यह परियोजना कैसे करें: अपने दादा-दादी, किसी पुजारी, किसान या मछुआरे से पूछिए— पुराने नाम और कहानियाँ उन्हें प्रायः किसी पुस्तक से बेहतर याद रहती हैं। नाम, भाषा और कहानी अपनी कॉपी में लिखिए, फिर उसका चित्र बनाइए।
नमूना उत्तर— आँखों से दिखने वाले ग्रहों के नाम (पाठ्यपुस्तक स्वयं पृष्ठ 235 पर संस्कृत-मूलक नाम देती है):
| अंग्रेज़ी | संस्कृत / हिंदी | तमिल | तेलुगु | मलयालम |
|---|---|---|---|---|
| Mercury | बुध | पुथन | बुधुडु | बुधन |
| Venus | शुक्र | वेल्लि | शुक्रुडु | शुक्रन |
| Earth | पृथ्वी | भूमि | भूमि | भूमि |
| Mars | मंगल | सेव्वाइ | कुजुडु / अंगारकुडु | चोव्वा |
| Jupiter | बृहस्पति / गुरु | गुरु | गुरुवु | व्याषम |
| Saturn | शनि | सनि | शनि | शनि |
नमूना उत्तर— अध्याय की और भारत की कुछ कहानियाँ:
- मध्य भारत की जनजातियाँ: सप्तर्षि के जो चार तारे लगभग आयत बनाते हैं वे दादी-माँ की चारपाई हैं, और शेष तीन तारे उसे चुराते हुए तीन चोर हैं।
- कोंकण-तट के मछुआरे: वही चार तारे एक नाव हैं और अंतिम तीन तारे उस नाव की ग्रीवा हैं।
- पूरे भारत में: ये सात तारे सप्तर्षि हैं और ध्रुव तारा वह ध्रुव है जिसकी दृढ़ता ने उसे आकाश में स्थायी स्थान दिलाया।
- धूमकेतु को संस्कृत में धूमकेतु, और भारत की विभिन्न जनजातियाँ पुच्छ्या तारो (पूँछ वाला तारा) अथवा झेंड्या तारो (झंडे जैसा तारा) कहती हैं।