दीपकम् अध्याय 4 मम नाम … अहं … (आत्मपरिचयः)

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पृष्ठ 47 — मम नाम भरतः । अहं छात्रः । मम नाम गणेशः । अहं शिक्षकः । मम नाम गौतमः । अहं चिकित्सकः । मम नाम राघवः । अहं कृषकः । — एतेषां वाक्यानां हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु, व्याकरणं च स्पष्टीकुर्वन्तु ।
उत्तर

पाठ का पहला पृष्ठ चार चित्रों से अपना परिचय देना सिखाता है। हर परिचय में दो ही वाक्य हैं — पहले नाम, फिर काम।

चित्रम्संस्कृतम्हिन्दी
कक्षा में खड़ा विद्यार्थीमम नाम भरतः । अहं छात्रः ।मेरा नाम भरत है। मैं छात्र हूँ।
श्यामपट के पास खड़ा अध्यापकमम नाम गणेशः । अहं शिक्षकः ।मेरा नाम गणेश है। मैं शिक्षक हूँ।
चिकित्सालय में बैठा वैद्यमम नाम गौतमः । अहं चिकित्सकः ।मेरा नाम गौतम है। मैं चिकित्सक (डॉक्टर) हूँ।
खेत में घास काटता किसानमम नाम राघवः । अहं कृषकः ।मेरा नाम राघव है। मैं किसान हूँ।

व्याकरण-विवेचनम् (संस्कृतम्): ‘मम’ इति अस्मद्-शब्दस्य षष्ठी-विभक्तेः एकवचनम् (= मेरा)। ‘अहम्’ इति अस्मद्-शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः एकवचनम्। ‘छात्रः, शिक्षकः, चिकित्सकः, कृषकः’ — सर्वाणि पुंलिङ्गे प्रथमा-एकवचनानि

क्रिया कहाँ गई ? ‘अहं छात्रः।’ में ‘अस्मि’ (हूँ) कहीं दिखता नहीं, फिर भी अर्थ ‘मैं छात्र हूँ’ ही है। संस्कृत में ‘अस्’ धातु का रूप ऐसे परिचय-वाक्यों में छोड़ा जा सकता है — इसे व्याकरण में क्रियापद-अध्याहारः कहते हैं। पृष्ठ 51 पर वही वाक्य क्रिया के साथ भी दिखाए गए हैं — ‘अहम् आरक्षकः अस्मि।’ दोनों शुद्ध हैं।
अनुस्वार पर ध्यान: लिखा है ‘अहं छात्रः’, ‘अहं शिक्षकः’ — यहाँ मूल शब्द अहम् है, पर आगे ‘छ्’, ‘श्’ जैसे व्यञ्जन हैं, इसलिए ‘म्’ बदलकर अनुस्वार हो गया। यही नियम पृष्ठ 52 पर दिया गया है।
प्र2.
पृष्ठ 48 — मम नाम मेनका । अहं छात्रा । मम नाम प्रियंवदा । अहं शिक्षिका । मम नाम सुमित्रा । अहं चिकित्सिका । मम नाम राधिका । अहं सैनिकी । — एतेषां वाक्यानां हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 48 पर वही चार परिचय हैं, पर अब बोलने वाली स्त्रियाँ हैं — इसलिए हर व्यवसाय-वाचक शब्द स्त्रीलिङ्ग में आया है।

चित्रम्संस्कृतम्हिन्दी
कक्षा में खड़ी छात्रामम नाम मेनका । अहं छात्रा ।मेरा नाम मेनका है। मैं छात्रा हूँ।
श्यामपट के पास खड़ी अध्यापिकामम नाम प्रियंवदा । अहं शिक्षिका ।मेरा नाम प्रियंवदा है। मैं शिक्षिका हूँ।
चिकित्सालय में बैठी वैद्यामम नाम सुमित्रा । अहं चिकित्सिका ।मेरा नाम सुमित्रा है। मैं चिकित्सिका (महिला डॉक्टर) हूँ।
वर्दी पहने खड़ी सैनिकमम नाम राधिका । अहं सैनिकी ।मेरा नाम राधिका है। मैं सैनिक (महिला सैनिक) हूँ।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘छात्रा, शिक्षिका, चिकित्सिका’ इति आकारान्त-स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनानि; ‘सैनिकी’ इति ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम्। ‘अहम्’ तु पुंसि स्त्रियां च समानम् एव — अस्मद्-शब्दः लिङ्गभेदं न गृह्णाति

सबसे बड़ी बात यही है: ‘अहम्’ न पुंलिङ्ग है, न स्त्रीलिङ्ग। लड़का भी ‘अहम्’ कहता है और लड़की भी ‘अहम्’। लिङ्ग का पता आगे लगने वाले संज्ञा-पद से चलता है — अहं छात्र (लड़का), अहं छात्र (लड़की)। यही बात ‘त्वम्, आवाम्, वयम्, युवाम्, यूयम्’ पर भी लागू होती है।
‘मम नाम मेनका’ में ‘नाम’ नपुंसकलिङ्ग है (नामन् शब्द), इसीलिए ‘मम नाम’ में ‘मम’ का रूप नहीं बदला — षष्ठी विभक्ति का ‘मम’ हर लिङ्ग में एक-सा रहता है।
प्र3.
पृष्ठ 47–48 योः चित्रपेटिकासु आगतानां व्यवसायवाचकशब्दानां पुंलिङ्गरूपाणि स्त्रीलिङ्गरूपाणि च पृथक् लिखन्तु ।
उत्तर

दोनों पृष्ठ आमने-सामने रखकर देखिए — चारों जोड़े साफ़ दिखाई देंगे।

पुंलिङ्गम् (पृष्ठ 47)स्त्रीलिङ्गम् (पृष्ठ 48)हिन्दी अर्थस्त्रीलिङ्ग कैसे बना
छात्रःछात्राछात्र / छात्रा‘ः’ हटाकर ‘आ’ (टाप्)
शिक्षकःशिक्षिकाशिक्षक / शिक्षिका‘अक’ → ‘इका’
चिकित्सकःचिकित्सिकाडॉक्टर‘अक’ → ‘इका’
सैनिकःसैनिकीसैनिक‘ः’ हटाकर ‘ई’ (ङीप्)
कृषकःकृषिकाकिसान‘अक’ → ‘इका’ (पुस्तके न दत्तम्, अभ्यासार्थम्)
दो साँचे, इसलिए दो अन्त: जो शब्द ‘–अक’ पर समाप्त होते हैं (शिक्षक, चिकित्सक, गायक, पाचक, नर्तक) उनका स्त्रीलिङ्ग प्रायः ‘–इका’ बनता है — शिक्षिका, चिकित्सिका, गायिका, पाचिका। पर ‘नर्तक’ का स्त्रीलिङ्ग पुस्तक में नर्तकी दिया है — यानी हर बार एक ही नियम नहीं चलता, शब्द को वैसा ही याद करना पड़ता है जैसा पुस्तक में छपा है।
जाँचने का आसान तरीक़ा: स्त्रीलिङ्ग शब्द के आगे ‘एषा’ और पुंलिङ्ग के आगे ‘एषः’ लगाकर बोलिए — एषः शिक्षकः। एषा शिक्षिका। यदि कान को अटपटा लगे तो लिङ्ग ग़लत है।
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