कुतूहल अध्याय 2 क्रियाकलाप 2.2

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र में बनाए गए विभिन्न पौधों और जंतुओं के बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर

जब सभी विद्यार्थी श्यामपट्ट पर चित्र बना लेते हैं, तब तीन बातें स्पष्ट दिखती हैं।

  • दो चित्र प्राय: एक जैसे नहीं होते। 40 विद्यार्थियों की कक्षा में भी श्यामपट्ट आम, नीम, तुलसी, गुलाब, सूरजमुखी, केला, गाय, कुत्ता, तोता, मोर, तितली, हाथी, मछली, बिल्ली से भर जाता है — एक ही छोटे से क्षेत्र से इतनी विविधता।
  • कुछ नाम बार-बार आते हैं। आम, गुलाब, गाय, तोता और तितली अनेक विद्यार्थी बनाते हैं, क्योंकि ये सामान्य हैं और सरलता से दिख जाते हैं।
  • हर चित्र भिन्न विशेषताएँ दिखाता है। किसी पौधे का तना मोटा है, किसी का पतला; किसी जंतु के चार पाद हैं, किसी के दो, किसी के एक भी नहीं; किसी के पंख हैं तो किसी के पख।
चित्र इतने भिन्न क्यों हैं: प्रत्येक विद्यार्थी ने वही पौधा या जंतु चुना जिसे उसने ध्यान से देखा और जो उसे सबसे अच्छा लगा। सबका घर, गली और अनुभव भिन्न है, इसलिए पूरी कक्षा मिलकर उतनी जैव विविधता अंकित कर लेती है जितनी अकेला कोई नहीं कर सकता।
क्या आप जानते हैं? चित्र बनाने से पहले 30 सेकेंड आँखें बंद करना कोई खेल नहीं है — यह आपको पुस्तक के चित्र से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के अवलोकन की स्मृति से पौधा या जंतु याद करने पर बाध्य करता है।
प्र2.
कक्षा के सभी विद्यार्थियों द्वारा श्यामपट्ट पर भिन्न-भिन्न प्रकार के पौधों और जंतुओं के कितने चित्र बनाए गए हैं?
उत्तर

श्यामपट्ट पर गिनकर अपनी कक्षा की वास्तविक संख्या लिखिए। लगभग 40 विद्यार्थियों की कक्षा में सामान्यत: यह परिणाम आता है:

कक्षा में विद्यार्थी = 40
बनाए गए चित्र = 40 पौधे + 40 जंतु = 80 चित्र
दोहराव हटाने के बाद → लगभग 20–25 भिन्न पौधे और 20–25 भिन्न जंतु
भिन्न प्रकारों की संख्या चित्रों से कम क्यों है: अनेक विद्यार्थी वही लोकप्रिय आम का पेड़ या वही गाय बनाते हैं। दोहराव को केवल एक बार गिना जाता है, क्योंकि हम चित्र नहीं, प्रकार गिन रहे हैं। वैज्ञानिक भी वन में इसी प्रकार जातियाँ गिनते हैं — एक ही बाघ दो बार दिख जाए तो भी वह एक ही बाघ है।
सुझाव: श्यामपट्ट पर "पौधे" और "जंतु" के दो स्तंभ बनाइए और हर दोहराव पर नाम के आगे एक निशान लगाइए। इससे भिन्न प्रकारों की संख्या और सबसे सामान्य प्रकार, दोनों एक साथ मिल जाएँगे।
प्र3.
क्या आप सोचते हैं कि श्यामपट्ट पर चित्रित किए गए पौधों और जंतुओं के अतिरिक्त भी विभिन्न प्रकार के अनेक पौधे और जंतु हो सकते हैं?
उत्तर

हाँ — और भी बहुत अधिक। श्यामपट्ट पर केवल वही है जो एक क्षेत्र की एक कक्षा को याद आया।

  • आपके अपने नगर में भी ऐसे अनेक जीव हैं जिनका चित्र किसी ने नहीं बनाया — बोगनविलिया, अशोक, बाँस, जलकुंभी, केंचुए, मकड़ियाँ, घोंघे, मधुमक्खियाँ, चमगादड़, उल्लू।
  • थोड़ा दूर जाइए और सूची पूरी तरह बदल जाती है — राजस्थान के मरुस्थल में नागफनी, हिमालय में देवदार, सुंदरबन में मैंग्रोव, अंडमान और निकोबार के आस-पास मूँगा और रंगीन मछलियाँ।
  • अनेक जीव इतने छोटे हैं कि दिखाई ही नहीं देते, और बहुत से केवल रात में सक्रिय रहते हैं।
ऐसा क्यों है: किसी क्षेत्र के पौधों और जंतुओं की विविधता उसकी जैव विविधता है, और इस दृष्टि से भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में है। एक कक्षा जितना गिना सकती है, वह इस बात से सीमित है कि वे कहाँ रहते हैं और उन्होंने क्या देखा है — इससे नहीं कि वास्तव में कितना जीवन है।
कीजिए: पत्र या वीडियो कॉल के माध्यम से यही क्रियाकलाप किसी अन्य राज्य की कक्षा से कराइए और दोनों श्यामपट्टों की तुलना कीजिए। दोनों सूचियों में समान नामों की संख्या देखकर आप चौंक जाएँगे — वह बहुत कम होगी।
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