प्र1.
पेड़ कुछ पक्षियों और जंतुओं को भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं, जंतु फल खाने के बाद बीज फैलाने में सहायता करते हैं इत्यादि। क्या आप ऐसे कुछ अन्य उदाहरण सोच सकते हैं?
उत्तर
हाँ। किसी क्षेत्र की जैव विविधता का प्रत्येक सदस्य दूसरे सदस्यों पर निर्भर रहता है। हमारे आस-पास से कुछ और उदाहरण:
- मधुमक्खियाँ और तितलियाँ मकरंद लेते समय एक फूल का पराग दूसरे फूल तक पहुँचाती हैं, जिससे आम, सरसों और कद्दू में फल बनते हैं। इनके बिना उपज बहुत घट जाती है।
- केंचुए मिट्टी में बिल बनाकर उसमें वायु और जल पहुँचाते हैं तथा सूखी पत्तियों को खाद में बदल देते हैं, जिससे पौधे अच्छी वृद्धि करते हैं। इसीलिए इन्हें किसान का मित्र कहा जाता है।
- पशु घास खाते हैं और उनका गोबर मिट्टी को पोषक तत्व लौटाता है, जिससे नई घास उगती है।
- मेंढक और पक्षी उन कीटों को खाते हैं जो धान की फ़सल नष्ट कर देते; साँप उन चूहों को खाते हैं जो संचित अनाज खाते हैं।
- गिरी हुई पत्तियाँ सड़कर कवकों, कीड़ों और जीवाणुओं का भोजन बनती हैं, जो पोषक तत्व मुक्त करते हैं और वृक्ष उन्हें जड़ों से पुन: ग्रहण कर लेते हैं।
- बरगद और पीपल के फल चमगादड़, कोयल और बंदर खाते हैं; बीज दूर जाकर गिरते हैं और नए वृक्ष बनते हैं।
मुख्य विचार: इन उदाहरणों से पता चलता है कि पौधे और जंतु एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। एक सदस्य हट जाए तो शेष को हानि होती है — मधुमक्खियाँ न रहें तो आम कम फलेगा; वृक्ष कट जाएँ तो पक्षियों का भोजन और आश्रय दोनों चले जाएँगे।