(क) कैल्सियम की गोली क्यों: क्योंकि कैल्सियम हमारी अस्थियों और दाँतों को स्वस्थ रखता है (चित्र 3.5)। टूटी हड्डी को फिर से बनना पड़ता है और अस्थि मुख्यतः कैल्सियम से ही बनी होती है। अतिरिक्त कैल्सियम से हड्डी शीघ्र और मजबूती से जुड़ती है। कैल्सियम की कमी से दुर्बल अस्थियाँ और दंतक्षय होते हैं।
(ख) दूसरी बार विटामिन D क्यों जोड़ा गया: क्योंकि विटामिन D अस्थि और दाँतों के स्वास्थ्य के लिए शरीर में कैल्सियम के अवशोषण में सहायक है। यदि शरीर कैल्सियम को आहार से रक्त और अस्थियों तक ले ही न जा सके, तो खाई हुई गोली का लाभ नहीं। विटामिन D ही यह अवशोषण संभव बनाता है — इसलिए चिकित्सक ने दोनों साथ दिए।
कैल्सियम = अस्थि की निर्माण सामग्री
विटामिन D = वह सहायक जो शरीर को यह सामग्री भीतर लेने देता है
विटामिन D के बिना कैल्सियम → अधिकांश शरीर से बाहर निकल जाता है
विटामिन D के साथ कैल्सियम → अस्थि ठीक से जुड़ती है
(ग) मेरे मन में उठने वाले प्रश्न—
- चिकित्सक ने पहली बार ही कैल्सियम के साथ विटामिन D क्यों नहीं दिया?
- क्या दूसरी बार की जाँच में विटामिन D कम निकला या हड्डी धीरे जुड़ रही थी, इसलिए सिरप जोड़ा गया?
- क्या गौरव को यही विटामिन D सुबह की धूप में बैठकर प्राकृतिक रूप से मिल सकता था, क्योंकि सूर्य के प्रकाश से हमारे शरीर में विटामिन D बनता है?
- क्या दूध, दही, पनीर, रागी और तिल से बिना गोली के पर्याप्त कैल्सियम मिल सकता था?
- ऐसे पूरक कितने समय तक लेने चाहिए, और क्या इनकी अधिकता हानिकारक हो सकती है?
सुझाव: भाग (ग) का कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है — पुस्तक आपकी जिज्ञासा देखना चाहती है। चिकित्सक ने दवा क्यों बदली, इस पर कोई भी तर्कसंगत प्रश्न सही उत्तर है, बशर्ते आप अपना कारण भी लिखें।