दीपकम् अध्याय 6 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
स्फोरकपत्रे घटीनां चित्राणि रचयन्तु, तेषु विविधान् रङ्गान् पूरयन्तु, संस्कृतेन समयं च लिखन्तु ।
उत्तर

यह हाथ से करने वाला काम है। करने की विधि —

  1. थर्माकोल (स्फोरकपत्र) की शीट से चार गोल चक्र काटिए — व्यास लगभग १५ सेमी।
  2. हर चक्र पर देवनागरी अङ्कों में १ से १२ तक लिखिए (घड़ी की तरह, १२ ऊपर)।
  3. मोटे कागज़ की दो सुइयाँ बनाइए — छोटी (घण्टा) लाल, बड़ी (मिनट) नीली — और बीच में पिन से जोड़िए ताकि वे घूम सकें।
  4. चारों घड़ियों में सुइयाँ अलग-अलग रखिए और नीचे संस्कृत में समय लिखिए।

नमूना — चार घड़ियाँ और उनके नाम:

घटीबड़ी सुईछोटी सुईसंस्कृतेन लेख्यम्अङ्केषु
१२ पर७ परसप्तवादनम्७:००
३ पर८ – ९ के बीचसपाद-अष्टवादनम्८:१५
६ पर४ – ५ के बीचसार्ध-चतुर्वादनम्४:३०
९ पर५ – ६ के बीचपादोन-षड्वादनम्५:४५
रङ्ग भरते समय एक चतुराई कीजिए: चारों प्रकार को चार अलग रङ्गों से पहचान दीजिए — पूर्ण वादन के लिए हरा, सपाद के लिए पीला, सार्ध के लिए नीला और पादोन के लिए लाल। कक्षा की दीवार पर टाँगने पर पूरा वर्ग एक ही नज़र में चारों साँचे याद कर लेगा।
Tip: नीचे लिखते समय दो पंक्तियाँ रखिए — ऊपर संस्कृत (सपाद-अष्टवादनम्) और नीचे अङ्क (८:१५)। जाँचने वाला दोनों मिलाकर तुरन्त देख लेगा कि समझ सही है या नहीं।
प्र2.
मात्रा / पित्रा सह चर्चां कृत्वा स्वस्याः / स्वस्य दिनचर्यां संस्कृतेन लिखन्तु ।
उत्तर

यह अपने घर से जुड़ा काम है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अपना होगा। करने की विधि —

  1. माता या पिता के साथ बैठकर पूरे दिन की सूची बनाइए — हिन्दी में, समय के साथ।
  2. हर पंक्ति के सामने संस्कृत का समय-रूप लिखिए — ६:१५ → सपाद-षड्वादने।
  3. अब वाक्य बनाइए — अहम् + (समय)वादने + (कार्य) + क्रिया
  4. अन्त में माता-पिता को पढ़कर सुनाइए और उनसे हस्ताक्षर करवाइए — इससे यह सचमुच ‘चर्चा करके लिखा गया’ बनता है।

उपयोगी क्रियापद-कोश (उत्तमपुरुष एकवचन) —

कार्यम्संस्कृतक्रियावाक्य-नमूना
उठनाउत्तिष्ठामिअहं पादोन-षड्वादने उत्तिष्ठामि ।
पढ़नापठामिअहं सप्तवादने संस्कृतं पठामि ।
खानाखादामिअहं सार्ध-सप्तवादने प्रातराशं खादामि ।
लिखनालिखामिअहं सायं गृहकार्यं लिखामि ।
खेलनाक्रीडामिअहं चतुर्वादने मित्रैः सह क्रीडामि ।
सोनास्वपिमिअहं सार्ध-नववादने स्वपिमि ।
सहायता करनासाहाय्यं करोमिअहं मातुः गृहकार्ये साहाय्यं करोमि ।

नमूना उत्तर (संक्षेपेण) — अहं प्रातः पादोन-षड्वादने उत्तिष्ठामि । ततः मातापितरौ नमामि । अहं षड्वादने योगासनं करोमि । सार्ध-षड्वादने अहं स्नानं करोमि । सप्तवादने अहं पाठान् पठामि । सार्ध-सप्तवादने अहं प्रातराशं खादामि । अष्टवादने अहं विद्यालयं गच्छामि । सायं पञ्चवादने अहं क्रीडाङ्गणे क्रीडामि । रात्रौ सार्ध-नववादने अहं स्वपिमि ।

माता-पिता से पूछने को क्यों कहा गया: बच्चा अपनी दिनचर्या का आधा हिस्सा भूल जाता है — कब खाना बना, कब दवा ली, कब सोया। घर के बड़े ही असली समयसारणी जानते हैं। साथ ही यह अभ्यास घर में संस्कृत की बात ले जाता है — पाठ का यही उद्देश्य है।
Tip: दिन के भाग बताने वाले अव्यय याद रखिए — प्रातः (सुबह), मध्याह्ने (दोपहर), सायम् (शाम), रात्रौ (रात में)। इनसे वाक्य और स्पष्ट हो जाता है।
प्र3.
शिष्टाचारस्य विषये पञ्चानां श्लोकानां संग्रहं कुर्वन्तु स्मरन्तु च ।
उत्तर

शिष्टाचार पर पाँच सुप्रसिद्ध श्लोक — अर्थ के साथ। इन्हें कण्ठस्थ कर लेना ही इस कार्य का असली भाग है।

क्रमःश्लोकःअर्थः (हिन्दी)कः शिष्टाचारः
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम् ।
प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः ॥
सच बोलो, प्रिय बोलो; ऐसा सच मत बोलो जो चुभे, और प्रिय लगने वाला झूठ भी मत बोलो — यही सनातन धर्म है।सत्यकथनम्, प्रियवचनम्
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् ।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति धनाद् धर्मं ततः सुखम् ॥
विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता आती है, योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख मिलता है।विनयः, गुरुवन्दनम्
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः ।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ॥
जो सदा अभिवादन करता है और बड़ों की सेवा करता है, उसकी चार वस्तुएँ बढ़ती हैं — आयु, विद्या, यश और बल।वृद्धसेवा, ज्येष्ठेषु आदरः
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः ।
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम् ॥
वृक्ष दूसरों के लिए फलते हैं, नदियाँ दूसरों के लिए बहती हैं, गायें दूसरों के लिए दूध देती हैं — यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है।परोपकारः, प्राणिषु दया
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
‘यह अपना है, वह पराया’ — ऐसी गिनती छोटे मन वालों की होती है; उदार हृदय वालों के लिए तो सारी पृथ्वी ही परिवार है।सर्वेषु मैत्रीभावः
याद करने का सरल तरीक़ा: हर श्लोक अनुष्टुप् छन्द में है — चार चरण, हर चरण में आठ अक्षर। इसलिए इसे गाकर याद कीजिए, रटकर नहीं। दो-दो चरण एक साँस में बोलिए; तीन दिन में एक श्लोक — पाँच श्लोक पन्द्रह दिन में पक्के।
Tip: संग्रह बनाते समय एक छोटी कॉपी रखिए — बाएँ पन्ने पर श्लोक, दाएँ पन्ने पर अर्थ और उससे जुड़ा शिष्टाचार-पद (अभ्यास प्रश्न १ की सूची से)। कक्षा में प्रार्थना-सभा के लिए भी यही संग्रह काम आ जाएगा।
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