कुतूहल अध्याय 12 और भी सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपनी स्थानीय भाषा में ग्रहों के नाम जानने का प्रयास कीजिए। आपके क्षेत्र में तारा-मंडलों के तारों से जुड़ी कहानियों का पता लगाइए। इन कहानियों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर

यह परियोजना कैसे करें: अपने दादा-दादी, किसी पुजारी, किसान या मछुआरे से पूछिए— पुराने नाम और कहानियाँ उन्हें प्रायः किसी पुस्तक से बेहतर याद रहती हैं। नाम, भाषा और कहानी अपनी कॉपी में लिखिए, फिर उसका चित्र बनाइए।

नमूना उत्तर— आँखों से दिखने वाले ग्रहों के नाम (पाठ्यपुस्तक स्वयं पृष्ठ 235 पर संस्कृत-मूलक नाम देती है):

अंग्रेज़ीसंस्कृत / हिंदीतमिलतेलुगुमलयालम
Mercuryबुधपुथनबुधुडुबुधन
Venusशुक्रवेल्लिशुक्रुडुशुक्रन
Earthपृथ्वीभूमिभूमिभूमि
Marsमंगलसेव्वाइकुजुडु / अंगारकुडुचोव्वा
Jupiterबृहस्पति / गुरुगुरुगुरुवुव्याषम
Saturnशनिसनिशनिशनि

नमूना उत्तर— अध्याय की और भारत की कुछ कहानियाँ:

  • मध्य भारत की जनजातियाँ: सप्तर्षि के जो चार तारे लगभग आयत बनाते हैं वे दादी-माँ की चारपाई हैं, और शेष तीन तारे उसे चुराते हुए तीन चोर हैं।
  • कोंकण-तट के मछुआरे: वही चार तारे एक नाव हैं और अंतिम तीन तारे उस नाव की ग्रीवा हैं।
  • पूरे भारत में: ये सात तारे सप्तर्षि हैं और ध्रुव तारा वह ध्रुव है जिसकी दृढ़ता ने उसे आकाश में स्थायी स्थान दिलाया।
  • धूमकेतु को संस्कृत में धूमकेतु, और भारत की विभिन्न जनजातियाँ पुच्छ्या तारो (पूँछ वाला तारा) अथवा झेंड्या तारो (झंडे जैसा तारा) कहती हैं।
चित्रों के माध्यम से कैसे प्रस्तुत करें: काला चार्ट पेपर लीजिए। सही पैटर्न में छोटे चाँदी या सफेद तारा-स्टिकर चिपकाइए। उनके ऊपर पतली सफेद चॉक या जेल पेन से कल्पित आकृति बनाइए— चारपाई, नाव, ऋषि। हर चित्र के नीचे दो-तीन पंक्तियों में कहानी लिखिए। पोस्टर को शीर्षक दीजिए और कक्षा में लगाइए।
प्र2.
किसी निकटवर्ती कृत्रिम नभमंडल (प्लेनेटेरियम) में जाइए। यदि आपके आस-पास कोई प्लेनेटेरियम या विज्ञान संग्रहालय है तो आप उसमें विशेषकर उस समय जाइए जब वे कोई रात्रि-आकाश दर्शन कार्यक्रम आयोजित कर रहे हों। तब आपको दूरदर्शक के माध्यम से चंद्रमा, ग्रहों और तारों को देखने का अवसर प्राप्त होगा। यदि आप दिन के समय प्लेनेटेरियम में जाते हैं तो वहाँ आप उनके आकाशीय पिंडों के चित्र और आकाश संबंधी प्रदर्शन देख पाएँगे।
उत्तर

यात्रा की योजना कैसे बनाएँ:

  1. अपने निकटतम कृत्रिम नभमंडल या विज्ञान संग्रहालय का पता कीजिए और उसके शो का समय तथा यह देखिए कि वहाँ रात्रि-आकाश दर्शन कार्यक्रम होते हैं या नहीं। संग्रहालय, प्लेनेटेरियम, उच्च शिक्षा संस्थान और अव्यावसायिक खगोलीय संगठन— सभी ऐसे कार्यक्रम करते हैं।
  2. अपने शिक्षक, माता-पिता अथवा किसी वयस्क के साथ जाइए। कॉपी और पेंसिल साथ रखिए।
  3. जाने से पहले तीन प्रश्न लिखकर ले जाइए— जैसे "दूरदर्शक कितना बड़ा है?", "आज रात कौन-सा ग्रह दिखेगा?", "शनि का वलय चपटा क्यों है?"

आप वास्तव में क्या देख पाएँगे:

पिंडछोटे दूरदर्शक से क्या दिखता है
चंद्रमागर्त, पर्वत और प्रकाशित तथा अंधकारमय भाग के बीच की तीखी रेखा
बृहस्पतिधारियों वाली छोटी चकती और उसके पास एक पंक्ति में चार नन्हे चंद्रमा
शनिवलय— यही दृश्य अधिकांश दर्शकों को जीवन भर याद रहता है
शुक्रचमकीली कला, छोटे चंद्रमा जैसी
तारा-गुच्छकृत्तिका (प्लायोडिज) अलग-अलग दर्जनों नीले तारों में बँट जाती है
सुझाव: दिन की यात्रा में गुंबद के नीचे होने वाला आकाश-प्रदर्शन मत छोड़िए। वह पूरी रात के घूमने को कुछ ही मिनटों में दिखा देता है, इसलिए आप सप्तर्षि को ध्रुव तारे के चारों ओर घूमते हुए वहीं देख सकते हैं— वही बात जो प्रश्न 10 आपसे कई घंटों तक देखने को कहता है।
प्र3.
पता लगाइए कि क्या बढ़ता हुआ प्रकाश-प्रदूषण मानव, वन्यजीवन एवं पर्यावरण के लिए समस्याएँ उत्पन्न कर रहा है। ऐसे किसी कार्य का वर्णन कीजिए, जो आप अपने व्यक्तिगत स्तर पर प्रकाश प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए करेंगे।
उत्तर

हाँ— प्रकाश प्रदूषण वास्तविक हानि पहुँचा रहा है, और विश्व स्तर पर तेज़ी से बढ़ रहा है। रात में आकाश की ओर फेंका गया अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश तीन वर्गों को प्रभावित करता है।

प्रभावितउत्पन्न समस्या
मानवरात में तेज़ प्रकाश नींद और शरीर की दिन-रात की लय बिगाड़ता है; गलत दिशा में लगे लैंप की चौंध वाहन चालकों को परेशान करती है; ज़मीन के स्थान पर आकाश को रोशन करने में ऊर्जा और धन दोनों व्यर्थ होते हैं।
वन्यजीवनकीट रात भर लैंप के चारों ओर मँडराकर मर जाते हैं, और कीट घटने से पक्षियों का भोजन तथा परागण दोनों घटते हैं। प्रवासी पक्षी रोशन इमारतों से भ्रमित हो जाते हैं। हमारे तटों पर अभी-अभी निकले कछुए के बच्चे समुद्र के बजाय होटलों की रोशनी की ओर चल पड़ते हैं। चमगादड़, उल्लू और अन्य निशाचर प्राणी अपने शिकार-क्षेत्र खो देते हैं।
पर्यावरण एवं विज्ञाननगर के अधिकांश बच्चों के लिए रात्रि-आकाश खो चुका है। खगोलविद धुँधले पिंडों का अध्ययन नहीं कर पाते— इसीलिए अँधेरे आकाश वाले संरक्षित क्षेत्र बनाए जा रहे हैं, जैसे दिसंबर 2022 में घोषित लद्दाख का हान्ले डार्क स्काई रिजर्व

नमूना उत्तर— व्यक्तिगत स्तर पर मैं क्या करूँगा:

  • जब आवश्यकता न हो तो घर के बाहर का बल्ब और छत की बत्ती बुझा दूँगा, और परिवार से भी ऐसा करने को कहूँगा।
  • पिताजी से कहकर गेट के लैंप पर एक साधारण छज्जा या टोपी लगवाऊँगा, ताकि प्रकाश नीचे रास्ते पर पड़े, आकाश में और पड़ोसी की खिड़की में न जाए।
  • बाहर चौंधियाने वाले सफेद बल्ब के स्थान पर कम शक्ति का, हल्के पीले रंग का बल्ब लगवाऊँगा।
  • रात में पर्दे बंद रखूँगा ताकि भीतर का प्रकाश बाहर न फैले।
  • विद्यालय के सूचना-पट्ट के लिए एक पोस्टर बनाऊँगा— "रोशनी ज़मीन पर डालिए, आकाश पर नहीं"— और कक्षा को समझाऊँगा कि प्रकाश प्रदूषण से हम क्या खो रहे हैं।
यह छोटा-सा कार्य क्यों महत्त्वपूर्ण है: अधिकांश प्रदूषणों के विपरीत, प्रकाश प्रदूषण उसी क्षण समाप्त हो जाता है जब कारण हटा दिया जाए। गलत दिशा में लगा लैंप बुझाइए और उसी रात उसके ऊपर का आकाश फिर साफ हो जाता है। बहुत कम पर्यावरणीय समस्याएँ इतनी जल्दी ठीक हो सकती हैं।
प्र4.
पता लगाइए कि किस प्रकार के मौसम के कारण भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स) ने हान्ले, लद्दाख को वेधशाला स्थापित करने के लिए चुना है।
उत्तर

हान्ले की भारतीय खगोलीय वेधशाला दिगपा-रत्सा री पर्वतमाला के सर्वोच्च शिखर— जिसका नाम अब सरस्वती पर्वत है— पर लगभग 4,500 मीटर की ऊँचाई पर बनी है। यह संसार की सबसे ऊँची वेधशालाओं में से एक है। भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान ने इसे इसलिए चुना कि खगोलविद को जो भी परिस्थितियाँ चाहिए, वे लगभग सभी यहाँ एक साथ मिलती हैं।

हान्ले की परिस्थितिदूरदर्शक के लिए इसका लाभ
बादल बहुत कम— वर्ष में बड़ी संख्या में साफ रातेंअवलोकन के लिए अधिक रातें मिलती हैं; बादलों वाले स्थान पर महँगा दूरदर्शक व्यर्थ पड़ा रहता है
अत्यंत शुष्क, शीत-मरुस्थलीय वायु— जलवाष्प न के बराबरजलवाष्प अवरक्त प्रकाश सोख लेती है; शुष्क वायु में उसका कहीं अधिक भाग दूरदर्शक तक पहुँचता है
बहुत अधिक ऊँचाई— वायुमंडल का बड़ा भाग नीचे रह जाता हैकम वायु में से देखना पड़ता है, इसलिए प्रतिबिंब अधिक स्पष्ट और स्थिर बनते हैं
शांत, स्थिर वायु— विक्षोभ बहुत कमतारों के प्रतिबिंब झिलमिलाकर धुँधले नहीं होते
दूरस्थ और विरल आबादी— प्रकाश प्रदूषण न के बराबरअत्यंत धुँधले पिंड भी अभिलेखित किए जा सकते हैं; इसीलिए दिसंबर 2022 में इस क्षेत्र को हान्ले डार्क स्काई रिजर्व घोषित किया गया
धूल और औद्योगिक धुंध बहुत कमस्वच्छ वायु प्रकाश कम बिखेरती है और आकाश की पृष्ठभूमि अँधेरी बनी रहती है
क्या आप जानते हैं? हान्ले के दूरदर्शकों में से एक का नाम हिमालयी चंद्र टेलीस्कोप है, जो नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम् चंद्रशेखर के सम्मान में रखा गया है। यह रिजर्व वर्ष भर आम जनता के लिए खुला रहता है, और स्थानीय नागरिकों को छोटे टेलीस्कोप देकर संस्थान ने उन्हें खगोलिकीय राजदूत के रूप में प्रशिक्षित किया है— खगोल-पर्यटन से पूरे क्षेत्र को लाभ पहुँचाने का सुंदर उदाहरण।
प्र5.
यदि आपको कढ़ाई करना पसंद है तो किसी गहरे रंग के कपड़े पर उन तारा-मंडलों की कढ़ाई कीजिए, जो आपने चित्र 12.15 में देखे हैं। आप अपनी सृजनशीलता का उपयोग करते हुए विविध कला और शिल्प माध्यमों द्वारा अन्य विधियों से भी तारा-मंडलों को चित्रित कर सकते हैं।
उत्तर

कढ़ाई से तारा-चित्र कैसे बनाएँ:

  1. गहरे नीले या काले रंग का कपड़ा लेकर उसे कढ़ाई के घेरे (हूप) में कसिए।
  2. चित्र 12.3 या चित्र 12.4 से तारा-मंडल को ट्रेसिंग पेपर पर उतारिए। हर तारे पर बिंदु लगाइए और जो तारा अधिक चमकीला है उसका बिंदु बड़ा रखिए।
  3. दर्ज़ी की महीन चॉक से ये बिंदु कपड़े पर उतार लीजिए।
  4. हर तारे को सफेद, चाँदी या हल्के पीले धागे से फ्रेंच नॉट या कुछ छोटे सीधे टाँकों के गुच्छे के रूप में काढ़िए। सबसे चमकीले तारे— लुब्धक, या लाल रंग में बीटलजूज— के लिए एक मोती या सितारा लगाइए।
  5. चाहें तो तारों को धूसर धागे के बहुत महीन रनिंग स्टिच से जोड़कर कल्पित आकृति दिखाइए, और नीचे बैक स्टिच से उसका नाम काढ़ दीजिए।

तारा-मंडल दिखाने के अन्य तरीके— इनमें से कोई एक चुनिए:

  • सुई-छिद्र लालटेन: काले चार्ट पेपर पर सुई से तारों के अनुसार छेद कीजिए, उसे बेलनाकार मोड़िए और भीतर टॉर्च रखिए। अँधेरे कमरे की छत पर पैटर्न उभर आएगा।
  • कील-धागा कला: रंगे हुए लकड़ी के तख्ते पर तारों की जगह छोटी कीलें ठोंकिए और उनके बीच सफेद धागा तानिए।
  • रंगोली / दीये: सफेद रंगोली से फर्श पर सप्तर्षि बनाइए, या दीपावली पर सात तारों की जगह नन्हे दीये रखिए।
  • बोतल-ढक्कन मोज़ेक या ग्लो पेंट: काली शीट पर चाँदी के ढक्कन चिपकाइए या अँधेरे में चमकने वाला रंग लगाइए।
  • कक्षा का आकाश-भित्तिचित्र: हर विद्यार्थी एक-एक वर्ग पर एक तारा-मंडल काढ़े या बनाए, और सारे वर्ग जोड़कर कक्षा की दीवार के लिए एक "आकाश-रजाई" तैयार कीजिए।
सुझाव: तारों की आपसी दूरियाँ और आपसी चमक लगभग सही रखिए। तारा-चित्र तभी उपयोगी है जब कोई उसे सचमुच के आकाश के सामने रखकर पैटर्न पहचान सके।
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