हाँ। वर्षा जल चक्र का दिखाई देने वाला भाग है, जो समुद्र, आकाश और धरती के बीच निरंतर चलता रहता है।
यह कैसे होता है — चरण-दर-चरण:
- वाष्पन। सूर्य महासागरों, नदियों, तालाबों और गीले कपड़ों तक के जल को गरम करता है। जल धीरे-धीरे एक अदृश्य गैस — जलवाष्प — में बदलकर गरम वायु के साथ ऊपर उठता है।
- ऊपर जाकर ठंडा होना। ऊपर की वायु अधिक ठंडी होती है।
- संघनन। वाष्प ठंडा होकर धूल के कणों के चारों ओर अति सूक्ष्म बूँदों में बदल जाता है। ऐसी करोड़ों बूँदें मिलकर जो दिखती हैं, वही बादल है।
- वर्षण। बूँदें आपस में मिलती जाती हैं और इतनी भारी हो जाती हैं कि वायु उन्हें रोक नहीं पाती — तब वे वर्षा बनकर गिरती हैं। बहुत ठंड होने पर ओले या हिम गिरते हैं।
- वर्षा का जल नदियों से होकर फिर समुद्र में पहुँचता है और चक्र दोबारा आरंभ हो जाता है।