कुतूहल अध्याय 3 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
निम्नलिखित में से असंगत को चुनें और कारण बताएँ— (क) ज्वार, बाजरा, रागी, चना (ख) राजमा, मूँग, सोयाबीन, चावल
उत्तर

(क) असंगत है — चना

ज्वार, बाजरा और रागी तीनों मिलेट (कदन्न) हैं — छोटे आकार के अनाज, जिनमें मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट होता है। चना एक दलहन है, मिलेट नहीं, और उसका मुख्य पोषक तत्व प्रोटीन है। इसलिए वह इस समूह में नहीं आता।

(ख) असंगत है — चावल

राजमा, मूँग और सोयाबीन तीनों दलहन हैं और प्रोटीन के समृद्ध स्रोत अर्थात् शरीर वर्धक भोजन हैं। चावल एक अनाज है, जिसका मुख्य पोषक तत्व मंड (स्टार्च) अर्थात् कार्बोहाइड्रेट है — यह ऊर्जा प्रदायी भोजन है।

 समूहमुख्य पोषक तत्वअसंगतक्यों
(क)ज्वार, बाजरा, रागी — मिलेटकार्बोहाइड्रेटचनायह दलहन है, प्रोटीन समृद्ध
(ख)राजमा, मूँग, सोयाबीन — दलहनप्रोटीनचावलयह अनाज है, मंड समृद्ध
सुझाव: ‘असंगत चुनिए’ वाले प्रश्न में सबसे पहले शेष तीन का साझा गुण लिखिए। इसी से कारण ठोस बनता है।
प्र2.
भारत में पारंपरिक और आधुनिक पाक पद्धतियों की तुलना करते हुए चर्चा करें।
उत्तर

पाक पद्धतियाँ अर्थात् भोजन बनाने और पकाने के तरीके। भारत में इनमें बहुत परिवर्तन हुआ है, और पुरानी व नई दोनों पद्धतियों के अपने-अपने लाभ हैं।

पक्षपारंपरिक पद्धतिआधुनिक पद्धति
चूल्हा और ईंधनलकड़ी, उपले या कोयले का चूल्हा; अंगीठी; तंदूरएलपीजी गैस चूल्हा, इंडक्शन, माइक्रोवेव, इलैक्ट्रिक कुकर
पीसनासिल-बट्टा, हाथ की चक्की, ओखली-मूसल — मसाला प्रतिदिन ताजाइलैक्ट्रिक मिक्सी-ग्राइंडर; पैकेट का तैयार मसाला
बर्तनमिट्टी की हाँडी, लोहे की कड़ाही, पीतल-काँसे के बर्तनप्रेशर कुकर, नॉन-स्टिक तवा, स्टील और एल्युमिनियम के बर्तन
समय और श्रमधीमा; घंटों का कठिन शारीरिक श्रमतेज़ और सरल; कुछ ही मिनटों में भोजन
सामग्रीस्थानीय, ऋतु के अनुसार, ताजी; मिलेट और मोटे अनाजपूरे वर्ष देश भर की वस्तुएँ; पैकेटबंद और प्रसंस्कृत आहार
संचयनधूप में सुखाना, अचार डालना, अनाज की कोठीरेफ्रिजरेटर, बंद पैकेट, परिरक्षक
स्वास्थ्य और पर्यावरणरसोई में धुआँ, पर ताजा पिसा मसाला और धीमी आँच का पौष्टिक भोजनधुआँरहित और तेज़, पर अधिक प्रसंस्कृत आहार और अधिक पैकिंग कचरा

परिवर्तन क्यों हुआ: तकनीकी विकास, बेहतर परिवहन और बेहतर संचार — और इसलिए भी कि परिवारों के पास पहले जितना समय नहीं है।

संतुलित दृष्टि: आधुनिक विधियाँ समय, श्रम और ईंधन बचाती हैं तथा गैस की रसोई पकाने वाले के स्वास्थ्य के लिए कहीं अच्छी है। परंतु पारंपरिक विधियों में ताजा पिसा मसाला, ऋतु का आहार, कम पैकिंग और मिलेट का अधिक उपयोग था। उचित मार्ग यही है कि नई सुविधा रखें और पुरानी अच्छी आदतें लौटाएँ।
प्र3.
शिक्षक का कहना है कि अच्छा आहार औषधि के रूप में कार्य कर सकता है। रवि इस कथन को लेकर उत्सुक है और वह अपने शिक्षक से कुछ प्रश्न पूछना चाहता है। कम से कम ऐसे दो प्रश्न सूचीबद्ध करें, जो वह पूछ सकता है।
उत्तर

रवि ऐसे प्रश्न पूछे जिनका उत्तर प्रमाण के साथ दिया जा सके। दो अच्छे प्रश्न—

  1. “कौन-से रोग केवल आहार से, बिना किसी औषधि के, ठीक या दूर किए जा सकते हैं?” — उत्तर होगा अभावजन्य रोग: आँवला-नींबू से स्कर्वी, गाजर-पपीते से रतौंधी की रोकथाम, आयोडीनयुक्त नमक से घेंघा, हरी साग और गुड़ से एनीमिया।
  2. “यदि आहार औषधि का काम कर सकता है, तो चिकित्सक गोलियाँ और सिरप क्यों देते हैं?” — क्योंकि आहार धीरे काम करता है और केवल पोषक तत्वों की कमी में; संक्रमण या गंभीर कमी में औषधि भी आवश्यक है, जैसे प्रश्न 6 में रेशमा के साथ हुआ।

रवि ये प्रश्न भी पूछ सकता है—

  • आहार बदलने का असर स्वास्थ्य पर दिखने में कितना समय लगता है?
  • क्या किसी ‘स्वास्थ्यप्रद’ आहार को भी बहुत अधिक खाना हानिकारक हो सकता है?
  • जेम्स लिंड के नाविक नींबू-संतरे खाने के बाद ही स्वस्थ क्यों हुए?
  • क्या दादी-नानी के नुस्खे — हल्दी वाला दूध, तुलसी, अदरक — इसी प्रकार काम करते हैं?
  • हड्डी टूटने या घाव होने पर कौन-सा आहार लेना चाहिए और क्यों?
ये अच्छे प्रश्न क्यों हैं: इनमें से प्रत्येक की जाँच की जा सकती है — किसी क्रियाकलाप से, सर्वेक्षण से या विश्वसनीय पुस्तक से। “क्या आहार अच्छा है?” जैसे प्रश्न की जाँच संभव नहीं और उससे कुछ सीखा भी नहीं जा सकता।
प्र4.
सभी स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ आवश्यक रूप से स्वास्थ्यप्रद नहीं होते, और सभी पौष्टिक खाद्य पदार्थ सदैव आनंददायक नहीं होते। कुछ उदाहरणों के साथ अपने विचार साझा करें।
उत्तर

यह कथन सत्य है — स्वाद और पोषण दो अलग बातें हैं, और हमारी जीभ स्वास्थ्य की अच्छी परखने वाली नहीं है।

स्वादिष्ट, पर स्वास्थ्यप्रद नहींक्योंपौष्टिक, पर सबको प्रिय नहींक्यों अच्छा है
आलू के चिप्स, समोसा, फ्रेंच फ्राइज़वसा और नमक बहुत अधिक, प्रोटीन-रेशे कमकरेलाकड़वा, पर विटामिन और खनिजों से भरपूर
टॉफी, चॉकलेट, गुलाब जामुनअधिकतर शर्करा और वसा; दंतक्षय का कारणपालक, मेथी और अन्य सागआयरन, विटामिन A, कैल्सियम और रूक्षांश
कार्बोनेटेड ठंडे पेयकेवल शर्करा और जल — खाली कैलोरीरागी मुड्डे, बाजरे की रोटीरेशे, आयरन और कैल्सियम
इंस्टेंट नूडल्स, सफेद ब्रेडमैदा से बने, रेशे और प्रोटीन बहुत कमअंकुरित अनाज, दही, उबली सब्जियाँप्रोटीन, कैल्सियम, विटामिन C, रेशे

मेरे विचार: स्वादिष्ट जंक फूड कभी-कभार ठीक है, पर वह आहार का आधार नहीं बन सकता। और जो पौष्टिक आहार अच्छा नहीं लगता, उसे प्रायः रुचिकर बनाया जा सकता है — करेला भरकर तला हुआ, पालक पनीर की तरी में, रागी मीठे माल्ट के रूप में, बाजरे की रोटी गुड़-घी के साथ।

जीभ हमें भ्रमित क्यों करती है: हमारी जीभ को शर्करा, वसा और नमक भाते हैं, क्योंकि पुराने समय में ये दुर्लभ और बहुमूल्य थे। आज ये सस्ते और सर्वत्र हैं, इसलिए वही पुरानी पसंद अब हमें गलत दिशा में ले जाती है। इसीलिए स्वाद पर नहीं, पैकेट पर लिखी जानकारी पर भरोसा कीजिए।
प्र5.
मेदू सब्जियाँ नहीं खाता लेकिन बिस्कुट, नूडल्स और डबल रोटी (सफेद ब्रेड) का आनंद लेता है। उसे अक्सर पेट में दर्द और कब्ज की शिकायत रहती है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए उसे अपने आहार में क्या बदलाव करना चाहिए? अपने उत्तर को विस्तार से समझाइए।
उत्तर

मेदू की समस्या आहारीय रेशों (रूक्षांश) और जल की कमी है। बिस्कुट, नूडल्स और सफेद ब्रेड मैदा से बनते हैं, जिससे रेशे निकाल दिए जाते हैं, और वह सब्जियाँ बिलकुल नहीं खाता — अतः उसके आहार में मल के सुचारू निकास में सहायता करने वाला कुछ भी नहीं है।

सब्जियाँ नहीं + केवल मैदा के पदार्थ → रूक्षांश बहुत कम → अनपचा आहार धीरे बढ़ता है → कब्ज और पेट दर्द

उसे ये परिवर्तन करने चाहिए—

  1. प्रतिदिन हरी पत्तेदार साग — पालक, मेथी, सरसों — तथा लौकी, भिंडी, गाजर जैसी सब्जियाँ खाए।
  2. ताजे फल, जहाँ संभव हो छिलके सहित — अमरूद, सेब, पपीता, केला।
  3. सफेद ब्रेड और मैदे के नूडल्स के स्थान पर साबुत अनाज — गेहूँ के आटे की रोटी, बाजरे-ज्वार की रोटी, दलिया।
  4. दालें और मेवे जोड़े — दाल, राजमा, चना, मूँगफली — जो रेशे और प्रोटीन दोनों देते हैं।
  5. भोजन के साथ कच्चा सलाद और एक कटोरी दही।
  6. दिन भर पर्याप्त जल पिए तथा बिस्कुट और पैकेटबंद अल्पाहार घटाए।
रूक्षांश कैसे काम करता है: आहारीय रेशे, जिन्हें रूक्षांश भी कहा जाता है, शरीर को कोई पोषक तत्व नहीं देते। इनका कार्य अलग है — ये शरीर को अनपचे आहार से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं और मल के सुचारू निकास को सुनिश्चित करते हैं। आहार में रूक्षांश मुख्यतः पादप उत्पादों से मिलता है, और मेदू की थाली में वही नहीं है। यही सलाह चिकित्सक ने मिष्टी की दादी माँ को भी दी थी।
प्र6.
रेशमा को कम रोशनी में देखने में कठिनाई हो रही थी। चिकित्सक ने उसकी दृष्टि का परीक्षण किया और एक विशेष विटामिन पूरक (सप्लीमेंट) लेने की सलाह दी। उन्होंने उसे अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को सम्मिलित करने की भी सलाह दी। (क) वह किस अभावजन्य रोग से पीड़ित है? (ख) उसके आहार में किस खाद्य घटक की कमी हो सकती है? (ग) कुछ खाद्य पदार्थों (किन्हीं चार) का सुझाव दें, जिन्हें इस समस्या को दूर करने के लिए उसे अपने आहार में सम्मिलित करना चाहिए।
उत्तर

(क) अभावजन्य रोग: रतौंधी — अर्थात् अँधेरे में कम दिखाई देना। चित्र 3.5 में इसे “दृष्टि का ह्रास या क्षति” के रूप में दिया गया है और यह विटामिन A की कमी का प्रमुख लक्षण है।

(ख) कमी वाला खाद्य घटक: विटामिन A। विटामिन A आँखों और त्वचा को स्वस्थ रखता है; इसकी कमी होने पर आँख मंद प्रकाश में समायोजित नहीं हो पाती और गंभीर स्थिति में पूर्ण रूप से दिखाई देना बंद भी हो सकता है।

(ग) चार खाद्य पदार्थ जो उसे लेने चाहिए—

खाद्य पदार्थक्यों
गाजरविटामिन A का सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक
पपीताविटामिन A से भरपूर; कच्चा भी खाया जा सकता है
आमऋतु का, पर उत्कृष्ट स्रोत
दूधविटामिन A का जंतु स्रोत, प्रतिदिन उपलब्ध
ये भी अच्छे हैं: हरी पत्तेदार साग (पालक, मेथी), कद्दू, शकरकंद, मक्खन, अंडा और मछली
सुझाव: थोड़ी वसा साथ होने पर विटामिन A का अवशोषण बेहतर होता है, इसलिए एक चम्मच तेल में बनी गाजर की सब्जी या पूरा दूध बिलकुल सूखी गाजर से अधिक लाभ देता है।
प्र7.
आपको निम्नलिखित पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं— (क) डिब्बाबंद फलों का रस (ख) ताजे फलों का रस (ग) ताजे फल। पोषण की दृष्टि से आप किसे लेना पसंद करेंगे और क्यों?
उत्तर

मैं (ग) ताजे फल को चुनूँगा/चुनूँगी।

 डिब्बाबंद रसताजे फलों का रसताजा फल
आहारीय रेशेलगभग नहींबहुत कम — छानने में निकल जाते हैंपूरे, गूदे और छिलके सहित
विटामिन Cप्रसंस्करण और भंडारण में बहुत नष्टअच्छा, यदि तुरंत पिया जाएसर्वाधिक — कुछ भी नष्ट नहीं
मिलाई गई शर्कराप्रायः मिलाई जाती हैघर में भी अक्सर मिला दी जाती हैकोई नहीं — केवल फल की अपनी शर्करा
परिरक्षक और रंगप्रायः होते हैंनहींनहीं
ताजगीमहीनों पहले बनाताजासबसे ताजा

पूरा फल चुनने के कारण—

  • इसमें आहारीय रेशे बने रहते हैं, जो रस में नष्ट हो जाते हैं — और रेशे कब्ज से बचाते हैं।
  • इसमें मिलाई गई शर्करा, परिरक्षक या कृत्रिम रंग नहीं होते।
  • इसके विटामिन सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि इसे गर्म या लंबे समय तक संचित नहीं किया गया।
  • फल चबाने से पेट भरा लगता है, इसलिए अतिरिक्त कैलोरी नहीं जातीं।
दूसरा विकल्प: ताजे फलों का रस — यदि तुरंत बनाकर बिना शर्करा मिलाए पिया जाए। डिब्बाबंद रस तीनों में सबसे निम्न है, और उसके खाद्य मील भी स्थानीय मंडी के फल से कहीं अधिक हैं।
प्र8.
गौरव के पैर की हड्डी टूट गई। उसके चिकित्सक ने हड्डियों को सीधा (संरेखित) किया और प्लास्टर लगा दिया। चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली भी दी। जब वह दूसरी बार दिखाने गया तब चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली के साथ विटामिन D युक्त सिरप भी पीने के लिए दिया। चित्र 3.5 का संदर्भ लें और अग्रलिखित प्रश्नों के उत्तर दें— (क) चिकित्सक ने गौरव को कैल्सियम की गोली क्यों दी? (ख) दूसरी बार देखने पर चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली के साथ विटामिन D सिरप भी क्यों दिया? (ग) चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली दवाओं के चयन के बारे में आपके मन में क्या सवाल उठता है?
उत्तर

(क) कैल्सियम की गोली क्यों: क्योंकि कैल्सियम हमारी अस्थियों और दाँतों को स्वस्थ रखता है (चित्र 3.5)। टूटी हड्डी को फिर से बनना पड़ता है और अस्थि मुख्यतः कैल्सियम से ही बनी होती है। अतिरिक्त कैल्सियम से हड्डी शीघ्र और मजबूती से जुड़ती है। कैल्सियम की कमी से दुर्बल अस्थियाँ और दंतक्षय होते हैं।

(ख) दूसरी बार विटामिन D क्यों जोड़ा गया: क्योंकि विटामिन D अस्थि और दाँतों के स्वास्थ्य के लिए शरीर में कैल्सियम के अवशोषण में सहायक है। यदि शरीर कैल्सियम को आहार से रक्त और अस्थियों तक ले ही न जा सके, तो खाई हुई गोली का लाभ नहीं। विटामिन D ही यह अवशोषण संभव बनाता है — इसलिए चिकित्सक ने दोनों साथ दिए।

कैल्सियम = अस्थि की निर्माण सामग्री
विटामिन D = वह सहायक जो शरीर को यह सामग्री भीतर लेने देता है
विटामिन D के बिना कैल्सियम → अधिकांश शरीर से बाहर निकल जाता है
विटामिन D के साथ कैल्सियम → अस्थि ठीक से जुड़ती है

(ग) मेरे मन में उठने वाले प्रश्न—

  • चिकित्सक ने पहली बार ही कैल्सियम के साथ विटामिन D क्यों नहीं दिया?
  • क्या दूसरी बार की जाँच में विटामिन D कम निकला या हड्डी धीरे जुड़ रही थी, इसलिए सिरप जोड़ा गया?
  • क्या गौरव को यही विटामिन D सुबह की धूप में बैठकर प्राकृतिक रूप से मिल सकता था, क्योंकि सूर्य के प्रकाश से हमारे शरीर में विटामिन D बनता है?
  • क्या दूध, दही, पनीर, रागी और तिल से बिना गोली के पर्याप्त कैल्सियम मिल सकता था?
  • ऐसे पूरक कितने समय तक लेने चाहिए, और क्या इनकी अधिकता हानिकारक हो सकती है?
सुझाव: भाग (ग) का कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है — पुस्तक आपकी जिज्ञासा देखना चाहती है। चिकित्सक ने दवा क्यों बदली, इस पर कोई भी तर्कसंगत प्रश्न सही उत्तर है, बशर्ते आप अपना कारण भी लिखें।
प्र9.
चीनी कार्बोहाइड्रेट का एक उदाहरण है। चीनी का परीक्षण जब आयोडीन विलयन से किया जाता है लेकिन इसका रंग नीला-काला नहीं होता है। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?
उत्तर

क्योंकि आयोडीन परीक्षण केवल मंड (स्टार्च) की पहचान करता है, हर कार्बोहाइड्रेट की नहीं। चीनी कार्बोहाइड्रेट तो है, पर वह मंड नहीं है, इसलिए नीला-काला रंग नहीं आता।

आयोडीन + मंडनीला-काला
आयोडीन + चीनी (एक सरल कार्बोहाइड्रेट) → कोई परिवर्तन नहीं; बूँद अपना भूरा रंग बनाए रखती है

कार्बोहाइड्रेट एक से अधिक रूपों में होते हैं—

  • सरल शर्कराएँ — ग्लूकोस, सामान्य चीनी, गुड़, शहद। स्वाद में मीठी, शीघ्र अवशोषित, आयोडीन से कोई अभिक्रिया नहीं
  • मंड — चावल, गेहूँ, आलू और बाजरे का कार्बोहाइड्रेट। मीठा नहीं, धीरे पचता है, आयोडीन से नीला-काला
केवल मंड ही रंग क्यों देता है: नीला-काला रंग तब बनता है जब आयोडीन मंड की लंबी कुंडलित शृंखलाओं के भीतर फँस जाता है। चीनी में ऐसी लंबी शृंखला होती ही नहीं, इसलिए कोई नया रंगीन पदार्थ नहीं बनता।
सावधानी: इस परिणाम का अर्थ यह नहीं कि चीनी कार्बोहाइड्रेट नहीं है। इसका केवल इतना अर्थ है कि ऋणात्मक आयोडीन परीक्षण मंड की अनुपस्थिति बताता है, कार्बोहाइड्रेट की नहीं।
प्र10.
आप रमन के इस कथन के बारे में क्या सोचते हैं, “सभी मंड (स्टार्च) कार्बोहाइड्रेट हैं लेकिन सभी कार्बोहाइड्रेट मंड नहीं हैं।” अपने उत्तर की जाँच करने के लिए किसी क्रियाकलाप की योजना का वर्णन करें।
उत्तर

रमन का कथन पूर्णतः सही है। मंड कार्बोहाइड्रेट का एक प्रकार है, इसलिए प्रत्येक मंड कार्बोहाइड्रेट है; परंतु ग्लूकोस, चीनी और गुड़ जैसी शर्कराएँ भी कार्बोहाइड्रेट हैं और वे मंड नहीं हैं।

कार्बोहाइड्रेट मंड चावल, आलू, गेहूँ, बाजरा शर्कराएँ — ग्लूकोस, चीनी, गुड़, शहद
मंड कार्बोहाइड्रेट के बड़े समूह के भीतर आता है — इसलिए सभी मंड कार्बोहाइड्रेट हैं, पर शर्कराएँ ऐसे कार्बोहाइड्रेट हैं जो मंड नहीं हैं।

जाँच के लिए क्रियाकलाप की योजना—

  1. ऐसे नमूने एकत्र कीजिए जो सभी कार्बोहाइड्रेट माने जाते हैं: उबले चावल, आलू का टुकड़ा, रोटी का टुकड़ा, सामान्य चीनी, गुड़, शहद और ग्लूकोस चूर्ण।
  2. प्रत्येक नमूना अलग साफ प्लेट में रखिए और उसका मूल रंग लिख लीजिए।
  3. ड्रॉपर से प्रत्येक पर तनु आयोडीन विलयन की 2–3 बूँदें डालिए।
  4. एक मिनट बाद रंग का अवलोकन कीजिए और तालिका में अंकित कीजिए।
  5. विश्लेषण: चावल, आलू और रोटी नीले-काले हो जाते हैं — इनमें मंड है। चीनी, गुड़, शहद और ग्लूकोस में नीला-काला रंग नहीं आता, यद्यपि ये सभी कार्बोहाइड्रेट हैं।
नमूनाकार्बोहाइड्रेट है?आयोडीन परीक्षणमंड है?
उबले चावलहाँनीला-कालाहाँ
आलूहाँनीला-कालाहाँ
रोटीहाँनीला-कालाहाँ
सामान्य चीनीहाँकोई परिवर्तन नहींनहीं
गुड़ / शहदहाँकोई परिवर्तन नहींनहीं
ग्लूकोसहाँकोई परिवर्तन नहींनहीं
निष्कर्ष: जिस भी नमूने ने नीला-काला रंग दिया वह कार्बोहाइड्रेट था, परंतु कई कार्बोहाइड्रेट ऐसे भी थे जिन्होंने कोई रंग नहीं दिया। यही रमन का कथन है, और यह क्रियाकलाप उसे प्रमाणित कर देता है।
प्र11.
प्रयोगशाला में आयोडीन का प्रयोग करते समय आयोडीन की कुछ बूँदें मिष्टी के मोज़े पर तथा उसकी शिक्षिका की साड़ी पर गिरीं। साड़ी पर आयोडीन की बूँदें नीली-काली हो गईं जबकि मोजे पर आयोडीन का रंग नहीं बदला। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?
उत्तर

साड़ी में मंड (कलफ) रहा होगा, जबकि मोज़े में नहीं।

साड़ी पर आयोडीन → नीला-काला → कपड़े में मंड उपस्थित
मोज़े पर आयोडीन → कोई परिवर्तन नहीं → कपड़े में मंड नहीं

साड़ी में मंड क्यों होगा: सूती साड़ियों में धुलाई के बाद प्रायः कलफ (माँड़) लगाया जाता है — चावल का माँड़ या अरारोट का घोल — जिससे साड़ी कड़क, चमकदार और सुंदर लपेटने योग्य बने। यही मंड कपड़े में रह जाता है और आयोडीन उसे तुरंत पकड़ लेता है।

मोज़े का रंग क्यों नहीं बदला—

  • मोज़े प्रायः संश्लेषित रेशे या ऊनी-सूती बुनाई के होते हैं और उनमें कभी कलफ नहीं लगाया जाता — इससे वे कड़े और असुविधाजनक हो जाएँगे।
  • यदि वे सूती भी हों, तो कई बार धुलने और पहने जाने से कोई मंड शेष नहीं रहता।
स्वयं जाँचिए: ताजा कलफ लगे दुपट्टे पर एक बूँद और पुराने मुलायम रूमाल पर एक बूँद आयोडीन डालिए। कलफ वाला कपड़ा नीला-काला हो जाएगा, मुलायम वाला नहीं। धोबी पहले इसी परीक्षण से कलफ की जाँच करते थे।
प्र12.
कदन्न को एक स्वास्थ्यप्रद आहार क्यों माना जाता है? क्या केवल कदन्न खाने से शरीर की पोषण संबंधी सभी आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं? चर्चा करें।
उत्तर

मिलेट स्वास्थ्यप्रद क्यों माने जाते हैं—

  • ये अत्यधिक पौष्टिक अनाज हैं — विटामिन, आयरन और कैल्सियम जैसे खनिजों तथा आहारीय रेशों के अच्छे स्रोत। इसीलिए इन्हें पोषक अनाज भी कहा जाता है।
  • इनके रेशे पाचन सुचारू रखते हैं और कब्ज से बचाते हैं, तथा ऊर्जा धीरे-धीरे और लगातार मिलती है।
  • ये भारत की देशज फसलें हैं और सदियों से भारतीय आहार का अभिन्न अंग रहे हैं।
  • इन्हें अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में सहजता से उगाया जा सकता है और इनमें जल बहुत कम लगता है, इसलिए ये उन शुष्क क्षेत्रों में भी होते हैं जहाँ चावल नहीं हो सकता।
  • स्थानीय रूप से उगने के कारण इनके खाद्य मील भी कम हैं।

क्या केवल मिलेट पर्याप्त हैं? नहीं। ये संतुलित आहार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, परंतु अकेले संतुलित आहार नहीं बन सकते।

मिलेट देते हैंमिलेट से पर्याप्त नहीं मिलताअतः साथ में चाहिए
कार्बोहाइड्रेट, रेशे, आयरन, कैल्सियम, कुछ प्रोटीन और B समूह के विटामिनपर्याप्त उत्तम प्रोटीनदाल, राजमा, दूध, दही, पनीर, अंडा या मछली
 विटामिन Cआँवला, अमरूद, नींबू, संतरा, टमाटर
 विटामिन A और विटामिन Dगाजर, पपीता, दूध, सूर्य का प्रकाश
 पर्याप्त वसाघी, तेल, मूँगफली, तिल
 जल और खनिजों की पूरी विविधताजल, छाछ, साग-भाजी, आयोडीनयुक्त नमक
याद रखने योग्य नियम: किसी एक आहार में सभी पोषक तत्व नहीं होते। बाजरे की रोटी के साथ दाल, साग, दही और थोड़ा गुड़ मिलकर संतुलित भोजन बनते हैं; केवल बाजरे की रोटी नहीं।
प्र13.
आपको विलयन का एक नमूना दिया गया है। आप इसके आयोडीन विलयन होने की संभावना की जाँच किस प्रकार करेंगे?
उत्तर

इसे ऐसे आहार पर परखिए जिसमें मंड निश्चित रूप से हो। यही सबसे सुरक्षित उपाय है, क्योंकि हमें पहले से ज्ञात है कि आयोडीन मंड के साथ क्या करता है।

विधि—

  1. ज्ञात मंड युक्त आहार का एक छोटा टुकड़ा लीजिए — उबले चावल, कच्चे आलू का टुकड़ा या ब्रेड — और उसे साफ प्लेट में रखिए।
  2. दिए गए विलयन का रंग देखिए। तनु आयोडीन विलयन हल्का भूरा या पीलापन लिए भूरा होता है।
  3. ड्रॉपर से उस आहार पर दिए गए विलयन की 2–3 बूँदें डालिए।
  4. एक मिनट तक अवलोकन कीजिए।
अवलोकननिष्कर्ष
आलू या चावल नीला-काला हो जाएयह बहुत संभव है कि विलयन आयोडीन का हो
कोई रंग परिवर्तन नहीं; बूँद केवल आहार को गीला करेयह आयोडीन विलयन नहीं है — जल या कोई अन्य द्रव हो सकता है
परीक्षण निष्पक्ष कैसे बनाएँ: ऐसा आहार लीजिए जिसमें मंड होने का आपको निश्चय हो, जिससे ऋणात्मक परिणाम विलयन के बारे में बताए, आहार के बारे में नहीं। एक नियंत्रण भी रखिए — आलू के दूसरे टुकड़े पर सादे जल की बूँद डालिए। यदि वह अपरिवर्तित रहे और पहला नीला-काला हो जाए, तो परिवर्तन वास्तव में दिए गए विलयन के कारण ही हुआ।
सुरक्षा: किसी अज्ञात विलयन को पहचानने के लिए उसे चखिए या सूँघिए मत। आयोडीन विलयन निगलने पर हानिकारक है। परीक्षण उसी आहार पर कीजिए जिसे बाद में फेंक दिया जाए — कभी उस पर नहीं जिसे कोई खाने वाला हो।
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