कुतूहल अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी सोचा है कि बारिश क्यों और कैसे होती है?
उत्तर

हाँ। वर्षा जल चक्र का दिखाई देने वाला भाग है, जो समुद्र, आकाश और धरती के बीच निरंतर चलता रहता है।

यह कैसे होता है — चरण-दर-चरण:

  1. वाष्पन। सूर्य महासागरों, नदियों, तालाबों और गीले कपड़ों तक के जल को गरम करता है। जल धीरे-धीरे एक अदृश्य गैस — जलवाष्प — में बदलकर गरम वायु के साथ ऊपर उठता है।
  2. ऊपर जाकर ठंडा होना। ऊपर की वायु अधिक ठंडी होती है।
  3. संघनन। वाष्प ठंडा होकर धूल के कणों के चारों ओर अति सूक्ष्म बूँदों में बदल जाता है। ऐसी करोड़ों बूँदें मिलकर जो दिखती हैं, वही बादल है।
  4. वर्षण। बूँदें आपस में मिलती जाती हैं और इतनी भारी हो जाती हैं कि वायु उन्हें रोक नहीं पाती — तब वे वर्षा बनकर गिरती हैं। बहुत ठंड होने पर ओले या हिम गिरते हैं।
  5. वर्षा का जल नदियों से होकर फिर समुद्र में पहुँचता है और चक्र दोबारा आरंभ हो जाता है।
भारत में वर्षा एक निश्चित ऋतु में क्यों होती है: गरमी में स्थल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की तुलना में कहीं तेज़ी से गरम होता है। स्थल की गरम वायु ऊपर उठती है और उसका स्थान लेने समुद्र से नम वायु दौड़ी आती है। यही मानसूनी पवनें हैं। पश्चिमी घाट और हिमालय से टकराकर ये ऊपर उठती हैं, ठंडी होती हैं और जमकर बरसती हैं — इसीलिए जून के आस-पास पहली वर्षा केरल में होती है और चेरापूँजी (मेघालय) पृथ्वी के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में है।
स्वयं जाँचिए: उमस भरे दिन में ठंडे जल से भरा स्टील का गिलास कुछ देर हाथ में रखिए। गिलास के बाहर पानी की बूँदें दिखने लगेंगी। भीतर से कुछ रिसा नहीं — वायु में पहले से मौजूद वाष्प ठंडी सतह पर संघनित हो गई। बादल भी ठीक इसी प्रकार बनता है।
प्र2.
क्या आपने ध्यान दिया कि जल ठंडा करने पर बर्फ बन जाता है और गरम करने पर उबलने लगता है?
उत्तर

हाँ। तीनों रूपों में पदार्थ वही जल है; केवल उसकी अवस्था बदलती है।

अवस्थाहम क्या कहते हैंकिससे बदलती हैदैनिक जीवन में
ठोसबर्फ0 °C तक ठंडा करना — हिमीकरणफ्रीज़र की बर्फ, ओले
द्रवजलबर्फ को 0 °C से ऊपर गरम करना — गलनपीने के जल का गिलास
गैसभाप / जलवाष्प100 °C तक गरम करना — क्वथनप्रेशर कुकर की सीटी
ऐसा क्यों होता है: जल अत्यंत सूक्ष्म कणों से बना है जो सदा गतिशील रहते हैं।
  • ठंडा करने पर कण धीमे पड़ जाते हैं, पास-पास आकर निश्चित स्थानों पर जम जाते हैं और केवल वहीं कंपन कर पाते हैं। जल कठोर हो जाता है — बर्फ
  • गरम करने पर कण तेज़ और तेज़ चलने लगते हैं और अंततः एक-दूसरे का बंधन तोड़कर वायु में बिखर जाते हैं — भाप
अर्थात् गरम या ठंडा करने से नया पदार्थ नहीं बनता; केवल यह बदलता है कि कण कितनी स्वतंत्रता से चल सकते हैं। इसीलिए पिघली हुई बर्फ से वही जल वापस मिल जाता है।
क्या आप जानते हैं? कुकर या केतली से निकलता सफ़ेद बादल भाप नहीं है। असली भाप अदृश्य होती है। जो दिखता है वह थोड़ी ठंडी होकर फिर से बनी सूक्ष्म जल-बूँदें हैं — संघनन आपकी आँखों के सामने!
भारत में उपयोग: मटका गरमी में जल ठंडा रखता है क्योंकि उसके सूक्ष्म छिद्रों से रिसकर जल वाष्पित होता है और ऊष्मा साथ ले जाता है। गरमी की शाम को छत पर पानी छिड़कने से छत ठंडी होने का कारण भी यही है।
प्र3.
हम गरम और ठंडे को कैसे समझते हैं?
उत्तर

स्पर्श से हम केवल तुलना कर सकते हैं — कोई वस्तु कितनी गरम है, यह जानने के लिए मापना पड़ता है।

क्या देखने को मिलता है: हमारी स्पर्श-संवेदना विश्वसनीय नहीं है। यह सरल परीक्षण कीजिए —

बायाँ हाथ → ठंडे जल के कटोरे में   |   दायाँ हाथ → गुनगुने जल के कटोरे में
एक मिनट बाद दोनों हाथ एक ही सामान्य जल के कटोरे में डालिए।

वही जल उसी क्षण बाएँ हाथ को गरम और दाएँ हाथ को ठंडा लगेगा। अर्थात् त्वचा केवल यह बताती है कि वस्तु हमारे हाथ से अधिक गरम है या कम।

मापन क्यों आवश्यक है: “गरम” और “ठंडा” सापेक्ष शब्द हैं, इसलिए विज्ञान ताप नामक संख्या का प्रयोग करता है, जिसे डिग्री सेल्सियस (°C) में तापमापी (थर्मामीटर) से मापा जाता है। थर्मामीटर का पाठ्यांक इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उसे कौन पकड़े है।
  • डॉक्टरी तापमापी शरीर का ताप मापता है। सामान्य मानव शरीर का ताप लगभग 37 °C (98.6 °F) होता है। इससे अधिक होने पर ज्वर माना जाता है।
  • प्रयोगशाला तापमापी जल, तेल या वायु का ताप कहीं अधिक विस्तृत परास में मापता है।
  • समुद्र तल पर जल 0 °C पर जमता है और 100 °C पर उबलता है।
कहाँ काम आता है: डॉक्टर माथा छूकर नहीं, थर्मामीटर का पाठ्यांक देखकर दवा तय करता है। हलवाई दही जमाने के लिए दूध को सही ताप पर रखता है। मौसम विभाग अधिकतम ताप लगभग 45 °C पार करने पर लू की चेतावनी देता है और तब विद्यालयों का समय बदल दिया जाता है।
प्र4.
और फिर, हमारे आस-पास अनेक प्रकार की वस्तुएँ हैं— जिस कागज पर हम लिखते हैं, धातु की चाबी, प्लास्टिक का पैमाना, हमारे बॉक्स में मिटाने वाला रबर, बॉक्स को बंद रखने वाला चुंबक, हमारे पहनने के कपड़े, दूध पीने का प्याला और बहुत-सी अन्य वस्तुएँ। ये सब किससे बनी होती हैं? क्या ये विभिन्न पदार्थों से बनी हैं? हम विभिन्न पदार्थों को एक-दूसरे से कैसे पृथक करते हैं?
उत्तर

हाँ — प्रत्येक वस्तु उसी पदार्थ से बनी है जो उसके काम के लिए उपयुक्त हो, और कोई एक वस्तु दो-तीन पदार्थों से भी बन सकती है।

वस्तुपदार्थवह गुण जो उसे उपयुक्त बनाता है
कागज़लकड़ी की लुगदीहल्का, मुलायम, स्याही सोख लेता है
चाबीधातु (पीतल, इस्पात)कठोर और मज़बूत, मुड़ती या टूटती नहीं
पैमानाप्लास्टिकहल्का, सीधा रहने वाला, सस्ता, जंग नहीं लगती
रबररबरमुलायम और लचीला, पेंसिल के निशान मिटा देता है
बॉक्स का चुंबकचुंबकीय पदार्थलोहे को आकर्षित करता है, इसलिए ढक्कन चिपक जाता है
कपड़ेकपास, ऊन, रेशम, संश्लिष्ट रेशासूती कपड़ा गरमी में हवा आने-जाने देता है; ऊन वायु रोककर गरम रखती है
प्यालाकाँच, चीनी मिट्टी, स्टील या मिट्टीद्रव रोकता है, दूध में घुलता नहीं

पदार्थों को पृथक कैसे करते हैं: हम ऐसा एक गुण ढूँढ़ते हैं जो केवल एक पदार्थ में हो, और उसी का उपयोग करते हैं।

  • हस्त चयन — जब टुकड़े बड़े, थोड़े और स्पष्ट भिन्न हों, जैसे चावल में से कंकड़ बीनना।
  • निष्पावन (ओसाना) — किसान मिश्रण को हवा में गिराता है; हल्का भूसा उड़ जाता है और भारी अनाज सीधे नीचे गिरता है।
  • चालन — आटा चलनी के छिद्रों से निकल जाता है, चोकर ऊपर रह जाता है।
  • चुंबकीय पृथक्करण — चुंबक रेत या छीलन में से लोहे की पिनें खींच लेता है।
  • निस्यंदन — छन्नी में चाय की पत्ती रह जाती है और चाय छनकर निकल जाती है।
  • अवसादन और निस्तारण — गँदला जल कुछ देर रखा रहने दें, मिट्टी नीचे बैठ जाती है और ऊपर का स्वच्छ जल उँडेल लिया जाता है।
  • वाष्पन — समुद्र का जल उथले खेतों में भरते हैं; धूप में जल वाष्पित हो जाता है और नमक शेष रह जाता है। गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर नमक इसी प्रकार बनता है।
सभी विधियों के पीछे एक ही नियम: पृथक्करण सदैव किसी गुण के अंतर का उपयोग करता है — चालन में आकार, निष्पावन में भार, चुंबकीय पृथक्करण में चुंबक से आकर्षण, वाष्पन में घुलनशीलता और क्वथन। यदि दो पदार्थों के सभी गुण समान हों तो उन्हें अलग नहीं किया जा सकता।
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