प्र1.
चित्रं पश्यन्तु, संख्याः वदन्तु, द्वितीयचित्रे अङ्कैः च ताः संख्याः लिखन्तु — (प्रथमे चित्रे पुष्पाकारे मध्ये ‘त्रीणि’, परितः च — पञ्च, चत्वारि, अष्ट, चतुर्दश, पञ्चाशत्, षोडश, द्वाविंशतिः)
उत्तर
पहले चित्र के फूल में बीच का वृत्त और सात पंखुड़ियाँ हैं; हर वृत्त में संख्यापद लिखा है। दूसरे (ख़ाली) चित्र के उसी स्थान पर अङ्क लिखने हैं।
| स्थानम् (चित्रे) | प्रथमे चित्रे — संख्यापदम् | द्वितीये चित्रे — अङ्कः | हिन्दी |
|---|---|---|---|
| मध्ये (हरितवृत्तम्) | त्रीणि | ३ | तीन |
| उपरि (ऊपर) | पञ्च | ५ | पाँच |
| दक्षिणोपरि (ऊपर-दाएँ) | चत्वारि | ४ | चार |
| दक्षिणे (दाएँ) | अष्ट | ८ | आठ |
| दक्षिणाधः (नीचे-दाएँ) | चतुर्दश | १४ | चौदह |
| वामाधः (नीचे-बाएँ) | पञ्चाशत् | ५० | पचास |
| वामे (बाएँ) | षोडश | १६ | सोलह |
| वामोपरि (ऊपर-बाएँ) | द्वाविंशतिः | २२ | बाईस |
तीन पदों में सावधानी चाहिए: षोडश = षट् + दश = १६ (छह और दस), न कि ६० — सन्धि से ‘षट्दश’ बदलकर ‘षोडश’ हो गया है। द्वाविंशतिः = द्वि + विंशतिः = २२ (न कि २०)। और पञ्चाशत् = ५०, जबकि पञ्चदश = १५ और पञ्चविंशतिः = २५ — तीनों में ‘पञ्च’ है, पर आगे का अंश अलग है, इसलिए संख्या भी अलग।
Tip: दूसरे चित्र में अङ्क भरते समय वही स्थान चुनिए जहाँ पहले चित्र में वह पद था — रंग मिला लीजिए। पीली पंखुड़ियों पर पीली, हल्की पंखुड़ियों पर वही — तब कोई संख्या इधर-उधर नहीं होगी।