दीपकम् अध्याय 5 वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वयं शब्दार्थान् जानीमः (पृष्ठ 63) — दत्तानां शब्दानाम् अर्थान् लिखन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 63 की सारणी में आठ शब्द हैं — सब पद्य में आए हुए हैं। संस्कृत पर्याय के साथ हिन्दी और अङ्ग्रेज़ी अर्थ भी दिए गए हैं।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglishपद्ये कुत्र
जीविनिजीवेप्राणी मेंIn the living beingद्वे नयने ननु जीविनि सकले
स्रष्टासृष्टिकर्ता ब्रह्मासृष्टिकर्ता ब्रह्माCreator of universeचतुर्मुखोऽयं जगतः स्रष्टा
करकमलेहस्तारविन्देकमल जैसे हाथ मेंIn the lotus like handपञ्चाङ्गुलयो मम करकमले
विदधतिकुर्वन्तिकरते हैंFacilitateलोके विदधति गणनाम्
गणनाम्गणनम्गिनतीCountingलोके विदधति गणनाम्
सुरसेनानीःकार्तिकेयःदेवों के सेनापति (कार्तिकेय)Commander-in-chief of Godsसुरसेनानीः षण्मुखदेवः
पातिरक्षतिरक्षा करता हैProtectsसततं पात्ययम् अमरगणम्
सप्ताहेदिवससप्तकेसप्ताह मेंIn a weekसप्त वासराः सप्ताहे ननु
अन्तिम स्तम्भ ‘मातृभाषया अर्थं लिखन्तु’ आपके लिए ख़ाली है। उसमें अपनी मातृभाषा (हिन्दी, मराठी, बाङ्ला, तमिल, गुजराती — जो भी आपकी हो) में अर्थ लिखिए। हिन्दीभाषी विद्यार्थी ऊपर की ‘हिन्दी’ वाली पंक्ति ही लिख सकते हैं; जैसे — जीविनि = प्राणी में, गणनाम् = गिनती, पाति = रक्षा करता है
शब्द-रचना पर ध्यान: कर + कमल = करकमलम् (कमल जैसा हाथ — कर्मधारय समास), सुर + सेनानी = सुरसेनानीः (देवों का सेनापति — षष्ठी तत्पुरुष), सप्त + अह = सप्ताहः (सात दिनों का समूह — द्विगु समास)।
प्र2.
वयं शब्दार्थान् जानीमः (पृष्ठ 64) — दत्तानां शब्दानाम् अर्थान् लिखन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 64 पर सारणी आगे बढ़ती है — नौ और शब्द, सब अन्तिम दो पद्यों के।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
ऋषयःमुनयःऋषि-गणSages
ऊर्ध्वम्उपरिऊपरAbove
अधःनिम्नभागेनीचेBelow
उपकृतिशीलाःउपकार-स्वभावाःउपकार स्वभाव वालेThose who are of helpful nature
अतुलबलाःअतुल्यशक्ति-सम्पन्नाःअतुलनीय बल वालेExtraordinarily strong
नियततयानियमितरूपेणनियमित रूप सेContinuously
दिशःदिशाःदिशाएँDirections
अमितामोदंअत्यानन्दपूर्वकम्अति आनन्दपूर्वकWith Great / limitless delight
करतालम्करतलध्वनिःतालीClap
‘अमित’ और ‘अतुल’ — दोनों में ‘नहीं’ छिपा है: अ + मित = जो नापा न जा सके (अमित = असीम); अ + तुल = जिसकी तुलना न हो सके (अतुल = अतुलनीय)। संस्कृत में ‘अ’ लगाकर उल्टा अर्थ बनाना बहुत आसान है — सत्य/असत्य, ज्ञान/अज्ञान, बल/अबल, शान्ति/अशान्ति।
‘करतालम्’ का सुन्दर अर्थ: कर (हाथ) + तल (हथेली) — दो हथेलियों के मिलने से जो ध्वनि हो, वही ताली। पद्य कहता है ‘कुर्मो बहुधा करतालम्’ — गाते समय बार-बार ताली बजाइए। यह पाठ याद करने की विधि भी है और आनन्द भी।
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