दन, योगासन, स्वाध्याय, स्नान, श्लोक, विद्यालय। यही कारण है कि संस्कृत का शब्दभण्डार सीखते ही हिन्दी भी मज़बूत हो जाती है।
प्र3.
पाठे आगतानां शब्दानां सन्धिविच्छेदं समासविग्रहं वा कुर्वन्तु — उषःपानम्, कवोष्णम्, मातापितरौ, चरणवन्दनम्, मुखप्रक्षालनम्, दन्तधावनम्, प्रातराशम्, तत्पश्चात् । (पाठ्य-प्रश्नः)
उत्तर

पाठ के लगभग सारे कठिन शब्द जुड़े हुए शब्द हैं। तोड़ते ही अर्थ खुल जाता है।

पदम्विच्छेदः / विग्रहःप्रकारःअर्थः
उषःपानम्उषस् + पानम्विसर्गसन्धिःभोर में जल पीना
कवोष्णम्कु + उष्णम् (‘कु’ इत्यस्य ‘कव्’ आदेशः, ततः अ + उ = ओ)गुणसन्धिःथोड़ा गरम, गुनगुना
मातापितरौमाता च पिता चद्वन्द्वसमासःमाता और पिता (दोनों)
चरणवन्दनम्चरणयोः वन्दनम्तत्पुरुषसमासःचरण छूकर प्रणाम
मुखप्रक्षालनम्मुखस्य प्रक्षालनम्तत्पुरुषसमासःमुँह धोना
दन्तधावनम्दन्तानां धावनम्तत्पुरुषसमासःदाँत साफ़ करना
प्रातराशम्प्रातः + आशम्विसर्गसन्धिःसुबह का भोजन, नाश्ता
तत्पश्चात्तत् + पश्चात्अव्ययपदम्उसके बाद
‘प्रातः’ का विसर्ग बार-बार बदलता है: प्रातः + आशम् में विसर्ग ‘र्’ बन गया — प्रातराशम्। ऐसे ही ‘उषस्’ का ‘स्’ विसर्ग बनकर उषःपानम् हुआ, क्योंकि आगे ‘प’ वर्ग का वर्ण है। नियम सीधा है — विसर्ग के आगे स्वर आए तो प्रायः ‘र्’, और वर्ग-व्यञ्जन आए तो विसर्ग वैसा ही रहता है।
Tip: समास पहचानने का छोटा उपाय — विग्रह करते समय बीच में यदि ‘और’ लगाना पड़े तो द्वन्द्व, और यदि ‘का/की/के’ लगाना पड़े तो तत्पुरुष
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