प्र1.
अलग-अलग क्षेत्रों में पाए जाने वाले ये दोनों प्रकार के पौधे एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। आइए, पता लगाते हैं कि ऐसा क्यों है? एक क्षेत्र की जैव विविधता अन्य क्षेत्रों की जैव विविधता से अलग क्यों होती है?
उत्तर
क्योंकि दोनों क्षेत्रों की परिस्थितियाँ पूर्णत: भिन्न हैं, और वहाँ केवल वही पौधे रह पाते हैं जो उन विशेष परिस्थितियों में जीवित रह सकें।
| राजस्थान का मरुस्थल — नागफनी (चित्र 2.9) | हिमाचल का हिमालयी क्षेत्र — देवदार (चित्र 2.10) | |
|---|---|---|
| परिस्थितियाँ | बहुत कम जल; दिन में अत्यधिक गरम, रात में अत्यधिक ठंडा | अत्यधिक ठंड, बार-बार हिमपात |
| पौधा कैसा दिखता है | मोटे और मांसल तने | शंक्वाकार आकृति, लचीली और झुकी हुई शाखाएँ |
| कैसे सहायता करता है | मांसल तना जल संगृहित करता है और गरम परिस्थितियों को सहने में सहायक है | आकृति के कारण बर्फ आसानी से फिसल जाती है, इसलिए शाखाएँ भार से टूटती नहीं |
एक पंक्ति में तर्क: थार में लगाया गया देवदार सूख जाएगा क्योंकि उसके पास जल संचित करने का उपाय नहीं; हिमालय की ढलान पर नागफनी जमा देने वाली बर्फ के भार से नष्ट हो जाएगी। दोनों एक ही प्रकार की परिस्थितियों के लिए बने हैं। भिन्न परिस्थितियों के कारण ही विभिन्न स्थानों की जैव विविधता एक-दूसरे से बहुत अलग होती है।
क्या आप जानते हैं? नागफनी की पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं। चौड़ी पत्तियाँ गरम शुष्क हवा में बहुत जल उड़ा देतीं — और काँटे संचित जल को प्यासे जंतुओं से भी बचाते हैं।