कुतूहल अध्याय 3 और भी सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किराने की खरीदारी के बाद विभिन्न खाद्य पदार्थों के पैकेट खोलने में अगली बार अपनी माता जी की मदद करें। कम से कम तीन फोर्टीफाइड (प्रबलीकृत) खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी को पढ़ें और उनका विश्लेषण करें।
उत्तर

प्रबलीकरण (फोर्टीफिकेशन) का अर्थ है — आहार की पोषण गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए प्रसंस्करण के समय उसमें अतिरिक्त पोषक तत्व मिलाना। पैकेट पर “फोर्टिफाइड”, “+F” या FSSAI का नीला +F चिह्न देखिए।

परियोजना कैसे करें: प्रत्येक पैकेट के लिए लिखिए — वस्तु का नाम, मिलाया गया पोषक तत्व, प्रति 100 ग्राम मात्रा और वह किस कमी से बचाता है।

प्रबलीकृत वस्तुमिलाया गया पोषक तत्वक्यों मिलाया जाता है
आयोडीनयुक्त नमकआयोडीन के लवणघेंघा से बचाव — इसी अध्याय के अध्ययन 2 का उदाहरण
प्रबलीकृत आटाआयरन, फोलिक अम्ल, विटामिन B12एनीमिया से बचाव, जो भारत में बहुत सामान्य है
प्रबलीकृत दूध / तेलविटामिन A और विटामिन Dआँखों की रक्षा और कैल्सियम के अवशोषण में सहायता
प्रबलीकृत चावल (राशन की दुकान का)आयरन, फोलिक अम्ल, विटामिन B12उन परिवारों तक पहुँचता है जिनका मुख्य अनाज चावल है
नमूना विश्लेषण: नमक के पैकेट पर लिखा है — “आयोडीनयुक्त नमक, पैकिंग के समय आयोडीन 15 ppm से कम नहीं”। आटे के पैकेट पर लिखा है — “प्रति किलोग्राम आयरन 28 मिग्रा, फोलिक अम्ल 75 माइक्रोग्राम से प्रबलीकृत”। दोनों पर FSSAI का +F चिह्न है। अर्थात् जो आहार हम प्रतिदिन लेते ही हैं, उसी में वह पोषक तत्व मिला दिया गया जिसकी बहुत लोगों में कमी थी — पूरे देश में अभावजन्य रोग रोकने का यह बहुत चतुर और सस्ता उपाय है।
स्मरण रखिए: पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के पैकेट पर पोषक तत्वों की जानकारी होनी चाहिए, और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) वह सरकारी एजेंसी है जो भारत में खाद्य गुणवत्ता को नियंत्रित करती है।
प्र2.
अरुणाचल प्रदेश की अपातानी जनजाति अपनी आहार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए टैप्यो नामक नमक का उत्पादन करती है। इंटरनेट से उनकी नमक बनाने की प्रक्रिया और स्वयं नमक बनाने की आवश्यकता के बारे में अधिक जानकारी एकत्र करें। इसके चित्र एकत्रित करें और उन्हें एक चार्ट पेपर पर चिपकाएँ। साथ ही इस नमक को बनाने की प्रक्रिया और इसकी उपयोगिता के बारे में एक अनुच्छेद लिखें।
उत्तर

चार्ट पर क्या दिखाएँ: अपातानी लोग कहाँ रहते हैं (अरुणाचल प्रदेश की जीरो घाटी), टैप्यो क्या है, वह कैसे बनता है, उन्हें अपना नमक क्यों बनाना पड़ा और आज वह क्यों कम बनता है।

नमूना अनुच्छेद: अपातानी जनजाति के लोग अरुणाचल प्रदेश की जीरो घाटी में रहते हैं, जो पूर्वी हिमालय में ऊँचाई पर और समुद्र से बहुत दूर है। पुराने समय में समुद्री नमक इन पहाड़ों तक नहीं पहुँच पाता था, इसलिए यह समुदाय अपना नमक स्वयं बनाता था, जिसे टैप्यो कहते हैं। इसके लिए कुछ स्थानीय पौधों — एक विशेष पत्तेदार पौधे, केले के तने और बाँस के पत्तों — को सुखाकर जलाया जाता था और उनकी राख एकत्र की जाती थी। इस राख में से धीरे-धीरे जल छाना जाता था, जो राख के लवणों को अपने में घोल लेता था। फिर इस लवणीय जल को घंटों उबालकर गाढ़ा किया जाता था और अंत में उसे दबाकर एक कठोर धूसर टिकिया बना दी जाती थी — यही टैप्यो है। इसे प्रतिदिन के भोजन में सामान्य नमक के स्थान पर प्रयोग किया जाता था। टैप्यो केवल नमक ही नहीं, कुछ खनिज भी देता था और उसे स्वास्थ्य के लिए हितकर माना जाता था। बाज़ार में आयोडीनयुक्त नमक सुलभ हो जाने के बाद टैप्यो बनाना लगभग बंद हो गया और आज यह मुख्यतः त्योहारों पर तथा परंपरा को जीवित रखने के लिए बनाया जाता है।
यह केवल संस्कृति नहीं, विज्ञान की कहानी भी है: अपातानी लोगों ने आस-पास उपलब्ध सामग्री से एक वास्तविक कमी का समाधान निकाला, वह भी तब जब खनिजों की कोई चर्चा नहीं थी — ठीक वैसे ही जैसे कच्छ के छोटे रन के अगरिया समुद्र के पानी से नमक प्राप्त करते हैं। दोनों इस बात के उदाहरण हैं कि वह खनिज कैसे मिले जो पौधे और जंतु नहीं दे सकते।
प्र3.
वे साग या फल जो किसानों द्वारा खेती किए बिना जंगल या आस-पास के खेतों में प्राकृतिक रूप से उगते हैं, जंगली प्रजाति के माने जाते हैं। परंपरागत रूप से, भारत में कई आदिवासी समूह साग की इन जंगली प्रजातियों पर निर्भर हैं, जो उनके आहार का भाग हैं। महाराष्ट्र की रानभाजी और हिमाचल प्रदेश के खाद्य मशरूम के बारे में पढ़ें। क्या आप अपने क्षेत्र में आहार की ऐसी किसी जंगली प्रजाति के बारे में जानते हैं? कक्षा में चर्चा करें।
उत्तर

रानभाजी (रान = जंगल, भाजी = साग) महाराष्ट्र में उन पत्तेदार सागों का नाम है जो वर्षा की पहली बौछारों के साथ अपने आप उग आते हैं — कुरडू, टाकळा, भारंगी, अंबाडी, कर्टोली, शेवगा के पत्ते। इन्हें खेतों की मेड़ों और पहाड़ी ढलानों से तोड़ा जाता है, वर्षा ऋतु के कुछ ही सप्ताह पकाया जाता है, और ये आयरन, कैल्सियम तथा विटामिन से भरपूर होते हैं।

हिमाचल प्रदेश के खाद्य मशरूम — जैसे गुच्छी (मोरेल), जो कुल्लू और चंबा के जंगलों में अपने आप उगती है — बर्फ पिघलने के बाद एकत्र की जाती है, सुखाकर रखी जाती है और त्योहारों के व्यंजनों में प्रयोग होती है। खाद्य मशरूम प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं और अधिकतर अंधेरे तथा नमी वाले स्थानों पर उगते हैं।

क्षेत्रजंगली आहारकैसे खाया जाता है
महाराष्ट्ररानभाजी — कुरडू, टाकळा, कर्टोलीवर्षा ऋतु में सब्जी के रूप में
हिमाचल प्रदेशगुच्छी और अन्य खाद्य मशरूम, लिंगड़ीसुखाकर, फिर तरी में
झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशाकोइनार और मुनगा के पत्ते, महुआ के फूल, बाँस की कोंपल, चापड़ा चटनीसाग, चटनी
पूर्वोत्तरबाँस की कोंपल, जंगली केले का फूल, फर्न की कोंपलइरोम्बा, तरी और अचार
राजस्थान और गुजरातकेर, सांगरी, ककड़ी (कचरी), गूँदासुखाकर केर-सांगरी के रूप में
कक्षा की चर्चा के लिए: बड़े-बूढ़ों से पूछिए कि आपके क्षेत्र में कौन-से जंगली साग, फल या मशरूम खाए जाते थे, वे किस महीने आते हैं और क्या आज भी एकत्र किए जाते हैं। स्थानीय नाम सबसे पहले लिखिए — वह नाम स्वयं में सहेजने योग्य ज्ञान है।
महत्वपूर्ण सावधानी: जंगली मशरूम या बेर स्वयं तोड़कर कभी मत खाइए। कई विषैली प्रजातियाँ खाद्य प्रजातियों जैसी ही दिखती हैं। इन्हें केवल वही एकत्र करे जिसने अनुभवी बुजुर्गों से पहचानना सीखा हो।
प्र4.
उन जंक फूड की सूची बनाएँ जिन्हें आप प्रायः खाते हैं। अपने मित्रों से भी ऐसी सूची बनाने के लिए कहें। इन सूचियों के आधार पर अपने प्रधानाध्यापक को एक पत्र लिखकर स्कूल परिसर में जंक फूड पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध करें तथा स्वस्थ विकल्प सुझाएँ।
उत्तर

चरण 1 — सूचियाँ। लगभग 20 सहपाठियों से सूची लीजिए और गिनिए कि किस वस्तु का नाम कितने बच्चों ने लिखा। प्रायः परिणाम ऐसा मिलता है: आलू के चिप्स (17), कार्बोनेटेड ठंडे पेय (15), टॉफी (14), इंस्टेंट नूडल्स (11), पैकेटबंद केक और क्रीम बिस्कुट (9), तला हुआ समोसा और बर्गर (8)।

चरण 2 — पत्र। पत्र छोटा, शिष्ट और अपने आँकड़ों पर आधारित रखिए।

नमूना पत्र:

सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय/महोदया,
[विद्यालय का नाम], [स्थान]

विषय: विद्यालय परिसर में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने हेतु अनुरोध

महोदय/महोदया,

सविनय निवेदन है कि हम कक्षा छह के विद्यार्थियों ने विज्ञान के आहार संबंधी अध्याय के अंतर्गत अपनी कक्षा में एक छोटा सर्वेक्षण किया। बीस विद्यार्थियों ने वे अल्पाहार लिखे जो वे प्रायः खाते हैं। आलू के चिप्स 17 विद्यार्थियों ने, ठंडे पेय 15 ने और टॉफी 14 ने लिखी। अध्याय में हमने पढ़ा कि ऐसे खाद्य पदार्थों में उच्च शर्करा और वसा के कारण अधिक कैलोरी होती है, परंतु प्रोटीन, विटामिन, खनिज और आहारीय रेशे बहुत कम होते हैं, तथा इनके बार-बार सेवन से मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।

अतः हमारा विनम्र अनुरोध है कि विद्यालय की कैंटीन तथा द्वार के बाहर की दुकानों पर आलू के चिप्स, कार्बोनेटेड पेय और टॉफी की बिक्री रोकी जाए। इनके स्थान पर भुने चने, मुरमुरा, ऋतु के फल, उबला भुट्टा, अंकुरित अनाज की चाट, छाछ, नींबू पानी और गुड़-मूँगफली की चिक्की उपलब्ध कराई जाएँ। ये सस्ते, सुलभ और कहीं अधिक स्वास्थ्यप्रद हैं।

आपकी कृपा के लिए हम आभारी रहेंगे।

आपका/आपकी आज्ञाकारी,
[नाम], कक्षा छह-[वर्ग], अनुक्रमांक [ ]
दिनांक: [ ]
सर्वेक्षण से पत्र सशक्त क्यों होता है: वास्तविक विद्यार्थियों से एकत्र किए गए आँकड़ों पर आधारित अनुरोध को अनदेखा करना कठिन होता है। यही अंतर है केवल शिकायत और प्रमाण में।
प्र5.
आयु, शारीरिक क्रिया और स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर विभिन्न व्यक्तियों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं में विभिन्नता का पता लगाएँ। अपने अवलोकन अंकित करें। चर्चा और विश्लेषण करें।
उत्तर

कैसे करें: अपने परिवार या मोहल्ले के भिन्न आयु और व्यवसाय के छह व्यक्ति चुनिए। प्रत्येक की आयु, दिन भर की शारीरिक क्रिया, कोई स्वास्थ्य स्थिति और मोटे तौर पर वे क्या-कितना खाते हैं, यह लिखिए। फिर तुलना कीजिए।

व्यक्तिशारीरिक क्रियाआहार में सबसे अधिक क्या चाहिए
शिशु / छोटा बच्चाबहुत तेज़ी से बढ़ रहा हैदूध, प्रोटीन, कैल्सियम, आयरन — थोड़ी-थोड़ी मात्रा, कई बार
विद्यार्थी (आप)वृद्धि के साथ खेल और अध्ययनपर्याप्त प्रोटीन, कैल्सियम, आयरन और ऊर्जा वाला संतुलित आहार; नाश्ता अनिवार्य
किसान या श्रमिकबहुत भारी शारीरिक श्रमकहीं अधिक ऊर्जा और प्रोटीन; पसीने में गए जल और लवण की पूर्ति
कार्यालय कर्मीअधिकतर बैठकर कामकम ऊर्जा; अधिक साग-भाजी, फल और रेशे, जिससे मोटापा न हो
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली मातादो शरीरों का पोषणअतिरिक्त प्रोटीन, आयरन, कैल्सियम, फोलिक अम्ल और तरल
वृद्धजनहल्की गतिविधि; दुर्बल अस्थियाँ और धीमा पाचनकैल्सियम, विटामिन D, नरम व रेशेदार आहार; तेल, नमक और शर्करा कम
रोगीशरीर स्वयं की मरम्मत कर रहा हैहल्का सुपाच्य आहार, अतिरिक्त प्रोटीन, विटामिन और तरल
विश्लेषण: पोषक तत्वों का प्रकार सबके लिए समान है — अंतर मात्रा में और इसमें है कि किस पोषक तत्व को बढ़ाना है। आवश्यकता आयु, लिंग, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य स्थिति और जीवनशैली के अनुसार बदलती है, ठीक जैसा अध्याय में कहा गया है। इसीलिए एक ही आहार तालिका पूरे परिवार पर लागू नहीं हो सकती।
प्र6.
आपके पड़ोस में रहने वाले बारह वर्ष के बच्चे को संतुलित आहार देने के लिए एक आहार तालिका (डाइट चार्ट) बनाएँ। आहार तालिका में ऐसे खाद्य पदार्थ सम्मिलित होने चाहिए जो सस्ते हों और आपके क्षेत्र में सहजता से उपलब्ध हों।
उत्तर

बारह वर्ष का बच्चा तेज़ी से बढ़ रहा होता है, इसलिए तालिका में प्रोटीन, कैल्सियम और आयरन पर्याप्त होने चाहिए, साथ ही रूक्षांश और जल भी। नीचे की सभी वस्तुएँ सस्ती और भारतीय बाज़ार में सहज उपलब्ध हैं।

समयखाद्य पदार्थकौन-से पोषक तत्व
प्रातः जागते हीएक गिलास जल; भीगे चने या 4–5 भीगी मूँगफलीजल, प्रोटीन, आयरन
नाश्तासब्जी और मूँगफली वाला पोहा या उपमा, अथवा 2 रोटी-सब्जी; एक गिलास दूध; एक केलाकार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्सियम, विटामिन
दोपहर से पहले (विद्यालय का अवकाश)ऋतु का फल — अमरूद, संतरा, पपीता; मुट्ठी भर भुने चने या मुरमुराविटामिन C, रेशे, प्रोटीन
दोपहर का भोजन2–3 रोटी (गेहूँ या बाजरा) या चावल; एक कटोरी दाल या राजमा; हरी सब्जी; दही; खीरा-टमाटर-प्याज का सलादसभी पोषक तत्व एक साथ — संतुलित थाली
सायंकालछाछ या नींबू पानी; उबला भुट्टा, अंकुरित अनाज की चाट या गुड़-मूँगफली की चिक्कीजल, खनिज, प्रोटीन, आयरन
रात का भोजनरोटी या चावल; लौकी, पालक या भिंडी की सब्जी; दाल या अंडा; थोड़ा घीकार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, वसा
दिन भर6–8 गिलास स्वच्छ जलपोषक तत्वों का अवशोषण और अपशिष्ट का निष्कासन

तालिका बनाते समय मैंने ये नियम रखे—

  • प्रत्येक मुख्य भोजन में अनाज + दाल, जिससे प्रोटीन कभी न छूटे।
  • प्रतिदिन दूध या दही — कैल्सियम के लिए।
  • प्रतिदिन एक फल और एक कच्चा सलाद — विटामिन C और रूक्षांश के लिए।
  • सप्ताह में कम से कम दो बार हरी पत्तेदार साग — आयरन के लिए।
  • केवल आयोडीनयुक्त नमक, वह भी पकाने के बाद।
  • दैनिक तालिका में जंक फूड नहीं — चिप्स और ठंडे पेय कभी-कभार ही।
  • स्थानीय और ऋतु के अनुसार वस्तुएँ — सस्ती, ताजी और कम खाद्य मील वाली।
सुझाव: अपने क्षेत्र में जो उगता है, उसी के अनुसार वस्तुएँ बदल लीजिए — कर्नाटक में रागी माल्ट, राजस्थान में बाजरे की रोटी, बिहार में सत्तू का शरबत, ओडिशा में पखाल। पोषक तत्व वही रहेंगे, केवल नाम बदलेंगे।
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