प्र1.
अस्मद्-युष्मद्-शब्दयोः सर्वाणि रूपाणि स्फोरकपत्रे लिखन्तु — (अस्मद्-शब्दरूपाणि तथा युष्मद्-शब्दरूपाणि, सप्तसु विभक्तिषु त्रिषु वचनेषु च)
उत्तर
पृष्ठ 60 पर दो कोरे स्फोरकपत्र (चार्ट) छपे हैं — एक ‘अस्मद्-शब्दरूपाणि’ का और एक ‘युष्मद्-शब्दरूपाणि’ का। दोनों में सात विभक्तियाँ और तीन वचन हैं, यानी हर सारणी में इक्कीस खाने। नीचे दोनों सारणियाँ भरी हुई दी गई हैं — इन्हें बड़े चार्ट-पेपर पर सुन्दर अक्षरों में उतारिए।
1. अस्मद्-शब्दरूपाणि (मैं / हम) — त्रिषु लिङ्गेषु समानम्
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| प्रथमा | अहम् | आवाम् | वयम् | मैं / हम दोनों / हम सब |
| द्वितीया | माम् (मा) | आवाम् (नौ) | अस्मान् (नः) | मुझको / हम दोनों को / हम सबको |
| तृतीया | मया | आवाभ्याम् | अस्माभिः | मेरे द्वारा / हम दोनों के द्वारा / हम सबके द्वारा |
| चतुर्थी | मह्यम् (मे) | आवाभ्याम् (नौ) | अस्मभ्यम् (नः) | मेरे लिए / हम दोनों के लिए / हम सबके लिए |
| पञ्चमी | मत् | आवाभ्याम् | अस्मत् | मुझसे / हम दोनों से / हम सबसे |
| षष्ठी | मम (मे) | आवयोः (नौ) | अस्माकम् (नः) | मेरा / हम दोनों का / हम सबका |
| सप्तमी | मयि | आवयोः | अस्मासु | मुझमें / हम दोनों में / हम सबमें |
2. युष्मद्-शब्दरूपाणि (तुम / आप) — त्रिषु लिङ्गेषु समानम्
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| प्रथमा | त्वम् | युवाम् | यूयम् | तुम / तुम दोनों / तुम सब |
| द्वितीया | त्वाम् (त्वा) | युवाम् (वाम्) | युष्मान् (वः) | तुमको / तुम दोनों को / तुम सबको |
| तृतीया | त्वया | युवाभ्याम् | युष्माभिः | तुम्हारे द्वारा / तुम दोनों के द्वारा / तुम सबके द्वारा |
| चतुर्थी | तुभ्यम् (ते) | युवाभ्याम् (वाम्) | युष्मभ्यम् (वः) | तुम्हारे लिए / तुम दोनों के लिए / तुम सबके लिए |
| पञ्चमी | त्वत् | युवाभ्याम् | युष्मत् | तुमसे / तुम दोनों से / तुम सबसे |
| षष्ठी | तव (ते) | युवयोः (वाम्) | युष्माकम् (वः) | तुम्हारा / तुम दोनों का / तुम सबका |
| सप्तमी | त्वयि | युवयोः | युष्मासु | तुममें / तुम दोनों में / तुम सबमें |
चार्ट बनाने का ढंग —
- चार्ट-पेपर को बीच से मोड़कर दो भाग कीजिए — बाएँ ‘अस्मद्-शब्दरूपाणि’, दाएँ ‘युष्मद्-शब्दरूपाणि’।
- प्रत्येक भाग में 4 स्तम्भ × 8 पंक्तियाँ की सारणी खींचिए (पहली पंक्ति शीर्षक की, फिर सात विभक्तियाँ)।
- पहले पेंसिल से लिखिए, जाँच के बाद ही पेन या स्केच-पेन फेरिए। विसर्ग (ः) और अनुस्वार (ं) कहीं छूटने न पाएँ — मम / माम् और अस्मान् / अस्माकम् जैसे रूप इन्हीं से अलग पहचाने जाते हैं।
- कोष्ठक वाले रूप (मे, नौ, नः, ते, वाम्, वः) लाल रंग से लिखिए और नीचे लिख दीजिए — ‘एतानि वैकल्पिकानि रूपाणि’।
अच्छे चार्ट में यह ज़रूर हो: (1) दोनों सारणियों में सातों विभक्तियाँ और तीनों वचन हों — इक्कीस-इक्कीस खाने पूरे भरे हों; (2) शीर्षक संस्कृत में हो; (3) कहीं भी सम्बोधन (हे …!) न लिखा हो — अस्मद् और युष्मद् का सम्बोधन नहीं होता, क्योंकि अपने-आपको या ‘तुम’ को पुकारा नहीं जाता; (4) नीचे एक पंक्ति में यह नियम लिखा हो — ‘अस्मद्-युष्मद्-शब्दौ त्रिषु लिङ्गेषु समानौ भवतः’।
पाठ से जोड़िए: पूरे पाठ में आपने केवल प्रथमा की पंक्ति देखी है (अहम्–आवाम्–वयम्, त्वम्–युवाम्–यूयम्) और एक बार षष्ठी — ‘मम नाम भरतः’ तथा श्लोक में ‘त्वमेव सर्वं मम’। शेष पाँच विभक्तियाँ आगे की कक्षाओं में विस्तार से पढ़ी जाएँगी; अभी चार्ट बनाकर आँखों में बसा लीजिए।
वाक्यों में देखिए तो रूप जल्दी बैठते हैं: मम पुस्तकम् (मेरी पुस्तक)। मह्यं पुस्तकं ददातु (मुझे पुस्तक दीजिए)। मया लिखितम् (मेरे द्वारा लिखा गया)। मयि विश्वासः (मुझमें विश्वास)। तव नाम किम् ? (तुम्हारा नाम क्या है ?)। तुभ्यं धन्यवादः (तुम्हें धन्यवाद)। त्वया कृतम् (तुम्हारे द्वारा किया गया)।