दीपकम् अध्याय 4 अहं च त्वं च के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ का नाम ही पाठ का नियम है — ‘अहं च त्वं च’ = ‘मैं भी और तुम भी’। पूरा पाठ केवल दो शब्दों के परिवार पर टिका है — अस्मद् (अहम्, आवाम्, वयम्) और युष्मद् (त्वम्, युवाम्, यूयम्)। इन्हीं से अपना और दूसरे का परिचय दिया जाता है — मम नाम भरतः। अहं छात्रः। क्रिया पुरुष और वचन दोनों देखकर बदलती है। ‘अस्’ धातु के छह रूप इसी पाठ में याद करने हैं — अहम् अस्मि / आवां स्वः / वयं स्मः (उत्तमपुरुषः) तथा त्वम् असि / युवां स्थः / यूयं स्थ (मध्यमपुरुषः)। कर्ता बदलते ही क्रिया बदलेगी — यही वाक्य की शुद्धि की पहली कसौटी है। भवान् / भवती आदर का शब्द है, पर व्याकरण में ‘वह’ के साथ चलता है (योग्यताविस्तरः, पृष्ठ 58–59)। अर्थ ‘आप’ होते हुए भी इसके साथ प्रथमपुरुष की क्रिया लगती है — भवान् अस्ति , भवन्तौ स्तः , भवन्तः सन्ति ; ‘भवान् असि’ कहना अशुद्ध है। लिङ्ग के साथ शब्द का रूप भी बदलता है (पृष्ठ 49–50) — पुंलिङ्ग

  1. मम नाम … अहं … (आत्मपरिचयः)
  2. पुंलिङ्गम्
  3. स्त्रीलिङ्गम्
  4. अस्-क्रियापदयुक्तानि वाक्यानि
  5. ‘म्’ इत्यस्य अनुस्वारस्य च लेखननियमः
  6. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  10. योग्यताविस्तरः
  11. गीतम् – अहं पठामि
  12. परियोजनाकार्यम्
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