प्र1.
किसी ऐप की सहायता से आप शुक्र ग्रह को भोर अथवा संध्या के समय देख सकते हैं। अगर आप भोर के समय इसे देख रहे हैं तो सूर्योदय से पहले पूर्व दिशा में देखिए। जब आप संध्या के समय में इसे देख रहे हैं तो सूर्यास्त के पश्चात् पश्चिम दिशा में देखिए।
उत्तर
प्रेक्षण: शुक्र एक अकेला, अत्यंत चमकीला, स्थिर श्वेत "तारा" जैसा दिखता है, जो आकाश में काफी नीचे, वहीं होता है जहाँ सूर्य उगने वाला है या अभी-अभी डूबा है।
| कब देखें | कहाँ देखें | शुक्र का नाम |
|---|---|---|
| भोर में, सूर्योदय से ठीक पहले | पूर्व दिशा में नीचे | भोर का तारा |
| संध्या में, सूर्यास्त के ठीक बाद | पश्चिम दिशा में नीचे | संध्या का तारा |
यह शुक्र ही है, तारा नहीं— कैसे निश्चित करें:
- यह किसी भी तारे से कहीं अधिक चमकीला है— सूर्य और चंद्रमा के बाद आकाश का सबसे चमकीला पिंड।
- इसका प्रकाश स्थिर रहता है, यह अधिक टिमटिमाता नहीं।
- उस समय आकाश गोधूलि के कारण अभी उजाला ही होता है और वहाँ कोई तारा दिखाई नहीं देता।
- ऐप से पुष्टि कर लीजिए— वह पिंड का नाम बता देगा।
शुक्र केवल भोर या संध्या में ही क्यों दिखता है: शुक्र पृथ्वी की कक्षा के भीतर रहकर सूर्य की परिक्रमा करता है, इसलिए पृथ्वी से देखने पर वह आकाश में सूर्य से कभी बहुत दूर नहीं जाता। वह या तो सूर्य से थोड़ा आगे रहता है (संध्या) या थोड़ा पीछे (भोर), और आधी रात को सिर के ऊपर कभी नहीं होता।
क्या आप जानते हैं? सूर्य से बुध की तुलना में अधिक दूर होने पर भी शुक्र बुध से अधिक गरम है— इसका घना वायुमंडल ऊष्मा को बाहर निकलने ही नहीं देता।