कुतूहल अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पेड़ कुछ पक्षियों और जंतुओं को भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं, जंतु फल खाने के बाद बीज फैलाने में सहायता करते हैं इत्यादि। क्या आप ऐसे कुछ अन्य उदाहरण सोच सकते हैं?
उत्तर

हाँ। किसी क्षेत्र की जैव विविधता का प्रत्येक सदस्य दूसरे सदस्यों पर निर्भर रहता है। हमारे आस-पास से कुछ और उदाहरण:

  • मधुमक्खियाँ और तितलियाँ मकरंद लेते समय एक फूल का पराग दूसरे फूल तक पहुँचाती हैं, जिससे आम, सरसों और कद्दू में फल बनते हैं। इनके बिना उपज बहुत घट जाती है।
  • केंचुए मिट्टी में बिल बनाकर उसमें वायु और जल पहुँचाते हैं तथा सूखी पत्तियों को खाद में बदल देते हैं, जिससे पौधे अच्छी वृद्धि करते हैं। इसीलिए इन्हें किसान का मित्र कहा जाता है।
  • पशु घास खाते हैं और उनका गोबर मिट्टी को पोषक तत्व लौटाता है, जिससे नई घास उगती है।
  • मेंढक और पक्षी उन कीटों को खाते हैं जो धान की फ़सल नष्ट कर देते; साँप उन चूहों को खाते हैं जो संचित अनाज खाते हैं।
  • गिरी हुई पत्तियाँ सड़कर कवकों, कीड़ों और जीवाणुओं का भोजन बनती हैं, जो पोषक तत्व मुक्त करते हैं और वृक्ष उन्हें जड़ों से पुन: ग्रहण कर लेते हैं।
  • बरगद और पीपल के फल चमगादड़, कोयल और बंदर खाते हैं; बीज दूर जाकर गिरते हैं और नए वृक्ष बनते हैं।
मुख्य विचार: इन उदाहरणों से पता चलता है कि पौधे और जंतु एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। एक सदस्य हट जाए तो शेष को हानि होती है — मधुमक्खियाँ न रहें तो आम कम फलेगा; वृक्ष कट जाएँ तो पक्षियों का भोजन और आश्रय दोनों चले जाएँगे।
प्र2.
आप अपनी नोटबुक और पुस्तकों को समूहों में कैसे व्यवस्थित करेंगे? क्या उन्हें समूहों में व्यवस्थित करने से आपको अपने बस्ते को अच्छे ढंग से व्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी?
उत्तर

हाँ — समूह बनाने से बस्ता कहीं अधिक सुविधाजनक हो जाता है। मैं इस प्रकार व्यवस्थित करूँगा/करूँगी:

  • विषय के अनुसार — विज्ञान की पुस्तक के साथ विज्ञान की नोटबुक, गणित के साथ गणित। फिर एक दिन का गृहकार्य करने के लिए केवल एक बंडल निकालना पड़ेगा।
  • प्रकार के अनुसार — सभी पाठ्यपुस्तकें बड़े खाने में, उनके पीछे सभी नोटबुक, ऊपर रफ़ रजिस्टर।
  • समय-सारणी के अनुसार — केवल आज के कालांशों की पुस्तकें, कालांश के क्रम में।
  • आकार के अनुसार — मोटी पुस्तकें पीछे की ओर ताकि बस्ता फूले नहीं, पतली आगे।
समूह बनाने से सहायता क्यों मिलती है: अव्यवस्थित बस्ते में एक पुस्तक ढूँढ़ने के लिए सब कुछ टटोलना पड़ता है। समूह बन जाने पर खोज केवल एक छोटे समूह तक सिमट जाती है। विज्ञान में भी यही कारण है — समूह बनाने से पौधों और जंतुओं को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समझना और अध्ययन करना सरल हो जाता है।
क्या आप जानते हैं? यह विचार भारत में हर जगह दिखता है — किराने की दुकान में सारी दालें एक ओर और साबुन एक ओर, दवा की दुकान में दवाएँ प्रकार के अनुसार, पुस्तकालय में पुस्तकें विषय के अनुसार। समूह बनाने के महत्व के विषय में आप अध्याय हमारे आस-पास की सामग्री में और अधिक जानेंगे।
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